Railway News: अब बदलेगा रेलगाड़ी के डिब्बों का डिजाइन! रेल मंत्री ने दी बड़ी जानकारी, गिनाए फायदे
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने घोषणा की है कि अब कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार मालगाड़ी के वैगन डिजाइन कर ...और पढ़ें

मालगाड़ी के डिब्बों में बदलाव को लेकर नई नीति पर विचार
HighLights
कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार मालगाड़ी के वैगन डिजाइन करेंगी।
नई वैगन डिजाइन नीति 15 दिनों में लागू की जाएगी।
इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी और दक्षता बढ़ेगी।
नई दिल्ली| यात्रा और माल ढुलाई के लिए भारतीय रेल आज भी लोगों की पहली पसंद है। भारतीय लोगों का भारतीय रेल से खास लगाव है। यात्रा के दौरान प्लेटफॉर्म से लेकर रेलवे रूट और ट्रेन के डिब्बों से लेकर मालगाड़ी में लदे माल का डिजाइन लोगों के जेहन में बस गया है। हालांकि अब Indian Railway ने रेल के डिब्बों में बदलाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है।
कंपनियां खुद डिजाइन करेंगी रेल के डिब्बे
बुधवार को रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। रेल मंत्रालय ने फैसला किया है कि अब कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार मालगाड़ी के वैगन डिजाइन कर सकेंगी। मतलब अब कंपनियां जिस तरह का वैगन चाहती हैं. वे अपनी जरूरत के हिसाब से उस तरह के डिजाइन की डिमांड करते हुए खुद बताएंगी कि उन्हें कैसा वैगन चाहिए, रेलवे उस दिशा में नई नीति लेकर आएगा। साथ ही अश्विनी वैष्णव ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है, कि नई वैगन डिजाइन पॉलिसी अगले 15 दिनों के अंदर तैयार कर लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाए।
जैसा माल वैसा होगा वैगन
बता दें कि Indian Railway की तरफ हाल के वर्षों में सीमेंट और नमक के लिए खास तरीके के वैगन तैयार किए गए थे। इन वैगनों का नतीजा काफी अच्छा रहा, नए वैगन में माल लोड करने में तेजी और उतारने की प्रक्रिया आसानी हुई। साथ ही ढुलाई ज्यादा सुरक्षित तरीके से हुई और इंडस्ट्री ने भी इसे पसंद किया।
अब रेलवे को बड़े स्तर पर नई नीति लाएगा। अभी तक ज्यादातर स्टील, नमक, अनाज, कोयला, सीमेंट और केमिकल्स की ढुलाई एक ही तरह के डिब्बों में होती थी, जिससे कई असुविधाएं देखी गई हैं। अब जिस इंडस्ट्री और माल को जैसी जरूरत होगी उसके हिसाब से डिब्बों का डिजाइन तैयार किया जाएगा।
डिजाइन बदलने से क्या फायदा होगा?
रेलवे के अनुसार लगातार इंडस्ट्री , व्यापारिक संगठनों और बड़े माल ग्राहकों से उनकी बातचीत चल रही थी। इस बैठक में ये सुझाव सामने आया कि अगर किसी कंपनी को लोडिंग, अनलोडिंग और परिवहन के लिए खास तरह का वैगन मिल जाए, तो उसकी लागत भी घटेगी और काम भी आसान हो जाएगा। इसके अलावा इससे माल ढुलाई के लिए रेलवे का इस्तेमाल बढ़ेगा। भारतीय रेलवे लगभग 100 फीसदी बिजली से चलने के करीब है, जिससे डीजल पर निर्भरता घटेगी और आयात में कमी आएगी।
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अप्रूवल के लिए सख्त होंगे मानक
लोडिंग-अनलोडिंग के लिए खास बाइंडिंग अरेंजमेंट की जरूरत के चलते कंपनियां अपने अनुसार डिजाइन बना सकती हैं लेकिन उन डिजाइनों को मंजूरी देने और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी RDSO और CCRS (चीफ कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी) की होगी। इसके अलावा रेल मंत्री ने कहा है कि डिजाइन अप्रूवल और प्रोटोटाइप डेवलपमेंट के लिए बनाए जाने वाले सुरक्षा और गुणवत्ता के मानक बेहद सख्त होंगे।
