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भारतीय मूल के दो भाई नाइजीरिया ऑटोमोबाइल सेक्टर पर करते हैं राज! दुबई से चला रहे कारोबार; अब कोर्ट में क्यों फंसे?

Published: Mon, 19 Oct 2026 09:12 AM (IST)

भारतीय मूल के अरबपति सुनील वासवानी के स्टैलियन ग्रुप को नाइजीरियाई अदालत से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने यूनाइटेड ...और पढ़ें

सुनील वासवानी को फेडरल कोर्ट से बड़ा झटका (AI फोटो)

सुनील वासवानी को फेडरल कोर्ट से बड़ा झटका (AI फोटो)

HighLights

  1. नाइजीरियाई कोर्ट ने UBA के पक्ष में दिया महत्वपूर्ण फैसला

  2. स्टैलियन ग्रुप को 156 बिलियन नाइरा चुकाने का आदेश

  3. भारतीय मूल के अरबपति सुनील वासवानी की कंपनी को झटका

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। अफ्रीकी देश नाइजीरिया से एक बड़ी खबर आई है। दरअसल एक भारतीय मूल के अरबपति कारोबारी सुनील वासवानी को नाइजीरिया की एक फेडरल कोर्ट ने बड़ा झटका दिया है। अदालत ने 'यूनाइटेड बैंक फॉर अफ्रीका पीएलसी' (UBA) के पक्ष में फैसला सुनाया है। यह फैसला स्टैलियन ग्रुप से 156 बिलियन नाइरा (117 मिलियन डॉलर या 1111 करोड़ रुपये) की वसूली के लिए बैंक की तीन साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आया है। स्टैलियन ग्रुप दुबई स्थित एक बड़ा कारोबारी समूह है, जिसे भारतीय-नाइजीरियाई मूल के भाई सुनील और महेश वासवानी चलाते हैं।

अदालत ने क्या कहा?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार बैंक ने कहा है कि लागोस के इकोयी स्थित फेडरल हाई कोर्ट के जस्टिस डैनियल ओसियागोर ने स्टैलियन की गिरवी रखी संपत्तियों पर UBA द्वारा एक 'रिसीवर और मैनेजर' के अपॉइंटमेंट को सही ठहराया। साथ ही, अदालत ने बैंक को अपनी सुरक्षा (सिक्योरिटी) लागू करने का अधिकार भी दिया।
जज ने कहा कि बकाया रकम की सटीक राशि को लेकर असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि मूल कर्ज ही खत्म हो गया है और दोनों पक्षों के बीच खातों के मिलान (रिकॉन्सिलिएशन) से भी कर्ज की देनदारी खत्म नहीं होती।

सभी मुद्दों को सुलझा दिया

अदालत ने प्रतिवादियों (डिफेंडेंट्स) को सरकारी एजेंसियों से मिलने वाले पैसों को कहीं और भेजने से रोक दिया। साथ ही, कर्ज के लिए गारंटी देने वालों की जिम्मेदारी को भी बरकरार रखा। अदालत ने प्रतिवादी कंपनियों में से एक की उस आपत्ति को भी खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि संपत्ति गिरवी रखने से पहले उनकी सहमति लेना जरूरी था। बैंक ने बताया कि अदालत ने उसके सामने आए सभी मुद्दों को UBA के पक्ष में सुलझा दिया है।

UBA ने कहा कि इस फैसले से यह क्लियर हो गया कि "बकाया कर्ज की सटीक राशि को लेकर विवाद होने से, मूल कर्ज की देनदारी अपने आप खत्म या अमान्य नहीं हो जाती।" इस फैसले के बाद, अपॉइंट किए गए रिसीवर, रोमियो एसे माइकल, गिरवी रखी गई संपत्तियों का कब्जा ले सकते हैं और उनकी सुरक्षा के लिए अदालत से आदेश भी ले सकते हैं।

विवाद कैसे शुरू हुआ

UBA ने अपनी कैमरून और आइवरी कोस्ट यूनिट्स के साथ मिलकर 2023 में मुकदमा दायर किया था। इस मामले में प्रतिवादी 'स्टैलियन नाइजीरिया लिमिटेड' और 10 अन्य यूनिट्स हैं। इनमें स्टैलियन मोटर्स लिमिटेड, द होंडा प्लेस लिमिटेड, वॉन ऑटोमोबाइल नाइजीरिया लिमिटेड, पॉपुलर फार्म्स एंड मिल्स लिमिटेड, किंगकी मोटरसाइकिल मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड और खुद सुनील वासवानी शामिल हैं।

अदालत में पेश किए गए दस्तावेजों में बैंक ने बताया कि इसने 2014 में स्टैलियन नाइजीरिया को कर्ज देना शुरू किया था। इन सुविधाओं का इस्तेमाल ग्रुप की अन्य कंपनियों (सिस्टर कंपनियों) ने किया था, जिसके बदले में संपत्तियां गिरवी रखी गई थीं। साथ ही, सुनील वासवानी ने व्यक्तिगत रूप से इन कर्जों की गारंटी दी थी।

पैसे का इस्तेमाल

UBA ने बताया कि इस पैसे का इस्तेमाल 2014 में स्टैलियन मोटर्स को मिले एक फेडरल सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के लिए किया गया था। इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत स्टैलियन मोटर्स को 700 अशोक लीलैंड ट्रक, सैनिकों को ले जाने वाले वाहन और 50 बसें सप्लाई करनी थीं। बैंक का आरोप है कि स्टैलियन मोटर्स ने इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत मिली पहली 50 मिलियन डॉलर की रकम को दुबई के एक खाते में भेज दिया और बाकी फंड भी विदेश ट्रांसफर कर दिया।

वहीं दिसंबर 2023 में, स्टैलियन नाइजीरिया ने बैंक के दावों को पूरी तरह से झूठा बताते हुए खारिज कर दिया। उस समय एक बयान में, कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ताजुदीन ओलालरे ने कहा, "स्टैलियन नाइजीरिया लिमिटेड पर UBA का 156 बिलियन नाइरा (N156 Billion) का कोई बकाया नहीं है।"

स्टैलियन ग्रुप का इतिहास

भारत के जयपुर में जन्मे सुनील वासवानी 'स्टैलियन ग्रुप' के चेयरमैन हैं। इस ग्रुप की शुरुआत 1969 में हुई थी और आज यह 18 देशों में काम करता है। उनके भाई महेश इसके मैनेजिंग डायरेक्टर हैं। यह परिवार दुबई से अपना कारोबार चलाता है।

नाइजीरिया में, स्टैलियन ग्रुप होंडा, हुंडई, निसान, वोक्सवैगन, ऑडी, स्कोडा और पोर्श जैसी गाड़ियों का डिस्ट्रीब्यूशन करता है। यहाँ कारों और ट्रकों की असेंबलिंग भी की जाती है। 2014 में, नाइजीरिया में बनी पहली 'निसान पेट्रोल' गाड़ी इसी ग्रुप ने पेश की थी।

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