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World Water Day: पिता 7000 करोड़ में TATA को बेच रहे थे बिजनेस, बेटी ने रोकी डील; परिवार पानी बेच बना अरबपति

Published: Sun, 22 Mar 2026 10:03 AM (IST)

विश्व जल दिवस पर (World Water Day), बिसलेरी की 4 लाख से 7000 करोड़ रुपये तक की यात्रा बता रहे ...और पढ़ें

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नई दिल्ली। भारत में पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर (बोतलबंद पानी) का चलन तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में आज विश्व जल दिवस (World Water Day 20226) के मौके पर बिसलेरी (Bisleri) के बनने के कहानी बता रहे है। कैसे एक संघर्षरत इटली ब्रांड ने भारत में अरबों की कमाई कराई? आइए इस ब्रांड को सक्सेस बनाने वाले रमेश चौहान और उनकी बेटी जयंती चौहान के बारे में जानते हैं। जिन्होंने 4 लाख रुपये के निवेश को 7000 करोड़ रुपये के साम्राज्य में बदल दिया।

'बॉटल वॉटर किंग' बनने की कैसे हुई शुरुआत?

रमेश चौहान (जिन्हें उनके दोस्त प्यार से RJC कहते हैं) का जन्म 17 जून 1940 को मुंबई में हुआ था। उन्होंने मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) से मैकेनिकल इंजीनियरिंग और बिजनेस मैनेजमेंट में डबल मेजर किया था। 1969 में, जब रमेश चौहान महज 27-29 साल के थे, तब उन्होंने एक इतालवी उद्यमी (फेलिस बिसलेरी द्वारा स्थापित) से बिसलेरी ब्रांड को सिर्फ 4 लाख रुपये में खरीद लिया था।

उस दौर में भारत में पानी खरीदकर पीने के बारे में सोचना भी मजाक माना जाता था। लोग नल का या उबला हुआ पानी पीते थे। शुरुआती चुनौतियों (जैसे बोतलों की कमी और जागरूकता का अभाव) के बावजूद, चौहान डटे रहे। उन्होंने कांच की बोतलों से शुरुआत की और बाद में किफायती पीईटी (PET) प्लास्टिक बोतलों का रुख किया।

कोल्ड ड्रिंक बनाने कैसे आया आइडिया?

रमेश चौहान केवल पानी नहीं बेच रहे थे, बल्कि 1960-70 के दशक में उन्होंने पारले ग्रुप के तहत एक विशाल सॉफ्ट ड्रिंक साम्राज्य खड़ा किया था। 1977 में जब कोका-कोला भारत से बाहर गया, तो उन्होंने 'थम्स अप' (Thums Up), 'लिम्का' (Limca), 'गोल्ड स्पॉट', 'सिट्रा' और 'माज़ा' (Maaza) जैसे आइकॉनिक ब्रांड बनाए और बाजार के 80% हिस्से पर कब्जा कर लिया।

1993 में, जब कोका-कोला ने भारत में वापसी की, तो चौहान ने अपने सॉफ्ट ड्रिंक ब्रांड्स को लगभग $60 मिलियन (करीब 400 करोड़ रुपये) में कोका-कोला को बेच दिया और अपना पूरा ध्यान बिसलेरी पर लगा दिया।

टाटा को नहीं बेचा साम्राज्य, बेटी जयंती ने संभाली कमान

रमेश चौहान की इकलौती बेटी जयंती चौहान (जयंती खान चौहान) अब इस विरासत को आगे बढ़ा रही हैं। न्यूयॉर्क, दिल्ली और मुंबई में पली-बढ़ीं जयंती ने फैशन, स्टाइलिंग और फोटोग्राफी में पढ़ाई की है। बिसलेरी में उनकी हिस्सेदारी लगभग 33% है। साल 2022 में, जब 80 पार कर चुके रमेश चौहान बिसलेरी को टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स को 6,000-7,000 करोड़ रुपये में बेचने की योजना बना रहे थे, तब जयंती ने निर्णायक कदम उठाया। उन्होंने इस डील का विरोध किया, पिता को व्यवसाय परिवार के पास ही रखने के लिए मनाया और टाटा को पीछे हटना पड़ा।

2023 तक, वह वाइस चेयरपर्सन बन गईं। आज 42 वर्ष की आयु में, जयंती के नेतृत्व में बिसलेरी आक्रामक रूप से विस्तार कर रही है। उन्होंने मुकेश अंबानी की बेटी ईशा अंबानी के रिलायंस रिटेल के कैम्पा कोला और टाटा जैसे दिग्गजों को टक्कर देने के लिए बिसलेरी पॉप, स्पाइसी जीरा और लिमोनाटा जैसे नए कार्बोनेटेड/फिजी ड्रिंक्स लॉन्च किए हैं।

पानी के लिए दक्षिण गुजरात में 46 चेक डैम बनाए

रमेश चौहान हमेशा से पर्यावरण संरक्षण के पक्षधर रहे हैं। जल संरक्षण (Water Conservation) के लिए उन्होंने दक्षिण गुजरात में 46 चेक डैम बनाए और बहाल किए हैं, जो हर साल 10 बिलियन लीटर से अधिक पानी संचित करते हैं।

1995 में प्लास्टिक रीसाइक्लिंग शुरू की। 2015 में 8 घंटे में सबसे ज्यादा PET बोतलें (1.1 मिलियन) इकट्ठा करने के लिए बिसलेरी का नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड और लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज हुआ।

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भारत का पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर मार्केट

  • बिसलेरी (Bisleri): 36-38% (बाजार में सबसे आगे, 100 से ज्यादा प्लांट्स के साथ)
  • किन्ले (Kinley - Coca-Cola): 18-20%
  • एक्वाफिना (Aquafina - PepsiCo): 15%
  • अन्य: रेल नीर (10%), बेली (7%), हिमालयन (7%) और मुकेश अंबानी की रिलायंस का नया कैम्पा श्योर।