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इन 7 सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेच सरकार ने की बंपर कमाई, जुटाए 20 हजार करोड़, 3 साल का रिकॉर्ड ध्वस्त!

By Jagran BusinessEdited By: Ashish Kushwaha
Published: Fri, 10 Jul 2026 09:02 PM (GMT+05:30)

चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में विनिवेश ने पिछले तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है, अप्रैल-जून में 20,272 करोड़ रुपये का रेवेन्यू मिला।

विनिवेश में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन: पहली तिमाही में ही तीन साल का आंकड़ा पार

विनिवेश में रिकॉर्ड तोड़ प्रदर्शन: पहली तिमाही में ही तीन साल का आंकड़ा पार

राजीव कुमार (जागरण ब्यूरो), नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ही विनिवेश के तीन साल का रिकार्ड टूट गया। चालू वित्त वर्ष के अप्रैल-जून माह में 20,272 करोड़ का विनिवेश किया जा चुका है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2025-26 में मात्र 16,885 करोड़ तो वित्त वर्ष 2024-25 में 10,163 करोड़ का विनिवेश किया गया था। वित्त वर्ष में 2023-24 में 16,507 करोड़ का विनिवेश हो पाया था। चालू वित्त वर्ष 2026-27 में सरकार ने विनिवेश के माध्यम से 80,000 करोड़ के राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखा है। वित्त मंत्रालय का मानना है कि चालू वित्त वर्ष में विनिवेश लक्ष्य से अधिक हो सकता है। विनिवेश के लिए केंद्रीय सार्वजनिक कंपनियों में सरकार अपनी हिस्सेदारी बेचती है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक सरकार को चालू वित्त वर्ष में अब तक सबसे अधिक 5,542 करोड़ की राशि कोल इंडिया में अपनी हिस्सेदारी बेचनी से मिली है। ऑफर आन सेल (ओएफएस) के माध्यम से कोल इंडिया में अपनी दो प्रतिशत हिस्सेदारी सरकार ने बेची है। इसके बाद कोल इंडिया में सरकार की हिस्सेदारी 61.13 प्रतिशत रह गई है। एनएचपीसी में भी ओएफएस के माध्यम से सरकार ने 6.01 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है जिससे 4357 करोड़ रुपए राजस्व के रूप में प्राप्त हुए।

पश्चिम एशिया संकट के कारण सब्सिडी पर दी जाने वाले खाद से लेकर गैस तक का आयात सरकार को काफी बढ़ी हुई कीमत पर करना पड़ा। इससे सरकार का अनुमान से अधिक राजस्व खर्च हो गया। इसकी भरपाई के लिए भी पहली तिमाही में विनिवेश में तेजी रही। चालू वित्त वर्ष में सरकार को विनिवेश के अलावा लाभांश राजस्व से 2025 करोड़ तो संपदा के मोनेटाइजेशन से 6,367 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है।

कोल इंडिया और एनएचपीसी के अलावा अन्य पांच कंपनियों का विनिवेश चालू वित्त वर्ष में किया गया है।। इनमें सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एनएलसी इंडिया लिमिटेड, जनरल इंश्योरेंस कारपोरेशन ऑफ इंडिया, इंडियन रेलवे फाइनेंस कारपोरेशन व कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड शामिल हैं। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के विनिवेश से 2,266.13 करोड़, एनएलसी इंडिया से 1223.57 करोड़, जेनरल इंश्योरेंस से 3090.47 करोड़, रेलवे फाइनेंस कारपोरेशन से 2081.27 करोड़ तो कोचीन शिपयार्ड से 1711 करोड़ रुपए राजस्व के रूप में प्राप्त हुए।

सूत्रों का कहना है कि चालू वित्त वर्ष में सरकार कई अन्य सार्वजनिक कंपनियों की अपनी हिस्सेदारी को कम कर सकती है। 68 सूचीबद्ध सार्वजनिक कंपनियों में सरकार की हिस्सेदारी है जिसका मूल्य 23 लाख करोड़ से अधिक है। वहीं बैंक को मिलाकर 19 सूचीबद्ध विभिन्न वित्तीय संस्थाओं में सरकार की हिस्सेदारी है जिसका अनुमानित मूल्य 19 लाख करोड़ है।

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