नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। शुक्रवार को वित्त वर्ष 2019-20 के जीडीपी आंकड़ों ने जो तस्वीर पेश की वह कई लिहाज से भयावह है। जीडीपी की ग्रोथ रेट पिछले 11 वर्षों की न्यूनतम स्तर पर ऐसे ही नहीं पहुंच गई है। देश की इकोनॉमी के आधार स्तंभ माने जाने वाले अधिकांश सेक्टर की हालात नासाज है। ऐसे 18 सेक्टर में से 13 सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई है। ये आंकड़े यह भी बताते हैं कि देश में संपत्ति निर्माण में निवेश होने की रफ्तार सुस्त पड़ गई है यानी कि निकट भविष्य में आर्थिक विकास दर को तेज करने के लिए केंद्र को भागीरथी कोशिश करनी होगी। 

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केंद्रीय सांख्यिकी व कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय की तरफ से जारी डाटा के मुताबिक जनवरी-मार्च 2020 यानी पिछले वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में कोयला, खनन, बिजली, धातु खनिज को छोड़ दिया जाए तो अन्य सभी औद्योगिक व कारोबारी गतिविधियों की रफ्तार शून्य या इससे नीचे है। मसलन, कच्चे तेल के उत्पादन में 5.7 फीसद की गिरावट, सीमेंट उत्पादन में 4.9 फीसद की गिरावट, स्टील में 3.9 फीसद की गिरावट हुई है।  

वाणिज्यिक वाहनों के उत्पादन में 42.1 फीसद की, हवाई अड्डों में कार्गो हैंडलिंग में 13.6 फीसद, हवाई पैसेंजर की संख्या में 9.5 फीसद, रेलवे ढुलाई में 6.7 फीसद, रेलवे पैसेंजर में 14.2 फीसद की कमी हुई है। बैंक जमा में 53 फीसद की तो कर्ज आवंटन में 20 फीसद की गिरावट हुई है।

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एलआइसी प्रीमियम (नान-लिंक्ड) में 11.6 फीसद व लिंक्ड प्रीमियम में 19.3 फीसद की गिरावट हुई है। यह गिरावट वर्ष 2018-19 की अंतिम तिमाही के मुकाबले हुई है। अगर जनवरी-मार्च, 2019 की बात करें तो कच्चे तेल उत्पादन, कार्गो हैंडलिंग (एयरपोर्ट), बैंक कर्ज आवंटन व एलआइसी प्रीमियम (लिंक्ड) में ही गिरावट है। यानी एक वर्ष के भीतर स्थिति पूरी तरह से उलट गई है।

Posted By: Ankit Kumar

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