'बाहरी कारणों से गिर रहा रुपया', निर्मला सीतारमण का बड़ा बयान; बताया- भारतीय करेंसी को कैसे मजबूत कर रहा RBI?
Nirmala Sitharaman on LTCG and STT: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रुपये की गिरावट को बाहरी बताया और कहा कि ...और पढ़ें
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निर्मला सीतारमण: रुपये की गिरावट बाहरी, RBI कर रहा मजबूत उपाय

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारतीय करेंसी (रुपये) की गिरती कीमत और शेयर बाजार के टैक्स को लेकर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा बयान दिया है। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में बोलते हुए वित्त मंत्री ने पहली ही लाइन में साफ कर दिया कि रुपये में जो भी गिरावट आई है, उसकी असली वजह बाहरी है। लेकिन, इसे संभालने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पूरी तरह मुस्तैद है और आगे भी जरूरी कदम उठाता रहेगा। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि भारत की अर्थव्यवस्था और विदेशी मुद्रा भंडार दोनों एकदम मजबूत स्थिति में हैं, इसलिए चिंता की कोई बात नहीं है।
RBI का एक्शन और रुपये की चाल
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि पिछले डेढ़ साल में ग्लोबल अनिश्चितताओं के कारण अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक (RBI) रुपये में होने वाले अत्यधिक और अचानक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए लगातार काम कर रहा है। उन्होंने एक अहम बात जोड़ते हुए कहा,
आरबीआई का मकसद रुपये की कोई एक फिक्स कीमत तय करना नहीं है। हम चाहते हैं कि रुपया बाजार के हिसाब से अपना स्तर खुद तय करे। RBI सिर्फ यह सुनिश्चित कर रहा है कि बाजार में करेंसी को लेकर भारी उतार-चढ़ाव या सट्टेबाजी न हो और इसके लिए बैंक के प्रयास जारी रहेंगे।"
RBI के फैसलों का दिखा तुरंत असर
रुपये को सहारा देने के लिए रिजर्व बैंक ने इसी वीकेंड कई बड़े फैसले लिए हैं। पेट्रोलियम विपणन कंपनियों (ऑयल मार्केटिंग कंपनियों) के लिए डॉलर की मांग पूरी करने को एक खास सुविधा बनाई गई है, जिससे हाजिर बाजार पर डॉलर की मांग का दबाव कम होगा। साथ ही, विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव कारोबार के नियम सख्त किए गए हैं, ताकि रुपये के खिलाफ सट्टेबाजी पर लगाम लग सके।
वित्त मंत्री ने बताया कि इन कदमों का असर बाजार में तुरंत दिखा है। सोमवार को रुपये की कीमत में 1 प्रतिशत तक का शानदार उछाल आया और मंगलवार को शुरुआती कारोबार में ही यह और मजबूत होकर 94.96 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया।
विदेशी संकट और डॉलर का फ्लो
पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि देश में डॉलर का फ्लो बढ़ाने के लिए सरकार और RBI ने जून में ही कई बड़े कदम उठाए थे। विदेशी निवेशकों (FPIs) को आकर्षित करने के लिए सरकार ने सरकारी प्रतिभूतियों (बॉन्ड्स) में निवेश के नियम आसान किए और ब्याज आय व कैपिटल गेन्स पर इनकम टैक्स में भारी छूट दी। इसका नतीजा यह हुआ कि RBI की अदला-बदली (स्वैप) सुविधा के तहत बैंकों ने 'FCNR(B) जमा योजना' के जरिए 133 अरब डॉलर की भारी-भरकम रकम जुटाई।
LTCG और STT टैक्स पर मिलेगी राहत?
जब वित्त मंत्री से शेयर बाजार में लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG Tax) के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बहुत सकारात्मक जवाब दिया। उन्होंने कहा,
इन टैक्स नियमों में बदलाव को लेकर चर्चा होना एक अच्छी बात है। देश-विदेश के कई निवेशक इस पर अपनी राय रख रहे हैं और मैं इन सुझावों को बहुत गंभीरता से सुनूंगी।"
चूंकि वित्त वर्ष 2027-28 का केंद्रीय बजट अगले साल 1 फरवरी को पेश होना है, इसलिए सीतारमण ने कहा कि बजट की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। ऐसे में अभी यह बताना जल्दबाजी होगी कि सरकार किन प्रस्तावों को हरी झंडी देगी और किनको नहीं।
मजबूत राजकोषीय अनुशासन और बंपर निवेश
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया कि भारत का राजकोषीय अनुशासन (फिस्कल डिसिप्लिन) बहुत मजबूत है और निवेशकों को इसे लेकर बिल्कुल परेशान नहीं होना चाहिए। प्राइवेट इन्वेस्टमेंट पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि आज घरेलू और विदेशी, दोनों ही तरह की प्राइवेट कैपिटल (पूंजी) भारत में जमकर पैसा लगा रही है।
देश में रिन्यूएबल एनर्जी, सेमीकंडक्टर, चिप डिजाइन, बायोसिमिलर, फार्मा उद्योग, जेनेरिक दवाएं और विमानों के रखरखाव (MRO सेंटर) जैसे सेक्टर्स में भारी निवेश आ रहा है।
वित्त मंत्री ने कहा कि इन क्षेत्रों में सिर्फ नई कंपनियां ही एंट्री नहीं कर रही हैं, बल्कि बाजार में मौजूद पुरानी कंपनियां भी अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए जमकर पूंजी लगा रही हैं। कुल मिलाकर भारत का आर्थिक ढांचा हर चुनौती से निपटने के लिए तैयार है।
