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ये है देश का सबसे पुराना हलवाई! 236 साल पहले राजस्थान के लालाजी ने चांदनी चौक में की शुरुआत; बादशाहों से PM-राष्ट्रपति तक फैन

Published: Wed, 23 Sep 2026 12:07 PM (IST)

चांदनी चौक स्थित घंटेवाला हलवाई भारत की सबसे पुरानी मिठाई की दुकानों में से एक है, जिसकी स्थापना 1790 में ...और पढ़ें

कितना पुराना है घंटेवाला हलवाई?

कितना पुराना है घंटेवाला हलवाई?

HighLights

  1. दिल्ली के चांदनी चौक में 1790 में हुई थी स्थापना

  2. लाला सुख लाल जैन ने की थी घंटेवाला हलवाई की शुरुआत

  3. सोहन हलवा और पारंपरिक मिठाइयों के लिए है प्रसिद्ध

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत के अलग-अलग शहरों में एक से एक पुराने हलवाई हैं। इनमें दिल्ली में भी आपको कई पुरानी हलवाइयों की दुकानें मिल जाएंगी। मगर यदि आप कभी चांदनी चौक गए हों तो आपने घंटेवाला हलवाई (Ghantewala Halwai Story) का नाम जरूर सुना होगा। ये एक बहुत पुरानी हलवाई की दुकान है। कहा जाता है कि ये भारत की सबसे पुरानी हलवाई की दुकान है।

236 साल पुरानी दुकान

घंटेवाला हलवाई दिल्ली के चांदनी चौक में स्थित भारत की सबसे पुरानी और ऐतिहासिक मिठाई की दुकानों में से एक है। बताया जाता है कि इसकी स्थापना 1790 ईस्वी में मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के शासनकाल के दौरान हुई थी।

किसने की थी शुरुआत?

रिपोर्ट्स के अनुसार घंटेवाला हलवाई की शुरुआत राजस्थान के आमेर से आए लाला सुख लाल जैन ने की थी। यहाँ का सोहन हलवा देश-विदेश में सबसे ज्यादा मशहूर है। इसके अलावा यहाँ कराची हलवा, पिस्ता बर्फी और मख्खन-फेनी जैसी पारंपरिक मिठाइयाँ भी मिलती हैं।

कैसे पड़ा घंटेवाला हलवाई नाम?

कहा जाता है कि शुरुआत में लाला सुख लाल जैन गली-गली घूमकर घंटी बजाकर मिठाई बेचते थे, जिससे लोग उन्हें 'घंटेवाला' कहने लगे और बाद में दुकान का नाम भी यही पड़ गया। एक कहानी के अनुसार, दुकान का यह नाम खुद मुगल बादशाह शाह आलम द्वितीय ने रखा था।
उन्होंने अपने नौकरों से 'घंटे के नीचे वाली दुकान' से मिठाइयाँ लाने को कहा था, जो समय के साथ छोटा होकर बस 'घंटेवाला' बन गया। उन दिनों उस इलाके में बहुत कम लोग रहते थे और लाल किले में रहने वाले बादशाह को दुकान के पास बने स्कूल की घंटी की आवाज सुनाई देती थी।

घंटेवाला हलवाई के दिलचस्प किस्से

इस दुकान ने मुगल बादशाहों से लेकर भारत के कई प्रधानमंत्रियों (जवाहरलाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक) और राष्ट्रपतियों को अपनी सेवाएँ दी हैं
लाला सुख लाल जैन के शुरुआत करने के बाद यह दुकान सात पीढ़ियों तक उनके वंशजों द्वारा चलाई गई और आज भी चल रही है
जुलाई 2015 में, बिक्री घटने और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के साथ कानूनी दिक्कतों के कारण दुकान बंद हो गई थी। यह नवंबर 2024 में फिर से खुली

फैमिली बिजनेस का बंटवारा

कुछ समय पहले परिवार बंट गया और परिवार की एक और ब्रांच फव्वारे के पास दुकान चलाती है। एक दुकान बंद हो गई है, जबकि दूसरी दुकान का नाम बदलकर 'घंटेवाला कन्फेक्शनर्स' कर दिया गया है, जिसे परिवार के ही सदस्य निर्मल जैन चलाते हैं। यह दुकान भी चांदनी चौक में 'गली परांठे वाली' के पास ही स्थित है।

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