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डॉलर के मुकाबले 100 तक गिरेगा रुपया? महंगा तेल और FIIs की निकासी, RBI के एक्शन ने क्यों बढ़ा दी टेंशन

Published: Fri, 16 Oct 2026 02:42 PM (IST)

Indian Rupee vs US Dollar: भारतीय रुपये में हालिया तेजी के बावजूद डॉलर के मुकाबले इसकी कमजोरी का खतरा बना ...और पढ़ें

रुपया डॉलर के मुकाबले 100 तक गिरने का खतरा, RBI के प्रयासों के बावजूद चुनौतियां

रुपया डॉलर के मुकाबले 100 तक गिरने का खतरा, RBI के प्रयासों के बावजूद चुनौतियां

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| Indian Rupee vs US Dollar: भारतीय रुपये में इस सप्ताह 1.8 फीसदी की तेजी आई है, लेकिन डॉलर के मुकाबले इसकी कमजोरी का खतरा अब भी बना हुआ है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के कड़े कदमों से रुपया करीब 95 प्रति डॉलर के स्तर पर संभला है। हालांकि, विदेशी मुद्रा बाजार में कारोबार घटा है। रुपये की सुरक्षा की लागत 2016 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। वहीं, सरकारी बॉन्ड पर ब्याज दरें तीन साल से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

RBI के कदमों से मिली राहत

RBI ने 2013 के बाद रुपये को बचाने के लिए सबसे आक्रामक कदम उठाए हैं। इनका मकसद डॉलर की सट्टेबाजी वाली मांग को रोकना और तेल कंपनियों की डॉलर खरीद को सीधे बाजार से हटाना है। इन उपायों से रुपये को कुछ राहत मिली है। लेकिन बाजार में कारोबार और जोखिम से बचाव के साधनों पर भी असर पड़ा है।

इन कदमों के बावजूद रुपये की कमजोरी की बुनियादी वजहें बनी हुई हैं। इनमें महंगा कच्चा तेल, लगातार बनी महंगाई और विदेशी पूंजी की निकासी शामिल हैं। इन कारणों से आने वाले महीनों में रुपये पर दोबारा दबाव बढ़ सकता है।

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₹100 तक फिसलने का अनुमान

स्टेट स्ट्रीट इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के वरिष्ठ मुद्रा प्रबंधक आरोन हर्ड के मुताबिक,

महंगाई, वास्तविक ब्याज दरों और अर्थव्यवस्था की स्थिति में ठोस सुधार नहीं हुआ तो रुपये पर दबाव फिर बढ़ सकता है। उनका अनुमान है कि अगले एक साल में डॉलर के मुकाबले रुपया 99-100 तक पहुंच सकता है। फिलहाल 1 डॉलर करीब 95 रुपये का है।

हालिया कदमों से पहले रुपया 97 प्रति डॉलर की ओर फिसल रहा था। इससे बाजार में चिंता बढ़ गई थी कि इस स्तर के पार जाने पर गिरावट तेज होकर 100 तक पहुंच सकती है। प्रवासी भारतीयों की 133 अरब डॉलर की जमा योजना और करीब चार साल में RBI की पहली ब्याज दर बढ़ोतरी भी रुपये की कमजोरी को रोकने में नाकाम रही थी।

डॉलर से बचाव महंगा, बाजार में कारोबार घटा

आयातक और बैंक आने वाले महीनों में रुपये की और गिरावट से बचने के लिए डॉलर का अग्रिम सौदा कर रहे हैं। इससे वायदा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ी है। रुपये को गिरावट से बचाने की लागत 2016 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है।

आईएफए ग्लोबल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अभिषेक गोयनका ने वायदा बाजार को बेहद असंतुलित बताया। उनके मुताबिक,

छोटी अवधि के सौदों की लागत में असामान्य उछाल आया है। कुछ कंपनियों के लिए रुपये में कर्ज लेकर उसे डॉलर में बदलना, सीधे डॉलर में कर्ज लेने से सस्ता पड़ रहा है। बाजार में कारोबार भी काफी घटा है। इसलिए उन्होंने ग्राहकों को केवल तत्काल जरूरत के जोखिम से बचाव की सलाह दी है।"

बॉन्ड बाजार पर भी दबाव

बॉन्ड पर ब्याज दरें तीन साल से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। महंगे तेल और विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी से आशंका बढ़ी है कि RBI को रुपये को संभालने के लिए ब्याज दरें और बढ़ानी पड़ सकती हैं। आरबीएल बैंक के ट्रेजरी हेड अंशुल चंडक ने कहा कि,

लंबी अवधि के फायदे के लिए फिलहाल नुकसान सहना पड़ सकता है। उन्होंने विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए मौद्रिक कदमों के साथ राजकोषीय सुधारों की जरूरत भी बताई।

RBI की नीति पर निवेशकों की नजर

बाजार की चिंताओं के बाद RBI ने स्पष्ट किया कि उसके प्रतिबंध विदेशी मुद्रा जोखिम से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाले डेरिवेटिव सौदों पर लागू हैं, बैंकों की बाजार में खरीद-बिक्री की भूमिका पर नहीं। यूबीएस एसेट मैनेजमेंट की शमाइला खान के मुताबिक,

निवेशकों का भरोसा बनाए रखने के लिए नीति में पारदर्शिता और सौदों की सुविधा जरूरी है। एमएंडजी इन्वेस्टमेंट्स की गुआन यी लो के अनुसार, RBI के कदम डॉलर-रुपया दर को करीब 96 तक सीमित रखने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, वैश्विक तेल कीमतों में स्थिरता और विदेशी पूंजी के प्रवाह में सुधार के बिना रुपये की मजबूत वापसी मुश्किल दिखती है।

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