ODOP में चंपावत का 'हिमालयन हनी': पहाड़ों में मिठास से संवर रही आजीविका, जिले के मौनपालकों की बदली तकदीर
चंपावत जिले में 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना के तहत 'हिमालयन शहद' का चयन स्थानीय किसानों के लिए नए आर्थिक ...और पढ़ें

HighLights
ODOP योजना ने चंपावत के 'हिमालयन शहद' को दिया नया आयाम।
मौनपालन से सैकड़ों ग्रामीण परिवारों को मिला स्थायी स्वरोजगार का अवसर।
किसानों की आय में वृद्धि, पहाड़ों में 'रिवर्स पलायन' को बढ़ावा।
डिजिटल टीम, चंपावत। उत्तराखंड के सीमांत जिले चंपावत की आबो-हवा और समृद्ध वनस्पति अब स्थानीय किसानों के लिए नए आर्थिक अवसरों का द्वार खोल रही है। केंद्र व राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' (ODOP) योजना के तहत चंपावत जिले के लिए 'हिमालयन शहद' का चयन किया गया है।
चंपावत के जैविक (ऑर्गेनिक) और औषधीय गुणों से भरपूर शुद्ध शहद की मांग अब न केवल राज्य में, बल्कि देश के बड़े महानगरों तक तेजी से बढ़ रही है। मौनपालन (मधुमक्खी पालन) ने जिले के सैकड़ों ग्रामीण परिवारों, विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को स्वरोजगार से जोड़कर 'रिवर्स पलायन' की एक नई इबारत लिखी है।
कैसे काम कर रहा है चंपावत में शहद का कारोबार
चंपावत जिले की भौगोलिक परिस्थितियां मौनपालन के लिए बेहद अनुकूल हैं। यहां बांझ, बुरांश, खर्सू और विभिन्न औषधीय वनस्पतियों के फूलों से मधुमक्खियां प्राकृतिक रूप से शहद एकत्र करती हैं।
- उत्पादन और क्लस्टर ढांचा: जिले के लोहाघाट, पाटी, चंपावत और बाराकोट विकासखंडों में मौनपालन के कई क्लस्टर बनाए गए हैं। स्थानीय किसान पारंपरिक मौनपालन के साथ-साथ आधुनिक मौन-बक्सों का उपयोग कर रहे हैं।
- प्रोसेसिंग और ब्रांडिंग: ODOP योजना के तहत जिले में शहद के एकत्रीकरण, ग्रेडिंग और पैकेजिंग के लिए आधुनिक 'हनी प्रोसेसिंग सेंटर' स्थापित किए गए हैं। चंपावत के इस शहद को 'हिमालयन हनी' और 'हाउस ऑफ हिमालयाज' के एकीकृत ब्रांड नेम के तहत बाजार में उतारा गया है।
देश भर के बाजारों में बिक्री और निर्यात की तैयारी
चंपावत के शहद की शुद्धता और प्रीमियम क्वालिटी के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
- उत्तराखंड हिल्ट्रॉन व सरस आउटलेट्स: राज्य भर के प्रमुख पर्यटन स्थलों, हवाई अड्डों और आउटलेट्स पर इसके लिए विशेष बिक्री केंद्र बनाए गए हैं।
- ई-कॉमर्स और राष्ट्रीय बाजार: फ्लिपकार्ट, अमेजन और राज्य सरकार के डिजिटल ब्रांड 'हाउस ऑफ हिमालयाज' के जरिए यह शहद सीधे देश भर के उपभोक्ताओं तक पहुंच रहा है।
- मेले और प्रदर्शनी: दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित होने वाले ट्रेड फेयर (IITF) और राष्ट्रीय सरस मेलों में चंपावत के 'हिमालयन हनी' की भारी मांग देखी जा रही है।
चंपावत जिले में ODOP के तहत शहद उत्पादन को मिले बढ़ावा और स्थानीय किसानों की आय में वृद्धि पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी सरकार का विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार 'वोकल फॉर लोकल' और 'लोकल फॉर ग्लोबल' के मंत्र पर काम कर रही है। चंपावत का 'हिमालयन हनी' न केवल शुद्धता का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे पर्वतीय किसानों की मेहनत और लगन का परिणाम है। ODOP योजना के जरिए हम हर जिले के विशिष्ट उत्पाद को वैश्विक बाजार से जोड़ रहे हैं। चंपावत में मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी, ट्रेनिंग और पैकेजिंग की आधुनिक सुविधाएं दी जा रही हैं, जिससे हमारे किसान और मातृशक्ति आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
चंपावत के दर्जनों गांवों में अब खेती के साथ-साथ मौनपालन मुख्य आय का जरिया बन चुका है। योजना से लाभान्वित किसानों ने अपने अनुभव साझा किए।
- रमेश जोशी (मौनपालक किसान, पाटी ब्लॉक)
"पहले हम बहुत छोटे स्तर पर शहद निकालते थे और स्थानीय बाजार में कम दामों पर बेचना पड़ता था। लेकिन जब से चंपावत के शहद को ODOP में शामिल किया गया है, हमें उद्यान विभाग से सब्सिडी पर मौन-बक्से और ट्रेनिंग मिली। अब हमारी आय पहले से तीन गुना बढ़ गई है। सबसे बड़ी बात यह है कि बिक्री की कोई चिंता नहीं रहती, सरकार और समितियां खुद शहद खरीद लेती हैं।"
- सुनीता देवी (अध्यक्ष, महिला स्वयं सहायता समूह, लोहाघाट):
"हमारे समूह की 12 महिलाएं मिलकर मौनपालन और शहद की प्रोसेसिंग से जुड़ी हैं। हिमालयन हनी की ब्रांडिंग होने से हमें उचित दाम मिल रहे हैं। अब हम घर संभालने के साथ-साथ हर महीने सम्मानजनक कमाई कर रहे हैं। यह योजना हम ग्रामीण महिलाओं के लिए वरदान साबित हुई है।"
मौनपालन को बढ़ावा देने के लिए चल रही मुख्य सरकारी योजनाएं
राज्य और केंद्र सरकार द्वारा चंपावत में मौनपालन उद्योग को और मजबूत करने के लिए कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
- राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन एवं शहद मिशन (NBHM): इस मिशन के तहत किसानों को मौन-बक्से, निष्कासन यंत्र (Honey Extractor) और टूलकिट पर 80% तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है।
- कौशल विकास व प्रशिक्षण: उद्यान विभाग और खादी ग्रामोद्योग बोर्ड द्वारा किसानों को वैज्ञानिक तरीके से मौनपालन, मोम निष्कर्षण और मधुमक्खियों की देखभाल का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
- गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला: शहद की शुद्धता और मानकों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाए रखने के लिए चंपावत में आधुनिक टेस्टिंग और लैब सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
ODOP के तहत 'हिमालयन हनी' की सफलता यह साबित करती है कि यदि स्थानीय संसाधनों को सही नीति, तकनीक और बाजार का सहारा मिले, तो उत्तराखंड के पहाड़ों में रोजगार के नए मीठे अध्याय लिखे जा सकते हैं।
