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SBI नहीं, ये है भारत का पहला स्वदेशी बैंक, लाहौर में शुरुआत फिर रावलपिंडी में खुली दूसरी ब्रांच; आजादी के बाद आया दिल्ली

Published: Mon, 19 Oct 2026 12:40 PM (IST)

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) भारत का पहला पूर्ण स्वदेशी सरकारी बैंक था, जिसकी स्थापना 1894 में लाहौर में लाला लाजपत राय और अन्य राष्ट्रवादियों ने की थी।

एआई जनरेटेड इमेज

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HighLights

  1. PNB भारत का पहला पूर्ण स्वदेशी सरकारी बैंक था।

  2. इसकी स्थापना 1894 में लाहौर में लाला लाजपत राय ने की।

  3. 1947 में बैंक का पंजीकृत कार्यालय दिल्ली स्थानांतरित हुआ।

नई दिल्ली। जब भी भारत के पहले बैंक का जिक्र होता है तो लोग अक्सर एसबीआई का नाम लेते हैं, जो किसी जमाने में बैंक ऑफ बंगाल फिर इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया और आजादी के बाद भारतीय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बना। लेकिन, एसबीआई भारत का पहला स्वदेशी सरकारी बैंक नहीं है। देश का पहला पूर्ण स्वदेशी सरकारी बैंक, पंजाब नेशनल बैंक था, जिसकी स्थापना, भारतीयों द्वारा लाहौर में की गई थी। यह बैंक 1894 में स्थापित किया गया था और इसकी स्थापना मशहूर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी ने की थी।

आइये आपको बताते हैं भारत के पहले स्वदेशी सरकारी बैंक के बनने की कहानी...

कैसे हुई PNB की शुरुआत?

पंजाब नेशनल बैंक की स्थापना 1894 में लाहौर में लाला लाजपत राय, दयाल सिंह मजीठिया और अन्य भारतीय राष्ट्रवादियों ने मिलकर की थी। पंजाब प्रांत, आजादी के आंदोलन का एक प्रमुख केंद्र रहा। यहां, भगत सिंह से लेकर कई क्रांतिकारियों का उदय हुआ। ब्रिटिश शासन के अधीन पंजाब में 1857 के बाद एक ऐसे नए शिक्षित वर्ग का उदय हुआ, जिसके मन में गुलामी की बेड़ियों से आज़ाद होने की प्रबल इच्छा थी। इस नए वर्ग की प्रमुख आकांक्षाओं में से एक यह भी थी कि भारतीय पूंजी और प्रबंधन के साथ एक 'स्वदेशी बैंक' शुरू किया जाए, जो भारतीय समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करे।

किसने दिया PNB का आइडिया?

यह विचार सबसे पहले आर्य समाज के राय मूल राज ने रखा था। लाला लाजपत राय के अनुसार, राय मूल राज का लंबे समय से यह सपना था कि भारतीयों का अपना एक राष्ट्रीय बैंक होना चाहिए। वे इस बात को लेकर बहुत चिंतित थे कि "भारतीय पूंजी का इस्तेमाल अंग्रेज़ी बैंकों और कंपनियों को चलाने के लिए किया जा रहा था, जिनसे होने वाला सारा मुनाफा अंग्रेजों को मिल जाता था, जबकि भारतीयों को अपनी ही पूंजी पर मिलने वाले मामूली ब्याज से ही संतोष करना पड़ता था।"

राय मूलराज के कहने पर, लाला लाजपत राय ने अपने कुछ चुनिंदा मित्रों को एक सर्कुलर भेजा, जिसमें रचनात्मक स्वदेशी की दिशा में पहले विशेष कदम के रूप में एक 'इंडियन जॉइंट स्टॉक बैंक' स्थापित करने पर जोर दिया गया था। लाला हरकिशन लाल, जो इंग्लैंड से वाणिज्य और उद्योग से जुड़े विचार लेकर लौटे थे, इन विचारों को व्यावहारिक रूप देने के लिए उत्सुक थे।

1894 को हुई स्थापना

PNB की स्थापना 19 मई, 1894 को हुई थी। बैंक की अधिकृत कुल पूंजी 2 लाख रुपये थी, कार्यशील पूंजी 20,000 रुपये थी। इसमें कुल नौ कर्मचारी थे और कुल मासिक वेतन 320 रुपये था। इसके संस्थापक बोर्ड में भारत के अलग-अलग हिस्सों से आए, अलग-अलग धर्मों को मानने वाले और विविध पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल थे। 

1895 में शुरू हुआ कामकाज

बैंक ने 12 अप्रैल, 1895 को अपना कामकाज शुरू किया। 7 निदेशकों के पहले बोर्ड में शामिल थे: सरदार दयाल सिंह मजीठिया, जो दयाल सिंह कॉलेज और 'ट्रिब्यून' के संस्थापक भी थे; लाला लालचंद, जो डीएवी कॉलेज के संस्थापकों में से एक थे और उसकी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष थे; काली प्रसन्न रॉय, जो एक जाने-माने बंगाली वकील थे और 1900 में लाहौर में हुए भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अधिवेशन में स्वागत समिति के अध्यक्ष भी रहे थे; लाला हरकिशन लाल, जिन्हें पंजाब के पहले उद्योगपति के रूप में व्यापक पहचान मिली; ई.सी. जेसावाला, जो एक प्रसिद्ध पारसी व्यापारी और लाहौर की 'जमशेदजी एंड कंपनी' के साझेदार थे; लाला प्रभु दयाल, जो मुल्तान के एक प्रमुख रईस, व्यापारी और समाजसेवी थे; बख्शी जैशी राम, जो लाहौर के एक प्रतिष्ठित सिविल वकील थे; और लाला ढोलन दास, जो अमृतसर के एक बड़े बैंकर, व्यापारी और रईस थे।

इस प्रकार, एक बंगाली, एक पारसी, एक सिख और कुछ हिंदुओं ने पूरी तरह से राष्ट्रीय भावना के साथ मिलकर इस बैंक की स्थापना की, जिसने 12 अप्रैल, 1895 को जनता के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। उन्होंने इसे एक मिशनरी जोश के साथ अंजाम दिया। दयाल सिंह मजीठिया पहले अध्यक्ष बने, लाला हरकिशन लाल बोर्ड के पहले सचिव बने, और लाहौर के बैरिस्टर श्री बुलाकी राम शास्त्री को प्रबंधक नियुक्त किया गया।

लाला लाजपत राय ने खुलाया पहला खाता

लाला लाजपत राय ने सबसे पहले इस बैंक में खाता खोला, जो लाहौर के अनारकली में आर्य समाज मंदिर के सामने वाली इमारत में स्थित था। लाहौर के बाहर पहली शाखा 1900 में रावलपिंडी में खोली गई। लाजपत राय इसके बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में शामिल हुए। इसी दौरान बैंक में 'जलियांवाला बाग समिति' का खाता खोला गया, जिसे बाद के दशक में महात्मा गांधी और पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संचालित किया। 1941 से 1946 तक के पांच वर्षों में अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली। 71 शाखाओं से बढ़कर इनकी संख्या 278 हो गई। जमा राशि 10 करोड़ रुपये से बढ़कर 62 करोड़ रुपये हो गई। 31 मार्च 1947 को बैंक अधिकारियों ने लाहौर से हटने और बैंक का पंजीकृत कार्यालय दिल्ली स्थानांतरित करने का निर्णय लिया; इस स्थानांतरण के लिए 20 जून 1947 को लाहौर उच्च न्यायालय से अनुमति प्राप्त कर ली गई।

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1951 में, बैंक ने 'भारत बैंक लिमिटेड' की संपत्ति और देनदारियों को अपने अधिकार में ले लिया और निजी क्षेत्र का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन गया। 1962 में, इसने 'इंडो-कमर्शियल बैंक' का अपने साथ विलय कर लिया। 1949 में इसके जमा (डिपॉजिट) घटकर 43 करोड़ रुपये रह गए थे, जो जुलाई 1969 तक बढ़कर 355 करोड़ रुपये के पार पहुँच गए। इसके कार्यालयों की संख्या बढ़कर 569 हो गई और दिए गए ऋण (एडवांस) 1949 के 19 करोड़ रुपये से बढ़कर जुलाई 1969 तक 243 करोड़ रुपये हो गए; इसी समय इसका राष्ट्रीयकरण किया गया।