केन्या के अरबपति ने भारत की सरकारी कंपनी पर जताया भरोसा, सौंप दिया रिफाइनरी का जिम्मा; पड़ोसी देशों को भेजा जाएगा तेल
नाइजीरियाई अरबपति अलीको डंगोटे ने केन्या में अपनी अगली रिफाइनरी के लिए इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) को 4315 करोड़ रुपये ...और पढ़ें
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भारतीय इंजीनियरों को विदेश में बड़ी जिम्मेदारी
HighLights
डंगोटे ने केन्या रिफाइनरी के लिए EIL को दिया बड़ा कॉन्ट्रैक्ट
16 अरब डॉलर में बनेगा 7 लाख बैरल प्रतिदिन का प्लांट
पूर्वी अफ्रीका की ईंधन निर्भरता घटाना, निर्यात बढ़ाना मुख्य लक्ष्य
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। नाइजीरिया के अरबपति अलीको डंगोटे (Aliko Dangote) ने अपनी अगली रिफाइनरी चलाने के लिए उन्हीं इंजीनियरों को काम पर रखा है जिन्होंने उनकी लागोस रिफाइनरी बनाई थी। उन्होंने केन्या के तट पर 16 अरब डॉलर (1.53 लाख करोड़ रुपये) की रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल प्लांट के निर्माण का काम संभालने के लिए भारत की सरकारी कंपनी इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड' को 4315 करोड़ रुपये से ज्यादा का कॉन्ट्रैक्ट दिया है।
प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट
भारत सरकार की कंसल्टेंसी कंपनी ने बीते मंगलवार को मुंबई स्टॉक एक्सचेंज में इस डील की जानकारी दी। यह जानकारी 30 सितंबर को लमु में होने वाले शिलान्यास समारोह से आठ दिन पहले दी गई। कंपनी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम करेगी और 7,00,000 बैरल प्रति दिन क्षमता वाले इस प्लांट के इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण कार्यों की देखरेख करेगी।
फाइलिंग में दिए गए बयान में डंगोटे ने कहा, "EIL की इंजीनियरिंग और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट की बेहतरीन काबिलियत पर भरोसा करते हुए, डंगोटे ग्रुप ने केन्या के इस अहम प्रोजेक्ट के लिए एक बार फिर EIL के साथ हाथ मिलाया है।"
क्या होगा रिफाइनरी का मकसद?
ध्यान रहे कि ये कॉन्ट्रैक्ट मैनेजमेंट के लिए है, न कि निर्माण के लिए। डंगोटे ने कहा है कि प्लांट की लागत लगभग 16 अरब डॉलर होगी और इसे बनने में करीब तीन साल लगेंगे, जबकि जुलाई में उनके ग्रुप ने इसके लिए पांच साल का समय बताया था।
इस रिफाइनरी का मकसद केन्या और उसके पड़ोसी देशों (जो चारों तरफ से जमीन से घिरे हैं) को सप्लाई करना, आयातित ईंधन पर पूर्वी अफ्रीका की निर्भरता कम करना और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करना है।
13 साल पुराना है कारोबारी रिश्ता
EIL के साथ डंगोटे का कारोबारी रिश्ता 2013 से है, जब कंपनी को लेक्की कॉम्प्लेक्स के लिए 139 मिलियन डॉलर का इंजीनियरिंग कॉन्ट्रैक्ट मिला था, जो उस समय उनका सबसे बड़ा कॉन्ट्रैक्ट था। कंपनी ने निर्माण के दौरान टेक्निकल कंसल्टेंट के तौर पर काम किया और अब 2029 तक क्षमता को 6,50,000 बैरल से बढ़ाकर 1.4 मिलियन बैरल प्रति दिन करने के काम की देखरेख कर रही है।
लेक्की प्लांट पहले से ही अपनी तय क्षमता से ज्यादा, यानी 7,00,000 बैरल पर चल रहा है और डंगोटे का प्लान इसके पॉलीप्रोपाइलीन उत्पादन को लगभग तीन गुना बढ़ाकर 2.4 मिलियन टन सालाना करने का है।
3.5 अरब डॉलर की नई लाइन
लमु उस नेटवर्क का पूर्वी अफ्रीकी हिस्सा है जिसकी रूपरेखा डंगोटे ने पिछले हफ्ते तैयार की थी। उन्होंने कहा है कि ग्रुप कुछ ही दिनों में जिबूती से इथियोपिया तक पाइपलाइन का काम शुरू करेगा। साथ ही, वे लमु से इथियोपिया तक एक लाइन बनाने की योजना बना रहे हैं, जो जमीन से घिरे बाजारों तक सप्लाई करने वाली लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का हिस्सा होगी।
इसके अलावा, दक्षिणी अफ्रीका में भी 3.5 अरब डॉलर की एक लाइन बनाने की योजना है।
दो बड़े प्रोजेक्ट्स की एक साथ जिम्मेदारी
अगस्त में, डंगोटे ने पूर्वी अफ्रीकी सरकारों को रिफाइनरी में कुल मिलाकर 30% हिस्सेदारी देने की पेशकश की थी। खबर है कि केन्या 10% हिस्सेदारी लेने पर विचार कर रहा है, और इथियोपिया व रवांडा भी इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं। राष्ट्रपति विलियम रूटो 20 सितंबर को न्यूयॉर्क गए थे ताकि U.N. जनरल असेंबली के दौरान इस प्रोजेक्ट के लिए निवेशकों को आकर्षित कर सकें।
लागोस से लामू तक के इस काम से EIL को डंगोटे के दोनों सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में एक साथ भूमिका निभाने का मौका मिलता है। इससे डंगोटे को एक ऐसी टीम मिलती है जिसने पहले ही इनमें से एक प्रोजेक्ट को ऐसी जगह पर पूरा किया है, जहाँ कोई और ऐसा नहीं कर पाया था।
