किसने बनाई देश की सबसे लंबी जल सुरंग? बिना बिजली के 1450 गांवों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी; 17 साल करनी पड़ी कड़ी मशक्कत
मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में भारत की सबसे लंबी 11.95 किमी भूमिगत जल सुरंग पूरी हुई है। ...और पढ़ें

किसने बनाई भारत की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग?
HighLights
11.95 किमी लंबी भूमिगत जल सुरंग तैयार
नर्मदा का पानी गुरुत्वाकर्षण से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा
लाखों किसानों को सिंचाई और जल सुरक्षा का लाभ मिलेगा
नई दिल्ली। भारत में लंबी सुरंगें और ऊंचे पुल सिर्फ कनेक्टिविटी के जरिए नहीं हैं, ये देश की इंजीनियरिंग और मजबूत संकल्प की पहचान बन गए हैं। पहाड़ों को चीरती सुरंगें और गहरी घाटियों पर बने पुल दुर्गम इलाकों को देश की मुख्यधारा से जोड़ते हैं, जिससे यात्रा का समय घटता है, व्यापार बढ़ता है और दूर-दराज के गांवों तक विकास पहुंचता है। ऐसी ही एक खास सुरंग मध्य प्रदेश में तैयार हुई है। आइए जानते हैं इसके बारे में।
देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग
हाल ही में मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे लंबी भूमिगत जल सुरंग (Longest Underground Water Tunnel in India) तैयार हो गई। लगभग 11.95 किलोमीटर लंबी यह सुरंग न सिर्फ भारतीय इंजीनियरिंग का बड़ा उदाहरण है, बल्कि विंध्य क्षेत्र के लाखों लोगों और किसानों के लिए उम्मीद की नई किरण भी है।
करीब 17 वर्षों की मेहनत और लगभग 1,610 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुई इस परियोजना के जरिए पहली बार नर्मदा का पानी बिना किसी पंप या बिजली की मदद के गुरुत्वाकर्षण (ग्रैविटी फ्लो) से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचेगा।
कई चुनौतियां आईं सामने
यह सुरंग मध्य प्रदेश के कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में विंध्य पर्वतमाला को काटकर बनाई गई है। यह बरगी डायवर्जन परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नर्मदा नदी के अतिरिक्त जल को उन इलाकों तक पहुंचाना है, जहां वर्षों से सिंचाई और जल संकट बना हुआ था। कठिन भूगर्भीय परिस्थितियों और कठोर चट्टानों के कारण इस परियोजना को पूरा करना आसान नहीं था।
शुरुआती दौर में इस्तेमाल की गई मशीनें कई जगह असफल रहीं, जिसके बाद आधुनिक तकनीक और विशेष इंजीनियरिंग उपायों की मदद से काम पूरा किया गया।
किसने बनाई है ये सुरंग?
इस परियोजना पर करीब 1,610 करोड़ रुपये खर्च हुए और इसे पूरा होने में लगभग 17 वर्ष लगे। निर्माण कार्य नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण (NVDA) की निगरानी में किया गया। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में किसी एक निजी निर्माण कंपनी का स्पष्ट उल्लेख नहीं है, हालांकि परियोजना में अत्याधुनिक सुरंग निर्माण तकनीकों और विदेशी तकनीकी सहयोग का उपयोग किया गया।
यह सुरंग लगभग 10.14 मीटर व्यास की है और इसे देश की सबसे लंबी अंडरग्राउंड ग्रैविटी फ्लो जल सुरंग माना जा रहा है।
कृषि भूमि के लिए फायदेमंद
इस जल सुरंग का सबसे बड़ा लाभ विंध्य क्षेत्र के किसानों को मिलेगा। इसके माध्यम से नर्मदा का पानी बिना बिजली खर्च किए लगभग 1,450 गांवों तक पहुंचेगा। इससे करीब 2.45 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई का लाभ मिलने की उम्मीद है। जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना जैसे जिलों में खेती की तस्वीर बदल सकती है। पानी की उपलब्धता बढ़ने से फसल उत्पादन में वृद्धि होगी, भूजल पर निर्भरता कम होगी और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
जल सुरक्षा के नजरिए से बहुत अहम
देश की सबसे लंबी जल सुरंग केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि जल प्रबंधन और संसाधनों के बेहतर उपयोग का उदाहरण है। यह दिखाती है कि आधुनिक इंजीनियरिंग और दीर्घकालिक योजना के जरिए प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग कैसे किया जा सकता है।
आने वाले वर्षों में यह परियोजना मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र की कृषि, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा को नई दिशा दे सकती है। साथ ही, यह देश में भविष्य की जल अवसंरचना परियोजनाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण मॉडल साबित हो सकती है।
