सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Jio IPO: बंटवारे में भाई के खाते में गया 'ब्रेन चाइल्ड' तो जियो से की वापसी, मुकेश अंबानी ने ऐसे सच किया धीरूभाई का सपना

Published: Thu, 15 Oct 2026 10:52 AM (IST)

जियो प्लेटफॉर्म्स भारत के सबसे बड़े IPO की तैयारी कर रहा है, जिसकी वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक ...और पढ़ें

जियो का आईपीओ आ रहा

जियो का आईपीओ आ रहा

HighLights

  1. जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक

  2. 21-23 अक्टूबर को खुलेगा, 30,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य

  3. मुफ्त वॉयस कॉल और सस्ते डेटा से बाजार में क्रांति

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। जियो ने वॉयस कॉल को मुफ्त और डेटा को बेहद सस्ता करके शुरुआत की थी। एक दशक बाद,अब इसकी पैरेंट डिजिटल सर्विस कंपनी 'जियो प्लेटफॉर्म्स' एक रिकॉर्ड तोड़ IPO की तैयारी कर रही है, जिसकी वैल्यूएशन 10 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा हो सकती है।
कल बुधवार को फाइल किए गए DRHP के अनुसार, यह IPO 21 अक्टूबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 23 अक्टूबर को बंद हो जाएगा। इसके लिए 1,065-1,119 रुपये प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया गया है, जिसका मतलब है कि इसकी वैल्यूएशन लगभग 10.3 लाख करोड़ रुपये (करीब 108 अरब डॉलर) हो सकती है। कंपनी इस IPO के जरिए लगभग 30,000 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी कर रही है, जो भारत का सबसे बड़ा IPO बन सकता है।

26.85 करोड़ 5G ग्राहक

2016 में जब रिलायंस जियो ने भारतीय टेलीकॉम बाजार में कदम रखा, तब शायद ही किसी ने सोचा था कि यह नया खिलाड़ी इतनी तेजी से पूरे उद्योग को बदल देगा। मुकेश अंबानी ने ग्राहकों के आने से पहले ही देशभर में 4G नेटवर्क खड़ा करने में अरबों डॉलर लगा दिए। कंपनी ने शुरुआत में मुफ्त वॉयस कॉल और बेहद सस्ता डेटा दिया।
31 मार्च 2026 तक जियो 26.85 करोड़ 5G ग्राहकों के साथ भारत की सबसे बड़ी डिजिटल कनेक्टिविटी कंपनी बन चुकी थी। JioFiber और JioAirFiber के 2.71 करोड़ ग्राहकों के साथ यह देश की सबसे बड़ी फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेवा प्रदाता भी थी।

सबसे बड़ा जोखिम

जियो की शुरुआत किसी पुराने मोबाइल कारोबार को धीरे-धीरे बढ़ाकर नहीं हुई थी। रिलायंस ने सितंबर 2016 के कमर्शियल लॉन्च से पहले नेटवर्क, स्पेक्ट्रम और टेक्नोलॉजी में करीब 25 अरब डॉलर का निवेश किया। रणनीति साफ थी - पहले क्षमता तैयार करो और फिर कम कीमतों के जरिए बड़े पैमाने पर ग्राहक जोड़ो।
मुकेश अंबानी ने जियो को रिलायंस का सबसे बड़ा जोखिम बताया था। उनका मानना था कि अगर निवेश से बड़ा वित्तीय रिटर्न नहीं भी मिला, तो भारत को डिजिटल बनाने का फायदा अपने आप में बहुत बड़ा होगा।

जियो की एंट्री

जियो की एंट्री ने पूरे टेलीकॉम बाजार की तस्वीर बदल दी। कंपनी के शुरुआती ऑफर में मुफ्त वॉयस कॉल और बड़ी मात्रा में डेटा दिया गया। बाद में भी डेटा की कीमतें उस दौर की तुलना में काफी कम रखी गईं। इसके चलते ग्राहक तेजी से जियो की ओर आए और पुराने ऑपरेटरों को भी टैरिफ घटाने और अपने बिजनेस मॉडल पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
इसके बाद उद्योग में बड़े पैमाने पर विलय और कारोबार से बाहर निकलने का दौर आया। आखिरकार जियो, भारती एयरटेल और वोडाफोन आइडिया प्रमुख निजी मोबाइल ऑपरेटरों के रूप में रह गए।

इंटरनेट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया

जियो ने सिर्फ नेटवर्क सस्ता नहीं किया, बल्कि सस्ते डिवाइस के जरिए भी इंटरनेट को ज्यादा लोगों तक पहुंचाया। 2017 में रिलायंस ने JioPhone पेश किया, जिसे शर्तों के तहत 1,500 रुपये की रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट के बदले प्रभावी तौर पर शून्य कीमत पर हासिल किया जा सकता था।
इसका मकसद उन लोगों को 4G और इंटरनेट सेवाओं तक पहुंच देना था, जो सामान्य स्मार्टफोन नहीं खरीद सकते थे। आगे चलकर जियो का कारोबार सिर्फ मोबाइल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं रहा और Jio Platforms के जरिए होम ब्रॉडबैंड, एंटरप्राइज सेवाओं और डिजिटल एप्लिकेशन तक फैल गया।

सबसे बड़ा असर

जियो का सबसे बड़ा असर भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था पर दिखाई दिया। सस्ते डेटा ने वीडियो देखने, ऑनलाइन पढ़ाई, सरकारी सेवाओं और डिजिटल पेमेंट को आम लोगों के लिए ज्यादा आसान बनाया। हालांकि डिजिटल इंडिया, आधार, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर और 2016 में शुरू हुए UPI जैसे प्रयास पहले से आगे बढ़ रहे थे, लेकिन जियो की सस्ती कनेक्टिविटी ने इन डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने वाले लोगों का दायरा बढ़ाने में मदद की।
जियो के आने के दो साल के भीतर भारत दुनिया का सबसे बड़ा मोबाइल डेटा खपत करने वाला बाजार बन गया और ऑनलाइन वीडियो, डिजिटल कॉमर्स तथा ऐप आधारित सेवाओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार हुआ।

धीरुभाई अंबानी की सोच

जियो की कहानी को मुकेश अंबानी के पिता धीरुभाई अंबानी की उस सोच से भी जोड़ा जाता है कि फोन कॉल की कीमत पोस्टकार्ड से कम होनी चाहिए। धीरुभाई की सोच को मुकेश अंबानी ने इंटरनेट के दौर में आगे बढ़ाया। आज यह कारोबार Jio Platforms के रूप में 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी तकनीकों की ओर बढ़ रहा है।
हालांकि इससे पहले रिलायंस कम्युनिकेशंस भी मुकेश अंबानी ने ही शुरू की थी, मगर भाई अनिल के साथ कारोबार के बंटवारे में वो उनके हाथ से निकल गई।
प्रस्तावित IPO भी सिर्फ टेलीकॉम कंपनी की लिस्टिंग नहीं, बल्कि Jio Platforms की है। इसमें 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाने हैं, जिनसे जुटाई रकम का एक हिस्सा टेलीकॉम सब्सिडियरी का कर्ज घटाने और बाकी सामान्य कॉरपोरेट जरूरतों में इस्तेमाल होगा। जियो की असली उपलब्धि यही है कि उसने भारी निवेश, सस्ती कनेक्टिविटी और बड़े पैमाने की रणनीति के जरिए मोबाइल इंटरनेट को भारत में मास-मार्केट सेवा बना दिया।

ये भी पढ़ें - सरकार और LIC के हिस्सेदारी बेचने की खबर से IDBI Bank के निवेशकों में भगदड़! 5% लुढ़का शेयर