सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

चीन-अमेरिका नहीं भारत में है दुनिया की सबसे लंबी LPG पाइपलाइन, ₹100000000000 खर्च कर ये करने जा रहे कारनामा

Published: Thu, 24 Sep 2026 01:16 PM (IST)

भारत का प्राकृतिक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर 'एक देश, एक गैस ग्रिड' लक्ष्य के साथ तेजी से बढ़ रहा है, जिसमें 2,805 ...और पढ़ें

दुनिया की सबसे लंबी गैस पाइपलाइन

दुनिया की सबसे लंबी गैस पाइपलाइन

HighLights

  1. कांडला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन दुनिया की सबसे लंबी है

  2. यह 2,805 किमी लंबी है, लागत ₹9,000-10,000 करोड़

  3. भारत की 25% एलपीजी मांग पूरी करेगी, सड़क दुर्घटनाएं घटाएगी

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की परियोजनाओं के जरिए भारत का प्राकृतिक गैस इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बढ़ रहा है, ताकि एक "एक देश, एक गैस ग्रिड" बनाया जा सके। अलग-अलग इलाकों में 17,000 से 21,000 किलोमीटर से अधिक लंबी क्रॉस-कंट्री प्राकृतिक गैस पाइपलाइनें चालू हैं।
दूर-दराज के औद्योगिक क्लस्टर और रिहायशी इलाकों को जोड़ने के लिए हजारों किलोमीटर और पाइपलाइनें बनाने का काम अलग-अलग चरणों में चल रहा है। इन्हीं में से एक है कांडला गोरखपुर गैस पाइपलाइन (Kandla-Gorakhpur LPG Pipeline)। ये न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया की सबसे लंबी गैस पाइपलाइन है।

कितनी है टोटल लंबाई?

कांडला-गोरखपुर एलपीजी पाइपलाइन (KGPL) भारत में बन रहा एक गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ये तैयार होने के आखिरी चरण में है। इसकी कुल लंबाई 2,805 किलोमीटर (1,743 मील) है और यह गुजरात के कांडला पोर्ट से मध्य प्रदेश होते हुए उत्तर प्रदेश के गोरखपुर शहर तक फैली हुई है।

कितना आएगा खर्च?

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर ₹9,000–10,000 करोड़ का खर्च आएगा। इसे IHB लिमिटेड बना रही है, जो भारत की तीन पब्लिक सेक्टर कंपनियों (PSUs) - इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और भारत पेट्रोलियम (BPCL) - का एक जॉइंट वेंचर है।
यह पाइपलाइन रिफाइनरियों को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) बॉटलिंग प्लांट से जोड़ती है।

इन राज्यों से होकर गुजरेगा रूट

मध्य प्रदेश (गुजरात: 1,076 किमी, मध्य प्रदेश: 621 किमी, उत्तर प्रदेश: 1,108 किमी) से गुजरते हुए गुजरात में कांडला आयात टर्मिनल को उत्तर प्रदेश में गोरखपुर से जोड़ता है। इसे सालाना लगभग 8.3 मिलियन मीट्रिक टन (mmtpa) की ढुलाई के लिए डिजाइन किया गया है, जो भारत की कुल LPG मांग का लगभग 25% पूरा करेगा।

क्या होगा इस प्रोजेक्ट का असर?

यह पश्चिमी तट के इंपोर्ट टर्मिनल (कांडला, दहेज, पिपावाव) और दो रिफाइनरियों (कोयाली, बीना) को सीधे तीन राज्यों में फैले 22 बॉटलिंग प्लांट से जोड़ता है। यह लंबी दूरी तक सड़क टैंकरों से होने वाले ट्रांसपोर्ट पर भारी निर्भरता को खत्म करके एक सुरक्षित और लगातार चलने वाली पाइपलाइन "कन्वेयर बेल्ट" का विकल्प है।
इससे कुल माल ढुलाई का खर्च कम होगा, हाईवे पर ट्रैफिक जाम घटेगा और खतरनाक ईंधन टैंकरों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी कम होगा।

बॉटलिंग प्लांट

  • आईओसीएल - अहमदाबाद (साणंद), लखनऊ, इलाहाबाद, उज्जैन, भोपाल, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर
  • बीपीसीएल - अहमदाबाद (हरियाला), इंदौर, कानपुर, लखनऊ, भोपाल, झाँसी, इलाहाबाद, गोरखपुर
  • एचपीसीएल - गांधीनगर, इंदौर, उन्नाव, भोपाल, वाराणसी, गोरखपुर

ये भी पढ़ें - केन्या के अरबपति ने भारत की सरकारी कंपनी पर जताया भरोसा, सौंप दिया रिफाइनरी का जिम्मा; पड़ोसी देशों को भेजा जाएगा तेल