स्टारलिंक के मालिक मस्क के देश पर अब अंबानी की नजर, जर्मनी तक Jio को फैलाने की तैयारी!
रिलायंस जियो अमेरिका और जर्मनी सहित वैश्विक दूरसंचार बाजारों में विस्तार की योजना बना रहा है। आकाश अंबानी ने 12 ...और पढ़ें

Jio अब विदेशों में पहुंचने की तैयारी में है
HighLights
जियो का अमेरिका, जर्मनी सहित वैश्विक विस्तार का लक्ष्य।
12 साझेदारियों से 1.5 अरब नए ग्राहक जोड़ने की योजना।
भारत को तकनीकी निर्यातक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| अमेरिका में रिफाइनरी लगाने की घोषणा करने के बाद रिलायंस समूह वहां के टेलीकॉम सेक्टर में उतरने की सोच रही है। Jio प्लेटफार्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी के ग्लोबल विस्तार योजनाओं का अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत देते हुए कहा है कि आने वाले समय में करीब 12 रणनीतिक साझेदारियों के जरिए जियो की टेक्नोलोजी करीब 150 करोड़ अतिरिक्त ग्राहकों तक पहुंचने की है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका और जर्मनी जैसे विकसित देशों से लेकर पूर्वी एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका के विकासशील बाजार भी कंपनी की आगे विस्तार करने की योजना में शामिल हैं।
स्थानीय कंपनियों से पार्टनरशिप की योजना
आकाश अंबानी ने कहा कि Jio का ध्यान सिर्फ उन बाजारों पर नहीं है जहां डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर है। अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों में भी फाइबर रोलआउट की मौजूदा स्थिति कंपनी के लिए अवसर पैदा कर सकती है। कंपनी का इरादा इन देशों में सीधे टेलीकॉम आपरेटर बनने का नहीं, बल्कि स्थानीय संचार कंपनियों के साथ पार्टनरशिप कर अपना टेक्नोलोजी स्टैक उपलब्ध कराने की है।
ये खबर ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी उद्योगपति और दुनिया के सबसे अमीर शख्स इलॉन मस्क अपनी टेलीकॉम कंपनी स्टारलिंक की भारत में इंट्री कराना चाहते हैं। हाल ही में लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रियाओं को लेकर उन्होंने अंबानी फैमिली के नाम पर तंज कसा था।
विदेशों में भी बजेगा जियो का डंका
जियो अपने इंटीग्रेटेड होम ब्राडबैंड स्टैक को एक बड़े ग्लोबल अवसर के रूप में देख रहा है। आकाश अंबानी के अनुसार, टेक्नोलॉजी विकसित करना और उसे बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक चलाना दो अलग-अलग क्षमताएं हैं और जियो ने दोनों को भारत में साबित कर दिया है। कंपनी अलग-अलग देशों की जरूरतों के अनुसार अपने टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के लिए अलग-अलग बाजार देख रही है, जिसमें होम ब्रॉडबैंड के साथ 5G भी शामिल हो सकता है।
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इस योजना को भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लंबे समय तक भारत दुनिया की बड़ी टेक्नोलोजी कंपनियों के लिए विशाल ग्राहक बाजार रहा है। अब Jio की कोशिश भारत में विकसित और बड़े पैमाने पर लागू की गई टेक्नोलोजी को दूसरे देशों तक पहुंचाने की है। इससे भारत टेक्नोलोजी का सिर्फ उपभोक्ता न रहकर उसे बनाने और एक्सपोर्ट करने वाले प्लेयर्स की दिशा में आगे बढ़ सकता है। अगर ये साझेदारियां बनती हैं, तो जियो के लिए विदेशी बाजारों से कमाई का नया रास्ता खुल सकता है। साथ ही यह भारत के टेक्नोलोजी एक्सपोर्ट की संभावनाओं को भी मजबूत कर सकता है।
