सोना-प्रॉपर्टी-शेयर नहीं, अब यहां निवेश कर रहे भारतीय; एक साल में झोंक दिए ₹6.90 लाख करोड़!
Indian household investment: भारतीय परिवार अब सीधे शेयरों के बजाय म्यूचुअल फंड और SIP जैसे पेशेवर निवेश विकल्पों पर अधिक ...और पढ़ें
-1779352989905_m.webp)
सोना-प्रॉपर्टी-शेयर नहीं अब SIP और म्यूचुअल फंड की तरफ बढ़ रहे भारतीय, निवेश कर डाले ₹6.9 लाख करोड़ (फोटो AI जनरेटेड है)
HighLights
म्यूचुअल फंड में ₹5.13 लाख करोड़ का निवेश
सीधे शेयरों की बजाय SIP पर बढ़ा विश्वास
सोने-प्रॉपर्टी से वित्तीय संपत्तियों में बदलाव
नई दिल्ली| भारतीय परिवारों की बचत और निवेश की आदत तेजी से बदल रही है। अब लोग सीधे शेयर खरीदने की बजाय म्यूचुअल फंड, SIP और प्रोफेशनल निवेश विकल्पों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं। SEBI की नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वित्त-वर्ष 2025 (FY25) में भारतीय परिवारों (Indian Households Investment) ने सिक्योरिटीज मार्केट में कुल ₹6.91 लाख करोड़ का निवेश किया, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा म्यूचुअल फंड का रहा।
रिपोर्ट के मुताबिक, FY25 में परिवारों ने म्यूचुअल फंड में ₹5.13 लाख करोड़ का निवेश किया, जो FY23 के ₹1.66 लाख करोड़ के मुकाबले करीब तीन गुना है। इसका मतलब साफ है कि अब SIP भारतीय परिवारों की सेविंग का बड़ा जरिया बन चुकी है।
एक्सपर्ट बोले- अब मैच्योर हो रहे निवेशक
सैमको ग्रुप के फाउंडर और CEO जिमीत मोदी ने कहा कि,
इस रिपोर्ट का सबसे दिलचस्प आंकड़ा यह नहीं है कि लोगों ने कितना निवेश किया, बल्कि यह है कि भारतीय परिवार FY25 में ₹54,786 करोड़ के नेट सेलर रहे। यानी लोगों ने सीधे शेयर बेचकर मुनाफावसूली की, लेकिन नया पैसा म्यूचुअल फंड में डाला।"
उनके मुताबिक यह पीछे हटना नहीं बल्कि निवेशकों का मैच्योर होना है। अब रिटेल निवेशक सीधे स्टॉक चुनने की बजाय प्रोफेशनल फंड मैनेजर्स पर भरोसा कर रहे हैं।
रिपोर्ट बताती है कि FY24 में भी परिवारों ने सीधे इक्विटी में ₹69,329 करोड़ की बिकवाली की थी, जबकि FY25 में भी ₹54,786 करोड़ की नेट सेलिंग रही।
IPO-FPO में भी बढ़ा भारतीयों का निवेश
हालांकि, दूसरी तरफ प्राइमरी मार्केट यानी IPO, FPO और नए शेयर इश्यू में परिवारों का निवेश तेजी से बढ़ा। FY25 में इक्विटी में ₹95,139 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि FY24 में यह ₹46,879 करोड़ था। यानी लोग नए इश्यू में पैसा लगा रहे हैं, लेकिन सेकेंडरी मार्केट में मुनाफा बुक भी कर रहे हैं।
डेट मार्केट की बात करें तो FY25 में परिवारों ने डेट इंस्ट्रूमेंट्स में कुल ₹1.04 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश किया। इसमें प्राइमरी मार्केट के जरिए ₹22,400 करोड़ और सेकेंडरी मार्केट में ₹81,887 करोड़ का नेट निवेश शामिल है। FY24 के मुकाबले सेकेंडरी डेट निवेश में अच्छी बढ़त दिखी है।
यह भी पढ़ें- पेट्रोल का खेल खत्म! आ रहा 100% इथेनॉल, सरकार के इस बड़े फैसले से आधी हो जाएगी कीमत? कहां खुलेंगे फ्यूल स्टेशन
रीट्स और इनविट्स में बढ़ रही दिलचस्पी
REITs और InvITs जैसे नए निवेश विकल्पों में भी लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। FY25 में REITs में प्राइमरी मार्केट के जरिए ₹425 करोड़ और सेकेंडरी मार्केट में ₹437 करोड़ का निवेश हुआ। वहीं InvITs में प्राइमरी मार्केट के जरिए ₹783 करोड़ और सेकेंडरी मार्केट में ₹1,029 करोड़ का निवेश आया।
गोल्ड-प्रॉपर्टी से शिफ्ट हो रहे निवेशक- SEBI
SEBI की रिपोर्ट के मुताबिक पहले घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा सोना और रियल एस्टेट जैसे फिजिकल एसेट्स में जाता था, लेकिन अब धीरे-धीरे पैसा फाइनेंशियल एसेट्स की तरफ शिफ्ट हो रहा है। FY25 में घरेलू बचत में फाइनेंशियल सेविंग्स की हिस्सेदारी बढ़कर 33% तक पहुंच गई।
नई मेथडोलॉजी के तहत अब सिर्फ IPO और म्यूचुअल फंड ही नहीं, बल्कि REITs, InvITs, AIFs, सेकेंडरी मार्केट निवेश, प्राइवेट प्लेसमेंट और डेट मार्केट के वास्तविक डेटा को भी शामिल किया गया है। इससे पहली बार भारतीय परिवारों की असली निवेश तस्वीर सामने आई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस बदलाव से देश की ग्रॉस सेविंद से जीडीपी रेशियो FY25 में 34.94% पहुंच गई, जबकि पुरानी गणना पद्धति रहती तो यह 34.47% रहती। यानी सिर्फ नई गणना पद्धति की वजह से सेविंग रेट में 0.47% की बढ़ोतरी दिखी है। घरेलू बचत का GDP में हिस्सा भी FY25 में बढ़कर 21.7% पहुंच गया, जो पहले की गणना के हिसाब से 21.23% होता।
2025 तक म्यूचुलअ फंड और इक्विटी में कितना था फंड?
अगर कुल एसेट्स की बात करें तो FY25 तक भारतीय परिवारों के पास म्यूचुअल फंड में ₹44.39 लाख करोड़, इक्विटी में ₹88.91 लाख करोड़ और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में ₹6.23 लाख करोड़ की होल्डिंग थी। REITs में ₹11,441 करोड़ और InvITs में ₹12,643 करोड़ की होल्डिंग दर्ज की गई।
इस ट्रेंड का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब छोटे निवेशक SIP और म्यूचुअल फंड के जरिए प्रोफेशनल मैनेजमेंट, विविधता यानी डाइवर्सिफिकेशन और लंबे समय की वेल्थ क्रिएशन की तरफ बढ़ रहे हैं। इससे सीधे शेयरों में गलत फैसलों का जोखिम कम हो सकता है।
हालांकि नुकसान यह भी है कि बाजार में तेजी के दौरान सीधे शेयरों से मिलने वाले बड़े रिटर्न से कई निवेशक दूर हो सकते हैं। इसके अलावा म्यूचुअल फंड पूरी तरह बाजार जोखिम से मुक्त नहीं हैं। अगर बाजार गिरता है तो SIP निवेशकों पर भी असर पड़ सकता है।
यह रिपोर्ट दिखाती है कि भारतीय परिवार अब 'ट्रेडर' से 'इन्वेस्टर' बनने की तरफ बढ़ रहे हैं और SIP भारत की नई सेविंग मशीन बन चुकी है।
