सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

India US Trade Deal कहां अटकी? इस सेक्टर में भारत नहीं करेगा कोई समझौता, टल जाएगी डील?

Published: Mon, 05 Oct 2026 08:51 PM (IST)

भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की बातचीत एक 'प्लेटो' पर अटक गई है, कुछ क्षेत्र को लेकर भारत ...और पढ़ें

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी

भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी

HighLights

  1. भारत-अमेरिका व्यापार समझौता 'प्लेटो' पर पहुंचा, बातचीत अटकी।

  2. कृषि क्षेत्र में भारत अमेरिकी मांगों पर समझौता नहीं करेगा।

  3. वित्त मंत्री ने कहा, आगे रियायतें देना दोनों को मुश्किल।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार समझौते की बातचीत एक तरह से अटक गई है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को स्पष्ट करते हुए कहा कि दोनों पक्ष एक ‘प्लेटो’ पर पहुंच चुके हैं और इससे आगे कोई भी पक्ष अतिरिक्त रियायत देना या लेना बहुत मुश्किल मान रहा है।

दिल्ली में आयोजित म्यूनिख सिक्योरिटी कांफ्रेंस में एक सेशन को संबोधित करते हुए निर्मला सीतारमण ने कहा कि यह समझौता बेहद कठिन और जोरदार निगोशिएशन के बाद यहां तक पहुंचा है। उन्होंने कहा कि इस ‘प्लेटो’ से आगे देना या लेना दोनों देशों के लिए बहुत अधिक मुश्किल होगा। अगर कहीं ऑपरेशन की गुंजाइश बची हो तो दोनों पक्ष कोशिश कर सकते हैं। फिलहाल बातचीत अभी भी जारी है। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार संतुलन भारत के पक्ष में है और घाटा वाशिंगटन का है। अमेरिका इस असंतुलन को कम करना चाहता है।

दोनों देशों के बीच नहीं बन रही बात

वित्त मंत्री का यह बयान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमीसन ग्रीयर के हालिया बयान के अनुसार है। ग्रीयर ने पिछले सप्ताह भारत के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद कहा था कि समझौता फिलहाल होता नहीं दिख रहा। गोयल और ग्रीयर की बैठक में मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई थी, लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं दिखी।

यह स्थिति तब सामने आई है जब कुछ दिन पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका दौरे पर गए थे। जयशंकर की अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत में व्यापार समझौता प्रमुख मुद्दा रहा। गोयल-ग्रीयर बैठक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी बात की थी। जानकारों का मानना है कि शीर्ष स्तर पर भारत ने अपना रुख साफ कर दिया है कि वह समझौते में कहां तक जा सकता है।

कृषि क्षेत्र को लेकर अटकी बातचीत

एक्सपर्ट्स के अनुसार सबसे बड़ी रुकावट कृषि क्षेत्र को लेकर है। भारत अमेरिकी मांग के अनुसार अपने कृषि बाजार को खोलने के लिए तैयार नहीं है। डेयरी, कुछ कृषि उत्पादों और बाजार पहुंच से जुड़े मुद्दों पर दोनों पक्ष अपने-अपने हितों से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे।

हाल के हफ्तों में विदेश मंत्री जयशंकर के बयानों को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है। अमेरिका में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था कि यदि कोई देश आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की संवेदनाओं का ध्यान नहीं रखता, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ेगा। विश्लेषक इसे व्यापार वार्ता में आए ठहराव का संकेत मान रहे हैं। आगे की संभावनाएं इस महीने मार्को रुबियो की प्रस्तावित भारत यात्रा और उसके बाद जी-20 विदेश मंत्रियों की बैठक में जयशंकर की अमेरिका यात्रा पर टिकी हुई हैं।

यदि विदेश मंत्री स्तर पर कोई सहमति बनती है, तभी व्यापार वार्ता फिर से गति पकड़ सकती है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयान संकेत दे रहे हैं कि समझौता निकट भविष्य में आसानी से नहीं हो पाएगा।

अमेरिका लगा रहा भारी-भरकम टैरिफ

फिलहाल इस बात के संकेत हैं कि भारत व अमेरिका के कारोबारी संबंध अभी जैसे चल रहे हैं, वैसे ही चलते रहेंगे। भारतीय उत्पादों पर अमेरिका में अभी अलग अलग टैक्स लगता है। तकरीबन 45% भारतीय उत्पादों पर 5% से कम टैक्स लगाता है। जुलाई 2026 में भारत से आने वाले सामान पर औसत प्रभावी टैरिफ दर लगभग 8.2% थी, जो 2025 में औसत दर करीब 9.5% से कम थी।

ये भी पढ़ें: GST Council Meeting: कारोबारी और ग्राहकों को फिर मिल सकती है राहत, क्या होंगे बदलाव? CA ने 5 पॉइंट में समझा दिया

जुलाई, 2026 मे अमेरिका ने कुछ उत्पाद पर फोर्सेड लेबर का इस्तेमाल करने के जुर्म में 10 फीसद का अतिरिक्त टैक्स लगाया हुआ है। लेकिन इसके दायरे में 60 फीसदी से ज्यादा भारतीय आयातित उत्पादन नहीं आते। स्टील और एल्युमीनियम पर अक्सर 50 फीसदी, ऑटो पार्ट्स पर लगभग 25 फीसदी टैक्स लगता है। भारतीय वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल–अगस्त में अमेरिका को भारत का निर्यात 6.17 फीसद बढ़कर 42.79 अरब डालर हो गया था।