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₹80 उधार लेकर शुरू किया बिजनेस, आज 25 देशों में है पहचान; 7 महिलाओं ने खड़ा किया करोड़ों का व्यापार

Published: Tue, 20 Oct 2026 02:38 PM (IST)

Lijjat Papad success story: लिज्जत पापड़ की शुरुआत 1959 में सात महिलाओं ने 80 रुपये के कर्ज से की थी, ...और पढ़ें

कैसे बना करोड़ों का व्यापार

कैसे बना करोड़ों का व्यापार

HighLights

  1. सात महिलाओं ने 80 रुपये से लिज्जत पापड़ शुरू किया।

  2. आज 1600 करोड़ का वैश्विक ब्रांड, 25 देशों में मौजूद।

  3. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने वाला अनूठा सहकारी मॉडल।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: घर की छत पर पापड़ बेलने से शुरू हुआ एक छोटा-सा काम कैसे हजारों करोड़ रुपये के कारोबार और हजारों महिलाओं की आर्थिक ताकत की मिसाल बन गया। हम बात कर रहे हैं लिज्जत पापड़ (Lijjat papad) की, जिसकी शुरुआत सात महिलाओं ने महज 80 रुपये उधार लेकर की थी। न कोई बड़ा निवेशक था, न आलीशान फैक्ट्री और न ही किसी बड़ी कंपनी का सहारा। उनके पास था तो सिर्फ मेहनत करने का जज्बा और अपने बनाए पापड़ की गुणवत्ता पर भरोसा। करीब छह दशक से ज्यादा समय में यही छोटा-सा प्रयास देश के सबसे पहचाने जाने वाले पापड़ ब्रांडों में शामिल हो गया।

80 रुपये का कर्ज और सात महिलाओं का बड़ा सपना

लिज्जत पापड़ (Lijjat papad success story) की शुरुआत 15 मार्च 1959 को मुंबई के गिरगांव इलाके में हुई थी। जसवंतीबेन जमनादास पोपट के साथ पार्वतीबेन रामदास थोदानी, उजम्बेन नारानदास कुंडलिया, बानूबेन एन. तन्ना, लागूबेन अमृतलाल गोकानी, जयाबेन वी. विठलानी और दिवालीबेन लुक्का ने मिलकर यह काम शुरू किया।

इन महिलाओं का मकसद शुरुआत में घर के कामकाज के साथ कुछ अतिरिक्त कमाई करना था। इसके लिए उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता छगनलाल करमसी पारेख से 80 रुपये उधार लिए। इसी रकम से पापड़ बनाने के लिए जरूरी सामान खरीदा गया और घर की छत पर काम शुरू हुआ।

शुरुआत में उन्होंने सिर्फ चार पैकेट पापड़ बनाए और स्थानीय बाजार में बेच दिए। लेकिन स्वाद और गुणवत्ता के कारण धीरे-धीरे उनके पापड़ों की मांग बढ़ने लगी। स्थानीय दुकानदारों से थोक ऑर्डर मिलने लगे और घर से शुरू हुआ काम एक संगठित कारोबार में बदलने लगा।

नौकरी देने के बजाय महिलाओं को बनाया कारोबार का हिस्सेदार

लिज्जत की सफलता का सबसे खास पहलू उसका बिजनेस मॉडल रहा। छगनलाल करमसी पारेख के मार्गदर्शन में महिलाओं ने कारोबार को सिर्फ कर्मचारियों की मदद से बढ़ाने के बजाय ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को इससे जोड़ने का रास्ता चुना।

इस तरह श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ की सहकारी व्यवस्था विकसित हुई। इसमें जुड़ने वाली महिलाएं केवल काम करने वाली कर्मचारी नहीं, बल्कि कारोबार की सदस्य और हिस्सेदार होती हैं। उन्हें उनके काम के हिसाब से भुगतान मिलता है और सहकारी व्यवस्था में मुनाफे में हिस्सेदारी का भी प्रावधान है।

इस मॉडल ने उन महिलाओं को कमाई का अवसर दिया, जो घरेलू जिम्मेदारियों के कारण नियमित नौकरी नहीं कर पाती थीं। कारोबार बढ़ने के साथ यह महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का बड़ा माध्यम बन गया।

बिना बड़ी फैक्ट्री के देशभर में फैलाया कारोबार

लिज्जत का उत्पादन मॉडल भी इसे दूसरी कंपनियों से अलग बनाता है। इसकी शाखाओं में पापड़ के लिए आटा तैयार किया जाता है, जिसे सदस्य महिलाएं घर ले जाकर पापड़ बेलती हैं। इसके बाद तैयार पापड़ शाखाओं में वापस जमा किए जाते हैं, जहां उनकी गुणवत्ता की जांच होती है।

इस व्यवस्था से कंपनी को बड़े कारखानों पर भारी निवेश किए बिना उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली। साथ ही, महिलाओं को घर के आसपास रहकर काम करने का अवसर मिला। गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पापड़ों के आकार, मोटाई और सूखने जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है।

धीरे-धीरे लिज्जत ने अपने नेटवर्क का विस्तार किया। पापड़ के अलावा मसाले, आटा, सेवइयां और SASA ब्रांड के तहत डिटर्जेंट जैसे उत्पाद भी इसके कारोबार का हिस्सा बने। हालांकि, पापड़ आज भी इसकी सबसे प्रमुख पहचान हैं।

25 से ज्यादा देशों तक पहुंचा भारतीय ब्रांड

लिज्जत पापड़ की पहुंच अब भारत तक सीमित नहीं है। इसकी मौजूदगी अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली समेत कई विदेशी बाजारों में है। विदेशों में रहने वाले भारतीयों के बीच भी इस ब्रांड के उत्पादों की मांग रही है। इसकी सफलता का आधार रहा है एक पहचाना हुआ स्वाद, लगातार गुणवत्ता बनाए रखना और किराना दुकानों के जरिए ग्राहकों तक पहुंचना।

रिपोर्ट के मुताबिक, लिज्जत की देशभर में करीब 82 यूनिट हैं और 45 हजार से ज्यादा महिलाएं इससे जुड़ी हैं। रिपोर्ट में कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब 1,600 करोड़ रुपये बताया गया है।

जसवंतीबेन पोपट को मिला पद्मश्री सम्मान

लिज्जत की संस्थापक सदस्यों में शामिल जसवंतीबेन जमनादास पोपट का योगदान इस सफर में खास रहा। उन्होंने दूसरी महिलाओं को साथ जोड़कर कारोबार शुरू करने और उसे आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। साल 2021 में उन्हें व्यापार और उद्योग के क्षेत्र में योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया।

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