40 की उम्र में हुए फेल तो बन गए LIC एजेंट, रिटायरमेंट के बाद की नई शुरुआत; आज देश के सबसे उम्रदराज अरबपति
भारत के सबसे बुजुर्ग अरबपति लक्ष्मण दास मित्तल की कहानी प्रेरणादायक है। 40 की उम्र में व्यवसाय में असफल होने ...और पढ़ें

40 की उम्र में हुए फेल तो बन गए LIC एजेंट, रिटायरमेंट के बाद की नई शुरुआत; आज देश के सबसे उम्रदराज अरबपति
HighLights
लक्ष्मण दास मित्तल ने 65 साल की उम्र में सोनालिका ट्रैक्टर्स शुरू की।
93 साल की उम्र में भारत के सबसे बुजुर्ग अरबपति बने।
सोनालिका ट्रैक्टर्स का कारोबार 120 से ज्यादा देशों में।
नई दिल्ली। उम्र महज के नंबर होती है। आप किसी भी उम्र में कुछ भी हासिल कर सकते हैं। अगर आपके अंदर जुनून है, कुछ कर गुजरने का, तो सफलता सच में आपके कदम चूमती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है भारत के सबसे बुजुर्ग अरबपतियों में शुमार सोनालिका ट्रैक्टर की शुरुआत करने वाले लक्ष्मण दास मित्तल ने।
ये वहीं लक्ष्मण दास मित्तल हैं, जो कभी LIC के एजेंट हुआ करते थे और 1990 में डिप्टी जोनल मैनेजर के पद से रिटायर हुए। जिस प्रकार एजेंट से जोनल मैनेजर बनने तक का सफर आसान नहीं था। उसी प्रकार लक्ष्मण दास मित्तल का रिटायरमेंट के बाद का सफर आसान नहीं था। उन्हें कुछ करना था। कुछ ऐसा जो देश के किसानों से जुड़ा हो। उनकी इस ललक ने जन्म दिया सोनालिका ट्रैक्टर को।
भारत के सबसे बुजुर्ग अरबपति
लक्ष्मण दास मित्तल ने 65 साल की उम्र में अपना बिजनेस शुरू किया और 93 साल की उम्र में भारत के सबसे बुजुर्ग अरबपति बन (Lachhman Das Mittal Country oldest billionaire) गए। मित्तल से पहले, महिंद्रा एंड महिंद्रा ग्रुप के पूर्व चेयरमैन केशव महिंद्रा सबसे बुजुर्ग भारतीय अरबपति थे, जिनका 12 अप्रैल, 2023 को निधन हो गया। वहीं, आज लक्ष्मण मित्तल 95 वर्ष के हैं।
40 की उम्र में हुए फेल, 65 में की नई शुरुआत
मिडिल-क्लास परिवारों की तरह, मित्तल ने भी अपनी सैलरी से कुछ पैसे बचाए और 40 साल की उम्र में उन्होंने खेती के सामान बेचने का एक साइड बिजनेस शुरू किया। 1970 में, मित्तल ने 20000 रुपये के शुरुआती इन्वेस्टमेंट से सोनालिका ग्रुप बनाकर अपना पहला बिजनेस शुरू किया।
उन्होंने पंजाब के होशियारपुर में लोकल लोहारों के साथ मिलकर गेहूं थ्रेशर बनाने का काम शुरू किया। हालांकि, इस काम में बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा और पैसे की तंगी भी हुई। 1971 तक, मित्तल दिवालिया हो गए। दिवालिया यानी उन्होंने बिजनेस में जो पैसा लगाया था वह डूब गया।
लक्ष्मण दास मित्तल का जन्म 1931 में पंजाब के होशियारपुर में हुआ था। वे LIC में इंश्योरेंस एजेंट के तौर पर काम करते थे। मित्तल के पास उर्दू में मास्टर डिग्री है और वे पंजाब यूनिवर्सिटी में अपनी क्लास में फर्स्ट आए थे। बाद में उन्होंने मारुति उद्योग में डीलरशिप के लिए अप्लाई किया लेकिन उन्हें रिजेक्ट कर दिया गया। लेकिन कहते हैं कि किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और उन्होंने LIC ज्वाइन किया और रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बिजनेस के क्षेत्र में कदम रखा।
बाद में 1996 में 65 साल की उम्र में, मित्तल ने एंटरप्रेन्योरशिप को दूसरा मौका देने के बारे में सोचा और सोनालिका ट्रैक्टर्स नाम की कंपनी शुरू की, जो ट्रैक्टर बनाती है। इस बार किस्मत और बिजनेस दोनों उनके साथ थे और कंपनी तेजी से बढ़ने लगी।
और बन गई देश की तीसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर कंपनी
इस बड़े कदम से कंपनी को एक टर्निंग पॉइंट मिला, क्योंकि कंपनी को अपनी अच्छी क्वालिटी की खेती की मशीनरी के लिए तेजी से पहचान मिली। 1996 तक, सोनालिका ने ट्रैक्टर बनाने के काम में भी हाथ आजमाया, और मार्केट शेयर के हिसाब से भारत की तीसरी सबसे बड़ी ट्रैक्टर बनाने वाली कंपनी बन गई। कंपनी की ग्रोथ को एक स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप से और बढ़ावा मिला, जिसमें जापानी कंपनी यानमार ने 30% हिस्सा खरीदा।
120 से ज्यादा देशों में तहलका मचा रहे सोनालिका के ट्रैक्टर
आज, सोनालिका ग्रुप दुनिया भर में काम करता है, जिसके पांच देशों में प्लांट और 120 से ज्यादा देशों में मार्केट हैं। ट्रैक्टर का यह नाम अपने आप में बहुत खास है।
आज 95 साल की उम्र में 50 हजार करोड़ रुपये के हैं मालिक
60 की उम्र में रिटायर होने वाले सोनालिका के फाउंडर लक्ष्मण दास मित्तल ने 65 की उम्र में एक नई शुरुआत की और सोनालिका का जन्म हुआ। आज वह 95 साल के हैं और देश के सबसे उम्रदराज अरबपति हैं। Forbes के अनुसार उनकी नेटवर्थ करीब 5.4 बिलियन डॉलर (लगभग 50 हजार करोड़ रुपये) है।
बेटे संभाल रहे हैं कारोबार
लक्ष्मण दास मित्तल की सफलता उनके परिवार से गहराई से जुड़ी हुई है। वह शादीशुदा हैं और उनके दो बेटे हैं, अमृत सागर मित्तल और दीपक मित्तल, जो अब सोनालिका ग्रुप के रोजाना के काम देखते हैं। इसके अलावा, उनके पोते रमन, सुशांत और राहुल भी बिजनेस में शामिल हो गए हैं, जिससे यह पक्का होता है कि मित्तल की एंटरप्रेन्योरशिप की विरासत आगे बढ़ती रहे। बागडोर सौंपने के बावजूद, मित्तल कंपनी में एक्टिव रूप से शामिल हैं और रोजाना ऑफिस जाते हैं।
