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World Malaria Day: भारत में पहली बार किस कंपनी ने बनाई स्वदेशी मलेरिया दवा, दुनिया ने माना लोहा!

Published: Sat, 25 Apr 2026 01:26 PM (IST)Updated: Sat, 25 Apr 2026 02:46 PM (IST)

विश्व मलेरिया दिवस पर भारत की पहली स्वदेशी मलेरिया रोधी दवा 'सिनरियाम' की सफलता की कहानी बताई गई है। रैनबैक्सी ...और पढ़ें

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HighLights

  1. सिनरियाम भारत की पहली स्वदेशी मलेरिया रोधी दवा।

  2. रैनबैक्सी ने 25 अप्रैल 2012 को इसे लॉन्च किया।

  3. भारत के फार्मा रिसर्च में एक ऐतिहासिक उपलब्धि।

नई दिल्ली। आज 'विश्व मलेरिया दिवस' (World Malaria Day 2026) है। मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी के खिलाफ भारत ने खुद को सिर्फ 'जेनेरिक दवाइयों की फार्मेसी' तक सीमित रखने की बजाय, रिसर्च और इनोवेशन की दुनिया में एक लंबी छलांग लगाई है। 'सिनरियाम' (Synriam) भारत की पहली स्वदेशी न्यू केमिकल एंटिटी (NCE) मलेरिया रोधी दवा है, जिसने पूरी दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिया था। आइए, आज विश्व मलेरिया डे के इस खास मौके पर उस ऐतिहासिक सफर पर एक नजर डालते हैं।

आखिर कैसे हुई थी इस 'चमत्कारी दवा' की शुरुआत?

विश्व मलेरिया दिवस के ही मौके पर 25 अप्रैल 2012 को रैनबैक्सी लैबोरेटरीज (Ranbaxy Laboratories) ने 'सिनरियाम' को बाजार में उतारा था। यह दवा मुख्य रूप से वयस्कों में होने वाले 'प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम' (Plasmodium falciparum) मलेरिया के इलाज के लिए बनाई गई थी।

यह भारत के फार्मास्यूटिकल इतिहास का पहला मौका था जब किसी भारतीय कंपनी ने एक नए मॉलिक्यूल को रिसर्च से लेकर क्लिनिकल ट्रायल और कमर्शियल लॉन्चिंग तक पूरी तरह से स्वदेशी स्तर पर अंजाम दिया था। इस पूरी प्रक्रिया में भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने अहम भूमिका निभाई थी। मात्र तीन दिन तक रोजाना एक गोली खाने से यह दवा मलेरिया के परजीवियों का खात्मा करने में कारगर थी।

क्या यह मॉलिक्यूल पूरी तरह से 'मेड इन इंडिया' था?

अगर इसकी जड़ों में जाएं, तो यह शुरुआत से पूरी तरह 'मेड इन इंडिया' नहीं था, बल्कि इसे एक शानदार वैश्विक साझेदारी और भारतीय जिद का नतीजा कहना ज्यादा सही होगा। इस दवा का मुख्य मॉलिक्यूल 'आर्टेरोलेन' (Arterolane या OZ277) था। इसकी खोज 'मेडिसिन्स फॉर मलेरिया वेंचर' (MMV) नामक एक स्विस नॉन-प्रॉफिट संस्था द्वारा वित्तपोषित प्रोजेक्ट के तहत हुई थी। इस रिसर्च में शुरुआत में अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और स्विट्जरलैंड के शोधकर्ता शामिल थे। साल 2003-04 के आसपास रैनबैक्सी ने इस मॉलिक्यूल को आगे विकसित करने के लिए MMV के साथ हाथ मिलाया।

असली चुनौती 2007-08 में आई जब शुरुआती ट्रायल्स के बाद MMV ने अपनी फंडिंग रोक दी। उस समय रैनबैक्सी ने पीछे हटने के बजाय एक बड़ा फैसला लिया। कंपनी ने इसे अकेले ही विकसित करने का बीड़ा उठाया। भारत, बांग्लादेश और थाईलैंड में इसके तीसरे चरण के क्लिनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे किए गए और करीब 8 साल की कड़ी मेहनत के बाद 2011 में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने इसे हरी झंडी दे दी।

इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे कौन लोग रहे?

रैनबैक्सी को एक छोटी सी कंपनी से ग्लोबल पावरहाउस बनाने का काम संस्थापकों भाई मोहन सिंह और उनके बेटे परविंदर सिंह ने किया। परविंदर सिंह ही वह दूरदर्शी व्यक्ति थे, जिन्होंने 1980 के दशक में रैनबैक्सी में मजबूत R&D (रिसर्च एंड डेवलपमेंट) कल्चर की नींव रखी थी। उनके विजन ने ही कंपनी को कॉपीकैट दवाओं से इनोवेशन की तरफ मोड़ा।

हालांकि, 2012 में जब सिनरियाम लॉन्च हुई, तब तक कंपनी के मैनेजमेंट में बड़े बदलाव आ चुके थे (2008 में जापानी कंपनी दाइची सैंक्यो ने रैनबैक्सी का अधिग्रहण कर लिया था)। इसलिए, इस ऐतिहासिक दवा को बनाने का सीधा श्रेय परविंदर सिंह (जिनका 2001 में ही निधन हो चुका था) को नहीं, बल्कि रैनबैक्सी की बाद की वैज्ञानिक टीम को जाता है।

इस प्रोजेक्ट के लॉन्च के समय तत्कालीन CEO अरुण साहनी और प्रेसिडेंट (R&D) डॉ. सुदर्शन अरोड़ा ने इसका नेतृत्व किया था। यह किसी एक व्यक्ति या संस्थापक की जीत नहीं थी, बल्कि वैज्ञानिकों, सरकारी एजेंसियों (DST और ICMR) और मजबूत इरादों वाले नेतृत्व की एक सामूहिक सफलता थी।

'सिनरियाम' सिर्फ एक दवा का नाम नहीं है; यह इस बात का सबूत है कि भारतीय फार्मा कंपनियां दुनिया की किसी भी जटिल बीमारी का इलाज खोजने में पूरी तरह सक्षम हैं। विश्व मलेरिया दिवस 2026 पर, विज्ञान के क्षेत्र में भारत की इस जीत को याद करना हमें स्वास्थ्य के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की नई प्रेरणा देता है।

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शेयर बाजार में लिस्टेड है कंपनी 

रैनबैक्सी अब भारत की सबसे बड़ी दवा कंपनी, सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Sun Pharma) का हिस्सा है। दुनिया भर में ब्रांडेड और जेनेरिक दवाओं के साथ-साथ एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के निर्माण, विकास और मार्केटिंग में एक प्रमुख नाम है। कंपनी की वैश्विक स्तर पर कई मैन्युफैक्चरिंग सुविधाएं और व्यापारिक गतिविधियां फैली हुई हैं। शेयर बाजार में भी इसका मजबूत दबदबा है; वर्तमान में इसका मार्केट कैप ₹3,88,788 करोड़ और मौजूदा शेयर की कीमत ₹1,620 है। निवेशकों के नजरिए से देखें तो, इस स्टॉक ने लंबी अवधि में शानदार प्रदर्शन करते हुए पिछले 5 सालों में 153.70% का बंपर रिटर्न दिया है। हालांकि, बाजार के मौजूदा रुझानों के मुताबिक, निवेशकों को यह ध्यान रखना चाहिए कि लंबी अवधि के इस मजबूत मुनाफे के बावजूद, हाल की छोटी अवधि (शॉर्ट-टर्म) में इसके रिटर्न में थोड़ी गिरावट देखी गई है।