Yes Bank का मुनाफा 65% बढ़कर ₹1,080 करोड़, ब्याज से होने वाली कमाई में 22.7% की उछाल; AT-1 बॉन्ड का क्या हाल?
यस बैंक ने सितंबर तिमाही में ₹1,080 करोड़ का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो सालाना आधार पर 65% अधिक है, जबकि NII में 22.7% की वृद्धि हुई।

Yes Bank के मुनाफे में तगड़ा उछाल
HighLights
यस बैंक का शुद्ध मुनाफा 65% बढ़कर ₹1,080 करोड़ हुआ।
ब्याज से मुख्य आय (NII) में 22.7% की वृद्धि।
AT-1 बॉन्ड फैसले से बैंक पर वित्तीय असर की चिंता।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| मुंबई बेस्ड प्राइवेट सेक्टर के बैंक यस बैंक (Yes Bank) ने शनिवार को सितंबर तिमाही के नतीजे जारी किए। बैंक का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 65% बढ़कर ₹1,080 करोड़ हो गया। वहीं, ब्याज से होने वाली मुख्य कमाई यानी नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) में 22.7% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के AT-1 बॉन्ड से जुड़े फैसले के बाद बैंक पर संभावित वित्तीय असर को लेकर निवेशकों की चिंता बनी हुई है।
बैंक के मुताबिक, जुलाई-सितंबर तिमाही में उसकी NII बढ़कर 2,822.5 करोड़ रुपये हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में 2,301 करोड़ रुपये थी। बैंक की मुनाफे में बढ़ोतरी के पीछे अन्य आय में वृद्धि और प्रावधानों में कमी का भी योगदान रहा।
अन्य आय बढ़ी, प्रोविजन घटने से भी मिला फायदा
यस बैंक की अन्य आय भी बढ़कर ₹1,881.5 करोड़ हो गई, जो पिछले साल की समान तिमाही में ₹1,644.3 करोड़ थी। वहीं, बैंक ने सितंबर तिमाही में ₹317.4 करोड़ के प्रोविजन किए, जबकि जून तिमाही में यह राशि ₹395 करोड़ थी। प्रोविजन में कमी और अन्य आय में बढ़ोतरी ने बैंक की प्रॉफिबिलिटी को सहारा दिया।
बैंक की एसेट क्वालिटी भी स्थिर रही। सितंबर तिमाही में ग्रॉस NPA अनुपात घटकर 1.2% रहा, जो जून तिमाही में 1.3% था। नेट NPA अनुपात 0.2% पर स्थिर रहा। हालांकि, रकम के लिहाज से ग्रॉस NPA जून तिमाही के ₹3,704 करोड़ से बढ़कर ₹3,875 करोड़ और नेट NPA ₹677 करोड़ से बढ़कर ₹757 करोड़ हो गया।
लोन और जमा में भी दिखी तेजी
Yes बैंक के कारोबार में भी सालाना आधार पर अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। बैंक के पहले जारी बिजनेस अपडेट के मुताबिक, उसके लोन और एडवांस 23.8% बढ़कर ₹3.09 लाख करोड़ हो गए। वहीं, जमा राशि 19.5% बढ़कर ₹3.54 लाख करोड़ पहुंच गई, जो पिछले साल ₹2.96 लाख करोड़ थी।
बैंक का CASA अनुपात भी पिछले साल के 30% से बढ़कर 33.7% हो गया। CASA में चालू खाते और बचत खाते की जमा शामिल होती है। आम तौर पर इन जमाओं की लागत बैंक के लिए दूसरे सोर्स से जुटाए गए धन की तुलना में कम हो सकती है। हालांकि, FCNR(B) जमा के प्रवाह का असर हटाने पर बैंक की लोन वृद्धि 17.7% और जमा वृद्धि 13.2% रही।
₹8,415 करोड़ के AT-1 बॉन्ड से क्यों बढ़ी चिंता?
बैंक के तिमाही नतीजों के बीच सबसे बड़ा सवाल ₹8,415 करोड़ के एक्स्ट्रा टियर-1 (AT-1) बॉन्ड को लेकर है। सुप्रीम कोर्ट ने 15 अक्टूबर 2026 को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसने मार्च 2020 में यस बैंक के इन बॉन्ड को पूरी तरह राइट-ऑफ करने के फैसले को रद्द कर दिया था। अदालत के फैसले के मुताबिक, बैंक के प्रशासक के पास रिस्ट्रक्चरिंग प्लान के तहत इन बॉन्ड को खत्म करने का अधिकार नहीं था।
ये बॉन्ड बैंक की पूंजी जुटाने का एक माध्यम हैं। साल 2020 में फाइनेंशियल संकट के दौरान यस बैंक के रिस्ट्रक्चरिंग में इन्हें पूरी तरह राइट-ऑफ कर दिया गया था। अब इस फैसले के पलटने से बॉन्ड की मूल राशि और उससे जुड़े भुगतान के संबंध में बैंक पर वित्तीय असर पड़ सकता है।
ये भी पढ़ें: ICICI Bank Q2 Result: आईसीआईसीआई बैंक ने जारी किए दूसरी तिमाही के नतीजे, मुनाफा 20% बढ़कर हुआ 14843 करोड़ रुपये
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, संभावित असर को लेकर बैंक को करीब ₹5,300-₹5,400 करोड़ तक की कमाई पर प्रभाव का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, इस राशि के वास्तविक अकाउंटिंग और उसके समय को लेकर स्थिति अलग हो सकती है। बैंक ने फैसले के प्रभाव का रिव्यू करने की बात कही है। इस मामले में यस बैंक सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पिटीशन दाखिल करने की तैयारी भी कर रहा है।
शेयरों में गिरावट, निवेशकों की नजर आगे के फैसले पर
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यस बैंक के शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला। 15 अक्टूबर को शेयर करीब 14.5% गिरकर 18.15 रुपये पर बंद हुआ था। 16 अक्टूबर को इसमें फिर गिरावट आई और शेयर करीब ₹17.5 के स्तर पर बंद हुआ।
बैंक के सितंबर तिमाही के नतीजे मुनाफे और मुख्य ब्याज आय में मजबूत बढ़ोतरी दिखाते हैं, लेकिन AT-1 बॉन्ड विवाद का फाइनेंशियल असर अभी महत्वपूर्ण जोखिम बना हुआ है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि बैंक इस मामले में क्या कदम उठाता है, संभावित देनदारी का अकाउंटिंग कैसे करता है और इसका उसकी कैपिटल कंडीशन तथा भविष्य की कमाई पर कितना प्रभाव पड़ता है।
