मुंबई। ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने अगले वित्त वर्ष 2014-15 में देश की आर्थिक विकास दर 5.5 फीसद रहने का अनुमान जताया है। एजेंसी का कहना है कि आगामी आम चुनाव के कारण सुधारों में होने वाली देरी से विकास दर में सुस्ती बनी रहेगी।

मूडीज ने कहा कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने के लिए जरूरी सुधारों में चुनाव के चलते देरी होगी। इससे अगले वित्त वर्ष में वृद्धि दर 5.5 फीसद पर सीमित रहेगी। चालू वित्त वर्ष 2013-14 में सरकार ने विकास दर 4.9 फीसद रहने का अनुमान जताया है। पिछले वित्त वर्ष में विकास दर 4.5 फीसद रही थी। एजेंसी ने कहा कि ब्याज दरें ऊंची बनी रहेंगी। रुपये की कीमत में उतार-चढ़ाव बरकरार रहेगा। इससे आयातकों और निर्यातकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा।

घरेलू रेटिंग एजेंसी इकरा के साथ मिलकर तैयार की गई रिपोर्ट में मूडीज ने कहा कि आर्थिक सुस्ती, विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव और सुधारों में देरी से कई सेक्टरों की संभावनाएं प्रभावित होंगी। रीयल एस्टेट, सीमेंट, ऑटोमोबाल्स, स्टील, धातु, खनन और रिटेल क्षेत्रों को एजेंसी ने निगेटिव आउटलुक वाले सेक्टरों में रखा है। वहीं उत्खनन, आइटी और फार्मा क्षेत्रों को बेहतर आउटलुक दिया गया है।

कारोबारी माहौल में दिखा सुधार

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही तक गिरावट के बाद निर्यात में खासी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा कृषि उत्पादन में वृद्धि से अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में महंगाई दर में भी नरमी आई है। थिंक टैंक एनसीएईआर का कहना है कि आर्थिक संकेतकों में हुए इस बदलाव से देश में कारोबारी माहौल में सुधार हुआ है।

नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर) के मुताबिक जनवरी में कारोबारी विश्वास सूचकांक 21.8 फीसद बढ़कर 122.3 अंक पर पहुंच गया है। पिछले साल जुलाई-सितंबर अवधि में यह सूचकांक 100.4 अंक पर था। रिपोर्ट में कहा गया कि पिछले साल ऊंची महंगाई दर के कारण कारोबारी विश्वास काफी निचले स्तर पर पहुंच गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में कारोबारी विश्वास सेवा क्षेत्र के मुकाबले ज्याद मजबूत है। बिक्री, उत्पादन, आयात, निर्यात और मुनाफे संबंधी उम्मीदों से जुड़े कंपनी स्तर के संकेतकों में भी मजबूती आई है। आने वाले दिनों में सभी क्षेत्रों में वेतन और मजदूरों की मांग में भी वृद्धि की उम्मीद है।

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