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डालमियानगर का दिलचस्प इतिहास: एक साधु की भविष्यवाणी से मशहूर उद्योगपति बनने वाले आरके डालमिया की कहानी; कैसे हुए बर्बाद?

Published: Wed, 30 Sep 2026 01:12 PM (GMT+05:30)

डालमियानगर, बिहार के रोहतास जिले में स्थित एक औद्योगिक शहर है, जिसे प्रसिद्ध उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया ने 1930 के दशक ...और पढ़ें

किसने बसाया था डालमियानगर?

किसने बसाया था डालमियानगर?

HighLights

  1. डालमियानगर की स्थापना 1930 के दशक में रामकृष्ण डालमिया ने की

  2. यह शहर बिहार के रोहतास जिले में सोन नदी किनारे स्थित है

  3. डालमिया आजादी के समय तीसरे सबसे बड़े उद्योगपति बने थे

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत में कई शहर विभिन्न उद्योगपतियों के नाम पर हैं। इनमें मोदीनगर(Modinagar History) , जमशेदपुर और डालमियानगर शामिल हैं। आज हम आपको यहां डालमियानगर की कहानी बताएंगे कि किसने इस शहर को बसाया और कैसे ये डेवलप हुआ।

इस उद्योगपति के नाम पर है शहर

डालमियानगर (Dalmianagar History) प्रसिद्ध उद्योगपति और डालमिया ग्रुप के फाउंडर रामकृष्ण डालमिया के नाम पर है और इसे उन्होंने ही 1930 के दशक में बसाया था। इसकी स्थापना 1930 के दशक (लगभग 1932-33) में उद्योगपति रामकृष्ण डालमिया ने बिहार के रोहतास जिले में सोन नदी के किनारे डेहरी-ऑन-सोन के पास की थी।

ये था पहला बिजनेस

डालमिया कलकत्ता से बिहार आए और पटना के बिहटा में साल 1932 में शुगर मिल स्थापित की। उन्होंने पहली कंपनी का नाम रखा साउथ बिहार शुगर मिल्स लिमिटेड। खास बात ये है कि उस समय वो देश की सबसे बड़ी चीनी मिला थी।

राजस्थान के चिड़ावा में साधारण परिवार में जन्मे डालमिया ने यहीं से एक विशाल औद्योगिक समूह खड़ा करने की नींव रखी, जो पहले कमोडिटीज के छोटे-मोटे व्यापारी हुआ करते थे।

भाई-दामाद का मिला साथ

आरके डालमिया के साथ उनके छोटे भाई जयदयाल डालमिया और दामाद साहू शांति प्रसाद जैन ने भी डालमियानगर को बसाने में अहम भूमिका निभाई थी। जब डालमिया कोलकाता अपने मामा के पास आए तो उन्होंने बुलियन मार्केट (सोने-चांदी का बाजार) में एक सेल्समैन के तौर पर कदम रखा। जल्द ही उन्हें इस बाजार की लत लग गई।

एक समय उनके पास पैसे खत्म हो गए थे और उन्होंने लोगों का भरोसा भी खो दिया था।

₹1.5 लाख का लाभ

डालमिया के जीवन में टर्निंग पॉइंट तब आया जब एक साधु ने उन्हें देखकर कहा कि वे एक हफ्ते के भीतर अमीर हो जाएंगे। इसके ठीक बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दाम अचानक तेजी से बढ़ गए। डालमिया ने सही समय पर बड़ी मात्रा में चांदी बुक कर रखी थी, जिससे उन्हें अप्रत्याशित रूप से भारी मुनाफा (करीब ₹1,50,000) हुआ।

इस मुनाफे ने उनका सारा कर्ज उतार दिया और वे कोलकाता के बड़े व्यापारियों में गिने जाने लगे।

बन गए तीसरे सबसे बड़े कारोबारी

इसके बाद ही डालमिया अपने भाई के साथ मिलकर बिहार के डेहरी-ऑन-सोन में 3,800 एकड़ में फैले एक पूरे औद्योगिक शहर डालमियानगर को बसाया। वहां उन्होंने रोहतास इंडस्ट्रीज के तहत सीमेंट फैक्ट्री, पेपर मिल, केमिकल प्लांट और वनस्पति घीजैसी कई फैक्ट्रियां खोलीं।

धीरे-धीरे उन्होंने बैंक, बीमा, विमानन और मीडिया सेक्टर में पैर पसारे और वे आजादी के समय टाटा और बिड़ला के बाद देश के तीसरे सबसे बड़े बिजनेस घराने के मालिक बन गए।

धोखाधड़ी में आया नाम

सन 1955 में एक धोखाधड़ी में डालमिया का नाम आया और 1962 में उन्हें जेल जाना पड़ा। डालमिया कानूनी पचड़ों में फंसे और उन पर भारी कर्ज व टैक्स देनदारियां आ गईं। तब उनके हाथ से उनकी कई संपत्तियां निकल गईं। इसके बाद वे कभी अपना वो रुतबा हासिल नहीं कर पाए। 1978 में रामकृष्ण डालमिया का निधन हो गया।

डालमिया के निधन के बाद डालमियानगर भी वीरान होता चला गया।

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