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याद है केश निखार साबुन? पाकिस्तान के इस शहर से एक लालाजी लाए दिल्ली, सिख राजा के पड़पोते ने सैनिकों के लिए था बनवाया

Published: Sat, 03 Oct 2026 06:00 AM (IST)

केश निखार साबुन का इतिहास 1935 में पेशावर से शुरू हुआ, जिसे लाला बिशन दास सभरवाल ने सैनिकों के लिए ...और पढ़ें

केश निखार साबुन का इतिहास (AI फोटो)

केश निखार साबुन का इतिहास (AI फोटो)

HighLights

  1. 1935 में पेशावर में लाला बिशन दास ने की शुरुआत

  2. सिख रेजिमेंट के सैनिकों के लिए विशेष रूप से बनाया गया

  3. बंटवारे के बाद दिल्ली में फिर से स्थापित हुआ ब्रांड

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। ऐसे बहुत से पुराने ब्रांड हैं, जिनकी आज भी अलग ही पहचान है। भले ही वे नए जमाने के ब्रांड्स की भीड़ में कहीं खो गए हैं, मगर जिन लोगों ने ऐसे पुराने ब्रांड्स को यूज किया है, उनका उनसे जुड़ाव आज तक है। ऐसा ही एक ब्रांड है केश निखर साबुन (Kesh Nikhar Soap History)।
इस साबुन का इतिहास बेहद दिलचस्प है, जिसकी शुरुआत सन 1935 में लाला बिशन दास सभरवाल ने अविभाजित भारत के पेशावर शहर में की थी, जो अब पाकिस्तान में है।

1933 में बनाई थी कंपनी

लाला बिशन दास ने सन 1933 में पेशावर शहर में पेशावर सोप एंड केमिकल्स लिमिटेड (PESCO) की शुरुआत की। बाद में लाला हरबंस लाल सभरवाल और लाला राम प्रकाश सभरवाल भी इसमें शामिल हो गए। हुआ ये कि सन 1935 में, पटियाला (पंजाब) के महाराजा नरिंदर सिंह के पड़पोते, महाराजा भूपिंदर सिंह ने PESCO के संस्थापक लाला बिशन दास सभरवाल को सिख रेजिमेंट के सैनिकों के लिए एक खास साबुन बनाने के लिए बुलाया।

ये सैनिक दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में ब्रिटिश शासन की ओर से युद्ध में हिस्सा ले रहे थे। तब खास तौर पर सैनिकों के इस्तेमाल के लिए 'केश निखार सोप' बनाया गया। PESCO ने बालों को धोने के लिए '2-मिनट हेयर वॉश सॉल्यूशन' भी तैयार किया।

लगाई साबुन फैक्ट्री

लाला बिशन दास ने केश निखार साबुन के लिए सन 1935 में ही एक फैक्ट्री लगाई। हर्बल और प्राकृतिक तत्वों (जैसे आंवला, रीठा, शिकाकाई) पर फोकस करते हुए 'केश निखर' साबुन बनाना शुरू किया। शुरू में ये सैनिकों के लिए ही उपलब्ध कराया गया। मगर 1940 के दशक तक आम जनता के लिए उपलब्ध करा दिया गया।

पेशावर शहर से नाता

लाला बिशन दास ने अपनी कंपनी को पेशावर में शुरू किया था, इसलिए उसका नाम भी 'पेशावर सोप्स एंड केमिकल्स' (Peshawar Soaps and Chemicals) रखा। उस दौरान भारत में स्वदेशी आंदोलन भी जोरों पर था। साथ ही देश में साबुन बनाने वाली फैक्ट्रियां न के बराबर थीं। इसलिए लाला बिशन दास का साबुन खूब पसंद किया गया।

बंटवारे से बर्बादी

1947 में जब भारत का विभाजन हुआ, तो कंपनी को एक बहुत बड़ा झटका लगा। विभाजन के दौरान कंपनी के दो-तिहाई (2/3) संसाधन और संपत्ति पाकिस्तान में ही छूट गए या बर्बाद हो गए। इसके बावजूद, सभरवाल परिवार भारत (दिल्ली) आ गया और उन्होंने नए सिरे से इस स्वदेशी ब्रांड को खड़ा किया।

केश निखार के डुप्लीकेट

'केश निखार' नाम इतना लोकप्रिय हो गया था कि कई अन्य कंपनियों ने इस नाम से मिलते-जुलते उत्पाद बाजार में उतार दिए। इसके अधिकार को लेकर असली केश निखार ब्रांड की एक दिल्ली की कंपनी के साथ 22 साल लंबी कानूनी लड़ाई चली।
आखिरकार, 25 दिसंबर 2002 को दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि 'केश निखार' ट्रेडमार्क पर विशेष रूप से पेशावर सोप्स एंड केमिकल्स का ही अधिकार है।

आज भी बिक रहा साबुन

90 से अधिक सालों का इतिहास रखने वाला यह ब्रांड आज भी बाजार में टिका हुआ है। आज 'पेशको प्रोडक्ट्स' (Pesco Products) के तहत आने वाला यह ब्रांड सिर्फ हेयर वॉश साबुन (Shampoo Bar) तक ही सीमित नहीं है, बल्कि आयुर्वेदिक तेल, शैम्पू, और स्किन केयर प्रोडक्ट्स की एक बड़ी रेंज भी पेश करता है और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर भी काफी लोकप्रिय है।

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