सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

कानपुर की गलियों से दुनिया तक: विजयपत सिंघानिया के दादा-परदादा की वो मेहनत, जिसने खड़ा किया JK Group!

Published: Sun, 29 Mar 2026 10:24 AM (GMT+05:30)

रेमंड ग्रुप के पूर्व चेयरमैन विजयपत सिंघानिया का 87 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। उन्होंने 1980 से 2000 तक रेमंड ग्रुप का नेतृत्व किया।

कैसे शुरू हुआ था जेके ग्रुप?

कैसे शुरू हुआ था जेके ग्रुप?

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

नई दिल्ली। रेमंड ग्रुप (Raymond Group) के पूर्व चेयरमैन और पद्म भूषण से सम्मानित विजयपत सिंघानिया (Vijaypat Singhania Died) का 87 वर्ष की आयु में मुंबई में निधन हो गया। उनके परिवार ने शनिवार को यह जानकारी दी। आपको बता दें कि उनके परिवार ने दो बड़े बिजनेस ग्रुप बनाए हैं, जिनमें रेमंड ग्रुप और जेके ग्रुप, जिसे ऑफिशिली जेके ऑर्गेनाइजेशन (JK Organisation) कहा जाता है।

रेमंड ग्रुप की शुरुआत

रेमंड ग्रुप की शुरुआत एक विदेशी शख्स (Albert Raymond) ने 1925 में की थी। मगर 1944 में सिंघानिया परिवार ने इसे खरीद लिया था। जेके ऑर्गेनाइजेशन की शुरुआत 1918 में हुई थी। बाद में सिंघानिया परिवार ने कारोबार बांट लिया था, जो रेमंड ग्रुप और जेके ऑर्गेनाइजेशन के तौर पर अलग हुआ।
रेमंड ग्रुप की कमान विजयपत सिंघानिया के पास आई थी, जिन्होंने इसे 1980 से 2000 तक संभाला और फिर अपने बेटे गौतम को इसकी कमान सौंप दी थी।

विजयपत के परदादा ने शुरू किया था बिजनेस

सिंघानिया परिवार में बिजनेस की शुरुआत विजयपत के दादा लाला कमलापत सिंघानिया और उनके पिता यानी विजयपत के परदादा लाला जुग्गीलाल सिंघानिया ने मिलकर की थी। बिजनेस ग्रुप की शुरुआत काफी सिम्पल थी। सबसे पहले कानपुर में एक कॉटन मिल शुरू की गयी, जिससे कारोबार शुरू हुआ।

कैसे मिला 'JK' नाम?

'JK' नाम, कमलापत और उनके पिता सेठ जुग्गीलाल के नाम के शुरुआती अक्षरों से लिया गया है। बता दें कि 1950 के दशक से लेकर 1980 के दशक के दौरान, JK Group बिड़ला और टाटा के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा बिजनेस ग्रुप बन गया था।
कमलापत सिंघानिया ने अपने पिता के बिजनेस को पारंपरिक साहूकारी कामों से आगे बढ़ाकर कपास, दालों और गन्ने जैसे क्षेत्रों तक बढ़ाने में मदद की।

पहला बंटवारा 1918 में हुआ

जिस साल जेके ग्रुप की शुरुआत हुई, उसी साल कारोबार का बंटवारा भी हो गया था। 1918 में, कारोबार का बँटवारा कमलापत और उनके भाइयों के बीच हुआ। फिर 1921 में, कमलापत ने अपने पिता के साथ मिलकर एक कॉटन मिल शुरू करने का फैसला किया। JK Cotton Spinning & Weaving Mills ने सूती कपड़ा और धागा बनाया, और यह एक सफल उद्यम साबित हुआ।

आजादी से पहले शुरू कीं कई कंपनियां

  • 1921 – कमला आइस फैक्ट्री
  • 1924 – जेके ऑयल मिल्स
  • 1929 – जेके होजरी फैक्ट्री
  • 1931 – जेके जूट मिल्स
  • 1932 – जेके कॉटन मैन्युफैक्चरर्स लिमिटेड
  • 1934 – जेके आयरन एंड स्टील कंपनी लिमिटेड

आज कई देशों में फैला है कारोबार

आज, JK ग्रुप का कारोबार भारत के बाहर कई देशों में फैला हुआ है, जिसमें कई तरह के बिजनेस, प्रोडक्ट्स और अलग-अलग जगहों पर ऑपरेशन्स शामिल हैं। इसके अलावा, मेक्सिको, इंडोनेशिया, रोमानिया, बेल्जियम, पुर्तगाल, UAE और स्विटज़रलैंड में ग्रुप के विदेशी मैन्युफैक्चरिंग ऑपरेशन्स भी हैं।

कितना बड़ा है जेके ग्रुप?

जेके ग्रुप का टर्नओवर 6 बिलियन डॉलर है। भारतीय करेंसी ये इस समय 56910 करोड़ रुपये बनते हैं। ग्रुप की कंपनियों को परिवार के अलग-अलग लोग संभालते हैं, जिनमें डॉ. रघुपति सिंघानिया (अध्यक्ष एवं एमडी, जेके टायर), हर्ष पति सिंघानिया (अध्यक्ष एवं एमडी, जेके पेपर), और भरत हरि सिंघानिया (अध्यक्ष, जेके लक्ष्मी सीमेंट) शामिल हैं।

रेमंड ग्रुप की कंपनियां

वहीं रेमंड ग्रुप भी एक बड़ा बिजनेस ग्रुप बनकर उभरा और वर्स्टेड सूटिंग सेक्टर में एक ग्लोबल लीडर बना। इसके कारोबार लाइफस्टाइल (टेक्सटाइल्स, कपड़े, डेनिम), रियल्टी, इंजीनियरिंग और FMCG तक फैले हुए हैं। इसके प्रमुख ब्रांड्स में Raymond, Park Avenue, ColorPlus, Parx और Ethnix शामिल हैं, और 600 से ज्यादा शहरों में इसके 1,600 से ज्यादा स्टोर का रिटेल नेटवर्क है।

ये भी पढ़ें - ₹4 करोड़ की नौकरी छोड़ 50 की उम्र में शुरू किया खुद का बिजनेस, महज 13 साल में बनीं ₹39555 Cr की मालकिन