बंद होने जा रही "लाड़ली बहना योजना?" सीएम मोहन यादव ने बताया खजाने पर आर्थिक बोझ! क्यों चर्चा में आ गई स्कीम?
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने लाड़ली बहना योजना को राज्य के खजाने पर भारी आर्थिक बोझ बताया है, जिससे इसके भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

CM मोहन यादव के बयान से चर्चा में आई लाड़ली बहना योजना
HighLights
सीएम मोहन यादव ने योजना को खर्चीला और बोझ बताया।
लाड़ली बहना योजना पर सालाना ₹22,680 करोड़ खर्च।
सरकार ने योजना बंद होने की खबरों का खंडन किया।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| मध्य प्रदेश में महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए "लाड़ली बहना योजना" चलाई जाती है। इस स्कीम के तहत हर महीने महिलाओं को ₹1500 DBT के माध्यम से भेजे जाते हैं। अब तक इसकी 40 किस्तें भी जारी की जा चुकी हैं। राज्य में इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में करीब 1 करोड़ 25 लाख से अधिक पात्र महिलाएं इस योजना की लाभार्थी हैं।
"लाड़ली बहना योजना" मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरु की थी, जिसमें हर माह ₹1000 दिए जाते थे, बाद में इसकी रकम बढ़ाकर ₹1500 कर दिया गया। अब ये योजना चर्चा में है, और इसकी वजह एमपी के सीएम डॉ मोहन यादव का एक बयान है।
बंद होगी लाड़ली बहना योजना?
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस स्कीम को बहुत खर्चीला और राज्य के खजाने पर बड़ा बोझ बताया है। दरअसल भोपाल के रवींद्र भवन में आयोजित 'बुंदेली समागम' के दौरान बुंदेली इन्फ्लुएंसर और कंटेंट क्रिएटर बिन्नू रानी के साथ अनौपचारिक बातचीत में उन्होंने कहा कि उन्होंने कहा कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि इससे राज्य के खजाने पर इतना भारी आर्थिक बोझ पड़ेगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक छतरपुर की रहने वाली बिन्नू रानी ने मुख्यमंत्री से पूछा कि अपनी "जिज्जियों" (बहनों) को आर्थिक मदद देने के बाद सरकार "बिन्नों" (बेटियों) के लिए क्या करने की योजना बना रही है?
इस सवाल पर सीएम ने मजाकिया अंदाज में कहा, "आपको अंदाज़ा नहीं है कि लाड़ली बहना योजना कितनी खर्चीली साबित हुई है। मुझे जरा भी अंदाजा नहीं था कि मुख्यमंत्री बनने पर इतना भारी आर्थिक बोझ उठाना पड़ेगा।" सीएम मोहन यादव के इतना कहते ही पूरा हॉल ठहाकों से गूंज उठा।
हर महीने ₹1835 करोड़ का खर्च
1,500 रुपये की मौजूदा हर महीने की आर्थित सहायता के हिसाब से 'लाड़ली बहना योजना' पर मध्य प्रदेश सरकार को सालाना लगभग ₹22,680 करोड़ का खर्च आने का अनुमान है। यह स्कीम शुरू होने के समय सरकार को 1.31 करोड़ से अधिक आवेदन मिले थे। जिसके बाद जांच और आपत्तियों का रिव्यू किया गया और करीब 2.18 लाख से ज्यादा नामों की छंटनी हुई है। इस स्कीम के तहत मासिक खर्च लगभग ₹1,835 करोड़ है। हाल ही में 13 सितंबर को जारी हुई 40वीं किस्त में ₹1,835 करोड़ से अधिक की राशि बांटी गई थी।
स्कीम बंद होने की घोषणा नहीं
सीएम मोहन यादव ने मजाकिया लहजे में लाड़ली बहना योजना को खर्चीला बताया है। उन्होंने इस स्कीम को राज्य के खजाने पर बड़ा बोझ भी माना है लेकिन इसे बंद करने की कोई बात नहीं कही है। मध्य प्रदेश सरकार की ओर से हर महीने पात्र महिलाओं के खाते में पैसे भेजे जाते हैं, अब तक 40 किस्तें भी जारी की जा चुकी हैं और 41वीं किस्त भेजने की तैयारी है।
इस स्कीम को लेकर पहले भी बंद करने की चर्चाएं उठती रही हैं, लेकिन एमपी सरकार और खुद मुख्यमंत्री मोहन यादव की ओर से उन चर्चाओं का खंडन किया जा चुका है। सरकार का मानना है कि इस योजना का लाभ उठाकर महिलाएं आर्थिक रूप से सशक्त हुई हैं।
