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15 सितंबर का इतिहास: जब दुनिया में आई मंदी, आज ही के दिन लेहमन ब्रदर्स ने मानी थी 'हार'; जानिए पूरी कहानी

Published: Tue, 15 Sep 2026 10:22 AM (IST)

15 सितंबर 2008 को लेहमन ब्रदर्स का दिवालिया होना अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी कॉर्पोरेट दिवालियापन घटना थी, जिसने वैश्विक ...और पढ़ें

15 सितंबर 2008 का इतिहास (AI फोटो)

15 सितंबर 2008 का इतिहास (AI फोटो)

HighLights

  1. 15 सितंबर 2008 को लेहमन ब्रदर्स ने दिवालियापन के लिए आवेदन किया

  2. यह घटना 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट का मुख्य कारण बनी

  3. अत्यधिक जोखिम और कमजोर प्रबंधन ने वित्तीय प्रणाली को हिला दिया

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। 15 सितंबर 2008 की तारीख दुनिया के आर्थिक इतिहास में सबसे भयावह तारीखों में गिनी जाती है। इसी दिन अमेरिका की दिग्गज इन्वेस्टमेंट बैंकिंग कंपनी लेहमन ब्रदर्स (Lehman Brothers) ने अमेरिकी कानून के तहत Chapter 11 bankruptcy protection के लिए आवेदन किया।
करीब 639 अरब डॉलर की संपत्ति और 613 अरब डॉलर के कर्ज के साथ यह उस समय अमेरिकी इतिहास का सबसे बड़ा कॉरपोरेट दिवालियापन था। लेकिन लेहमन ब्रदर्स का पतन अचानक नहीं हुआ था। इसके पीछे वर्षों से बन रहा एक ऐसा वित्तीय बुलबुला था, जिसमें सस्ता कर्ज, यूएस हाउसिंग मार्केट, जोखिम भरे मॉर्गेज लोन, जटिल वित्तीय उत्पाद और बैंकों का भारी कर्ज शामिल था।
लेहमन ब्रदर्स का डूबना उस बुलबुले के फटने का सबसे बड़ा प्रतीक बना और पूरी दुनिया को ऐसी आर्थिक मंदी में धकेल गया, जिसका असर वर्षों तक रहा।

शुरुआत कहां से हुई?

लेहमन ब्रदर्स की जड़ें 19वीं सदी तक जाती थीं और 2000 के दशक तक यह अमेरिका की सबसे बड़ी वॉल स्ट्रीट कंपनियों में शामिल हो चुकी थी। कंपनी ने मॉर्गेज और रियल एस्टेट से जुड़े कारोबार में बड़े पैमाने पर निवेश किया।
उस दौर में अमेरिका में घरों की कीमतें लगातार बढ़ रही थीं और बैंकों व वित्तीय संस्थानों को भरोसा था कि ये कीमतें आगे भी बढ़ती रहेंगी।
लोगों को बड़े पैमाने पर होम लोन दिए गए, जिनमें ऐसे कर्जदार भी शामिल थे जिनकी कर्ज चुकाने की क्षमता कमजोर थी। इन मॉर्गेज को अलग-अलग वित्तीय उत्पादों में पैक करके दुनिया भर के निवेशकों को बेचा गया। जब तक घरों की कीमतें बढ़ती रहीं, पूरी व्यवस्था फायदे में दिखती रही।
लेकिन 2006-07 के आसपास अमेरिकी हाउसिंग मार्केट कमजोर होने लगा और घरों की कीमतें गिरने लगीं। इसके साथ ही लोन डिफॉल्ट बढ़ने लगे और मॉर्गेज-बैक्ड सिक्योरिटीज की कीमत तेजी से गिरने लगी।

लेहमन ब्रदर्स की कमजोरी

लेहमन की समस्या केवल खराब मॉर्गेज में निवेश तक सीमित नहीं थी। कंपनी ने बहुत ज्यादा लेवरेज यानी उधार लेकर कारोबार किया था और उसकी बड़ी मात्रा में ऐसी संपत्तियाँ थीं जिन्हें संकट के समय आसानी से बेचना मुश्किल था। साथ ही कंपनी अपने रोजमर्रा के कारोबार के लिए शॉर्ट टर्म फंडिंग पर काफी निर्भर थी।
जैसे-जैसे बाजार में लेहमन की वित्तीय हालत को लेकर भरोसा कम हुआ, लेंडर्स और प्रतिपक्षों ने उससे ज्यादा कोलेटरल और मार्जिन मांगना शुरू कर दिया। कंपनी ने अपनी बैलेंस शीट को बेहतर दिखाने के लिए रेपो 105 जैसे अकाउंटिंग ट्रांजैक्शंस का भी इस्तेमाल किया, जिनसे रिपोर्टिंग डेट्स पर अस्थायी तौर पर कर्ज कम दिखाई देता था।
बाद की जांच में इन तरीकों पर गंभीर सवाल उठे। मार्च 2008 में Bear Stearns के संकट और फिर उसके बचाव ने भी बाजार को संकेत दे दिया था कि अमेरिकी फाइनेंशियल सिस्टम्स गहरे संकट में है।

बचाव की आखिरी कोशिश

2008 की गर्मियों तक लेहमन को बचाने के प्रयास तेज हो गए। कंपनी ने पूंजी जुटाने, संपत्तियां बेचने और संभावित खरीदार तलाशने की कोशिश की। जून 2008 में उसने करीब 6 अरब डॉलर की नई पूंजी भी जुटाई, लेकिन इससे संकट खत्म नहीं हुआ।
सितंबर की शुरुआत में संभावित निवेशक कोरियन डेवलपमेंट बैंक पीछे हट गया और बाजार का भरोसा और टूट गया। 12 से 14 सितंबर तक यूएस ट्रेजरी विभाग, फेडरल रिजर्व और एसईसी ने वॉल स्ट्रीट की बड़ी कंपनियों के प्रमुखों को न्यूयॉर्क फेड में बुलाकर लेहमन को बचाने का समाधान खोजने की कोशिश की।
Barclays और Bank of America जैसे संभावित खरीदारों के नाम सामने आए, लेकिन लेहमन की समस्याग्रस्त संपत्तियों को लेकर कोई ऐसा सौदा नहीं बन पाया जिसे सभी पक्ष स्वीकार कर सकें। अमेरिकी सरकार ने भी लेहमन के लिए सीधे बेलआउट की गारंटी देने से इनकार कर दिया।

फिर आया 15 सितंबर का दिन

आखिरकार 15 सितंबर की सुबह लेहमैन ब्रदर्स होल्डिंग्स इंक ने Chapter 11 के तहत bankruptcy protection के लिए आवेदन कर दिया। यह केवल एक कंपनी का दिवालियापन नहीं था, बल्कि इसने पूरी वित्तीय व्यवस्था के भीतर मौजूद आपसी निर्भरता और जोखिम को उजागर कर दिया।
लेहमन के साथ दुनिया भर के बैंकों, निवेशकों और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस के कारोबार जुड़े हुए थे। उसके फेल होने के बाद बाजार में यह डर फैल गया कि अगला बड़ा वित्तीय संस्थान कौन होगा? अगले ही दिन American International Group यानी AIG को बचाने के लिए अमेरिकी सरकार और Federal Reserve को हस्तक्षेप करना पड़ा।
मनी-मार्केट्स फंड पर भी दबाव बढ़ा और क्रेडिट मार्केट्स में भरोसा बुरी तरह टूट गया। फेड के अनुसार लेहमन के दिवालिया ने वैश्विक वित्तीय सिस्टम में ऐसी घबराहट पैदा की, जिसका पैमाना पहले कल्पना से भी बाहर था।

दुनिया को मिली चेतावनी

लेहमन के पतन का सबसे बड़ा नतीजा था 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट और उसके बाद आई महामंदी। बैंकों ने एक-दूसरे को कर्ज देना कम कर दिया, कंपनियों के लिए फाइनेंसिंग मुश्किल हुई, शेयर बाजार टूटे, बेरोजगारी बढ़ी और दुनिया की अर्थव्यवस्थाएं मंदी में चली गईं।
अमेरिका में सरकार और यूएस फेड को वित्तीय व्यवस्था को स्थिर करने के लिए कई कदम उठाने पड़े। लेहमन की दिवालियापन की कार्यवाही वर्षों तक चली और इसकी संपत्तियों को धीरे-धीरे बेचा गया। इस पूरे घटनाक्रम से यह सवाल भी उठा कि इतने बड़े संस्थान को इस स्तर तक जोखिम लेने की अनुमति कैसे मिली?
बाद की जांचों ने रेगुलेटरी विफलताएं, अत्यधिक लीवरेज, जोखिम भरी ट्रेडिंग, अल्पकालिक फंडिंग और कमजोर रिस्क मैनेजमेंट को संकट के कारणों में गिना गया। यह इस बात की ऐतिहासिक चेतावनी थी कि जब वित्तीय संस्थाएं अत्यधिक जोखिम, कर्ज और जटिल वित्तीय उत्पादों पर निर्भर हो जाती हैं, तो एक संस्था का संकट पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को अपनी चपेट में ले सकता है।

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