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2500 साल पुराना देशी 'हॉर्लिक्स'! बिहार के इस सुपरफूड की दुनिया में बढ़ी डिमांड; मगध साम्राज्य के समय से इसकी पहचान

Published: Wed, 30 Sep 2026 05:50 PM (IST)

बिहार के जहानाबाद का यह स्थानीय उत्पाद अपनी पारंपरिक निर्माण विधि और उच्च पौष्टिकता के कारण 'देसी सुपरफूड' के रूप ...और पढ़ें

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HighLights

  1. जहानाबाद का सत्तू पारंपरिक विधि से तैयार, उच्च पौष्टिक सुपरफूड।

  2. मगध साम्राज्य से जुड़ी ऐतिहासिक जड़ें, 'एक जिला एक उत्पाद' में शामिल।

  3. देश-विदेश में बढ़ी मांग, प्रवासी भारतीयों के बीच विशेष लोकप्रिय है।

नई दिल्ली। भारत में सत्तू (Sattu) एक फेमस खाद्य पदार्थ है, खासकर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड में यह काफी लोकप्रिय है। भारी पौष्टिकता के कारण सत्तू को प्रोटीन का पावरहाउस तक कहा जाता है। वैसे तो सत्तू, यूपी, बिहार, झारखंड, एमपी और राजस्थान में खूब खाया जाता है लेकिन एक बिहार के एक जिले के सत्तू की बात ही कुछ अलग है। क्योंकि, बिहार का जहानाबाद (Bihar Jehanabad District) जिला पारंपरिक विधि हाथ से चलने वाली चक्की से तैयार किया जाता है।

जहानाबाद के सत्तू की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह देश के साथ-साथ विदेश में भी फेमस है। आइये आपको बताते हैं जहानाबाद के सत्तू में ऐसी क्या बात है जिसके चलते इसकी डिमांड विदेशों में बसे भारतीयों के बीच तक है।

एक जिला एक उत्पाद - जहानाबाद का सत्तू

बिहार में सत्तू का जबरदस्त क्रेज है, और जहानाबाद जिला इसके लिए सबसे ज्यादा फेमस है। सत्तू, जहानाबाद का एक जिला एक उत्पाद है। ODOP स्कीम के तहत जहानाबाद के सत्तू को एक 'देसी सुपरफूड' के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमोट किया जा रहा है।

क्यों फेमस है जहानाबाद का सत्तू

बिहार में जहानाबाद मूल रूप से खेती-किसानी के लिए पहचान रखता है और यहां उच्च गुणवत्ता वाले देसी चने की खेती होती है। जहानाबाद की जलवायु और मिट्टी चना, जौ और मक्का की खेती के लिए काफी अनुकूल है इसलिए शुद्ध देसी और उच्च गुणवत्ता वाले चने का इस्तेमाल होने के कारण यहां के सत्तू का स्वाद बहुत ही सोंधा और नेचुरल होता है।

जहानाबाद जिले के ग्रामीण इलाकों में सत्तू को पारंपरिक भट्टी के इस्तेमाल से तैयार किया जाता है। चने को बालू (रेत) में लकड़ी या कोयले की धीमी आंच पर भूना जाता है और फिर इसे पत्थर की चक्की में पीसा जाता है। यह देसी प्रक्रिया इसके पोषण और खास महक को बरकरार रखती है।

मगध साम्राज्य से जुड़ी जड़ें

भारत में सत्तू की उत्पत्ति ऐतिहासिक रूप से प्राचीन 'मगध' क्षेत्र से मानी जाती है। खास बात है कि जहानाबाद, मगध साम्राज्य का एक बहुत ही अहम हिस्सा रहा है। इस खास वजह के चलते यहां सत्तू बनाने और आहार के तौर पर इसे इस्तेमाल करने की संस्कृति सदियों पुरानी है।

विदेशों तक सत्तू का निर्यात

मखाना के साथ बिहार का सत्तू भी वियतनाम के बाजार तक पहुंच गया है। वियतनामी खरीदारों एवं आयातकों ने बिहार का मखाना, कतरनी चावल, मिलेट आधारित उत्पाद, शहद, सत्तू में रूचि दिखाई और निर्यात के आर्डर व नए वैश्विक बाजारों तक पहुंच के अवसर सृजित हुए।

वहीं, प्रवासी भारतीयों के बीच अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और मीडिल ईस्ट में रहने वाले बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के प्रवासियों के बीच सत्तू की बहुत ज्यादा डिमांड रहती है। इस डिमांड को पूरा करने के लिए सत्तू को मॉडर्न, वैक्यूम-सील्ड और एयर-टाइट पैकेजिंग में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।

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वहीं, कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण व MSME मंत्रालय जहानाबाद में स्थानीय उद्यमियों और सत्तू मिल मालिकों को एक्सपोर्ट लाइसेंस दिलाने, पैकेजिंग के अंतरराष्ट्रीय मानक तय करने और विदेशी बाज़ारों से जोड़ने में सीधे मदद कर रहे हैं।