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Dollar vs Rupee: शेयर बाजार धड़ाम, कच्चे तेल में उबाल! डॉलर के आगे पस्त हुआ रुपया, 44 पैसे टूटकर कहां पहुंचा?

Published: Thu, 22 Oct 2026 06:34 PM (IST)

Why are rupees falling: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के कारण रुपया डॉलर के ...और पढ़ें

डॉलर के मुकाबले रुपया 44 पैसे टूटा कच्चे तेल और शेयर बाजार की गिरावट से

डॉलर के मुकाबले रुपया 44 पैसे टूटा कच्चे तेल और शेयर बाजार की गिरावट से

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बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और घरेलू शेयर बाजार में आई भारी गिरावट ने भारतीय रुपये की कमर तोड़ दी। गुरुवार को डॉलर के मुकाबले रुपया 44 पैसे की बड़ी गिरावट के साथ 94.82 (अस्थायी) के स्तर पर बंद हुआ।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार सुबह रुपया 94.47 पर खुला था, लेकिन बाजार की निगेटिव सेंटिमेंट के चलते यह दिन के कारोबार में फिसलकर 94.94 के निचले स्तर तक चला गया। अंत में यह बुधवार के 94.38 के बंद भाव से 44 पैसे कमजोर होकर 94.82 पर आ गया।

क्यों आई रुपये में इतनी बड़ी गिरावट?

रुपये के टूटने की सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का महंगा होना है। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों पर हमलों और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल मार्केट को डरा दिया है। इसी का नतीजा है कि ब्रेंट क्रूड 3.23% की छलांग लगाकर 112.33 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया।

इसके अलावा, घरेलू शेयर बाजार के धड़ाम होने से भी रुपये पर भारी दबाव पड़ा। बीएसई का सेंसेक्स 460.30 अंक टूटकर 73,249.39 पर और एनएसई निफ्टी 123.70 अंक गिरकर 22,687.65 पर आ गया।

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इन वजहों से मिली थोड़ी राहत

हालांकि, डॉलर इंडेक्स में आई हल्की नरमी ने रुपये को और ज्यादा गिरने से बचा लिया। इसके अलावा रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ (IPO) को मिले शानदार रिस्पॉन्स ने भी बाजार में डॉलर की उपलब्धता बढ़ाई है। आईपीओ में रिटेल निवेशकों का हिस्सा खुलने के दो घंटे के भीतर ही फुल हो गया। साथ ही बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार में 1,022.32 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

एसबीआई सिक्योरिटीज के रिसर्च हेड सनी अग्रवाल ने बताया, "सऊदी अरामको पर हमले और पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की खबरों के बाद ही कच्चे तेल में करीब 3% की भारी तेजी आई है।"

वहीं, एलकेपी सिक्योरिटीज के वीपी-रिसर्च एनालिस्ट जतीन त्रिवेदी का कहना है, "क्रूड का 110 डॉलर के ऊपर टिके रहना और शेयर बाजार की कमजोरी रुपये को नुकसान पहुंचा रही है।

मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता से भारत का आयात बिल (Import Bill) बढ़ने का खतरा है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ेगा। जियोपॉलिटिकल हालातों के चलते आने वाले दिनों में रुपया 94.45 से 95.25 के दायरे में ट्रेड कर सकता है।"

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