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'4 लाख करोड़ की Infosys बनाई, देश को UPI दिया'; वो अरबपति जिसे अब PM मोदी ने दिया परीक्षा सुधार का जिम्मा

Published: Sun, 26 Jul 2026 08:14 PM (IST)

मोदी सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए एक उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है, जिसकी अध्यक्षता इंफोसिस ...और पढ़ें

नंदन नीलेकणि परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के अध्यक्ष बने।

नंदन नीलेकणि परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के अध्यक्ष बने।

HighLights

  1. नंदन नीलेकणि परीक्षा सुधार टास्क फोर्स के अध्यक्ष बने।

  2. टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली को विश्वसनीय और पारदर्शी बनाएगी।

  3. नीलेकणि इंफोसिस के सह-संस्थापक और आधार के जनक हैं।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार की मोदी सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। यह फैसला शिक्षा सुधार के लिए बनाई टास्क फोर्स को लेकर है। खास बात यह है कि इस टास्क फोर्स का अध्यक्ष उस अरबपति को बनाया गया है जिसने 422353 करोड़ की Infosys जैसी भारत की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी बनाई है। उस व्यक्ति का नाम है नंदन नीलेकणि (Nandan Nilekani)। इन्हीं को मोदी सरकार ने परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए बनाई गई टास्क फोर्स का अध्यक्ष बना बनाया है।

इसकी घोषणा खुद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को की। यह टास्क फोर्स भारत की परीक्षा प्रणाली को अधिक भरोसेमंद, पारदर्शी और टेक्नोलॉजी-आधारित बनाने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगी।

PM मोदी ने Video में दी जानकारी

प्रधानमंत्री ने वीडियो जारी कर कहा- "हमें भविष्य पर ध्यान देना होगा। हमारी परीक्षा प्रणाली भरोसेमंद और पारदर्शी होनी चाहिए, और इसमें टेक्नोलॉजी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल किया जाना चाहिए। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए, हमने दुनिया के जाने-माने टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट नंदन नीलेकणि की अगुवाई में एक हाई-पावर्ड टास्क फोर्स बनाने का फ़ैसला किया है। यह टास्क फोर्स परीक्षा में सुधारों पर ध्यान देगी और इसकी रिपोर्ट के आधार पर, जल्द से जल्द आने वाली परीक्षाओं की विश्वसनीयता पक्की करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।"

नीलेकणि के अलावा, टास्क फोर्स के सदस्यों में विभिन्न धाराओं के डोमेन विशेषज्ञ शामिल हैं। वे देश की परीक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने में मदद करेंगे, विशेष रूप से प्रौद्योगिकी के दृष्टिकोण से और संरचनात्मक सुधारों के लिए।

अन्य सदस्यों में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व चेयरमैन एस. सोमनाथ, इंटेलिजेंस ब्यूरो के पूर्व डायरेक्टर तपन डेका, IIT चेन्नई के डायरेक्टर वी. कामाकोटी, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता कवल और लॉजिस्टिक्स एक्सपर्ट अमृत लाल मीणा शामिल हैं।

नंदन नीलेकणि ने बनाई थी Infosys

नंदन नीलेकणि टेक कंपनी इंफोसिस के को-फाउंडर हैं और 2017 से इसके नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन हैं। उन्होंने 2009 में इंफोसिस छोड़ दी थी, उन्हें 2017 में कंपनी के बोर्डरूम में बड़े बदलाव और CEO के अचानक इस्तीफे के बाद वापस लाया गया था।

भारत के मशहूर अरबपतियों की लिस्ट में शुमार नंदन नीलेकणि की नेटवर्थ 2.4 बिलियन डॉलर यानी लगभग 23 हजार करोड़ रुपये (Nandan Nilekani Net Worth) है।

'यूनिक आइडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ इंडिया' के चेयरमैन के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान भारत की विशाल पहचान पत्र योजना 'आधार' को बनाने का श्रेय नीलेकणि को जाता है। 2023 में, उन्होंने रिसर्च और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए अपने पुराने संस्थान, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (IIT) बॉम्बे को 38 मिलियन डॉलर दान किए थे।

नंदन नीलेकणि UPI के भी कहे जाते हैं जनक

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) को बनाने में नंदन नीलेकणि ने एक दूरदर्शी और मार्गदर्शक की अहम भूमिका निभाई, हालांकि इसे आधिकारिक तौर पर 2016 में नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ़ इंडिया (NPCI) ने बनाया और लॉन्च किया था। इन्हें UPI का भी जनक कहा जाता है।

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