Gold Silver Price Crash: सोने-चांदी में गिरावट के बीच अजय केडिया ने दिया नया टारगेट, 8 सवालों में बताई निवेश की रणनीति
Gold Silver Price Today: देश के सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज हुई, जिसके बाद सरकार ...और पढ़ें

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
नई दिल्ली| देश के सर्राफा बाजार में पिछले कुछ दिनों से जबरदस्त हलचल मची हुई है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देशवासियों से खास अपील, दूसरी तरफ सरकार द्वारा सोने-चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने का बड़ा फैसला और साथ ही आयात की अधिकतम सीमा 100 किलोग्राम तय करने के कदम ने बाजार की चाल बदल दी है।
इन फैसलों के बीच मंगलवार, 19 मई को सोने-चांदी में एक बार फिर गिरावट (Gold Silver Price Crash) दर्ज। MCX पर शाम 7.30 बजे तक सोना 0.23 फीसदी यानी 359 रुपए गिरावट (Gold Price Crash) के साथ 1,59,042 रुपए प्रति 10 ग्राम पर ट्रेड कर रहा था। इस दौरान इसका हाई लेवल 1,60,042 रुपए और लो लेवल 1,58,420 रुपए (Gold Price Today) रहा। पिछले दिन यह 1,59,401 रुपए पर क्लोज (Gold Rate Today) हुआ था।
वहीं चांदी में 2.40 फीसदी की भारी गिरावट दर्ज हुई। खबर लिखे जाने तक जुलाई डिलिवरी वाली चांदी 6648 रुपए गिरावट (Silver Price Crash) के साथ 2,70,003 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड (Silver Price Today) कर रही थी। ट्रेडिंग के दौरान चांदी का हाई लेवल 2,76,666 रुपए और लो लेवल 2,65,929 रुपए (Silver Rate Today) रहा। वहीं पिछले दिन यह 2,76,651 रुपए पर क्लोज हुई थी।
क्या सोने-चांदी में आने वाली है बड़ी गिरावट?
सोने-चांदी में इस बड़ी उठापटक के बीच आम खरीदार और निवेशक असमंजस में हैं कि क्या कीमती धातुओं में यह गिरावट जारी रहेगी या आगे कोई नया उछाल आने वाला है? इन तमाम सवालों और बाजार के पूरे गणित को समझने के लिए जागरण बिजनेस ने केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया से खास बातचीत की। जिसमें उन्होंने 8 सवालों में सोने-चांदी का पूरा गणित समझाया। लेकिन सबसे पहले समझते हैं कि आखिर आज सोने-चांदी के ताजा रेट हैं क्या?
सवाल 1: इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सोना-चांदी कितना महंगा हो गया? आम खरीदार को अब कितने रुपए ज्यादा देने पड़ेंगे?
अजय केडिया- सरकार ने पुरानी व्यवस्था को दोहराते हुए सोने और चांदी पर लगने वाली इफेक्टिव इंपोर्ट ड्यूटी को सीधे 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है। अगर हम इस ड्यूटी का पूरा ढांचा समझें, तो इसमें 10% बेसिक कस्टम ड्यूटी (BCD) होगी और इसके ऊपर 5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) जोड़ा गया है। यह कुल मिलाकर 15% बैठता है। इस बढ़ोतरी का सीधा और बड़ा असर आम बायर की जेब पर पड़ने वाला है। इसे सरल उदाहरण से समझें तो-
- 10 ग्राम सोना खरीदने पर: आज के बाजार भाव (करीब ₹1.60 लाख) के हिसाब से उपभोक्ता को करीब ₹14,000 से ₹15,000 तक अतिरिक्त चुकाने होंगे। इसी अनुपात में 1 ग्राम सोने पर लगभग ₹1,400 से ₹1,500 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।
- 1 किलो चांदी खरीदने पर: चूंकि चांदी बाजार में ₹3 लाख का भाव छू चुकी है, इसलिए इस नई ड्यूटी के कारण खरीदार को प्रति किलोग्राम ₹25,000 से ₹28,000 तक ज्यादा देने पड़ सकते हैं।
सवाल 2: भारत हर साल कितना सोना और चांदी इंपोर्ट करता है? सबसे ज्यादा सोना किन देशों से आता है और भारत दुनिया के सबसे बड़े गोल्ड इंपोर्टर्स में क्यों शामिल है?
अजय केडिया- भारत अपनी सोने की कुल जरूरत का लगभग पूरा हिस्सा विदेशों से आयात करके ही पूरा करता है। अगर हम इतिहास देखें तो साल 2012-13 में भारत ने लगभग 1000 टन सोना इंपोर्ट किया था। इसके बाद सरकार ने कड़े कदम उठाए और इन्वेस्टमेंट तथा कंजम्पशन गोल्ड को अलग-अलग श्रेणी में बांटा, जिससे यह आंकड़ा घटकर 600 से 650 टन के बीच आ गया था। साल 2021 में फिर से आयात बढ़कर 1070 टन तक पहुंच गया। वर्तमान में ड्यूटी अधिक होने के बावजूद हम हर साल औसतन 750 से 800 टन सोना सालाना इंपोर्ट कर रहे हैं।
अगर हम फाइनेंशियल ईयर 2026 की बात करें, तो भारत का कुल गोल्ड इंपोर्ट बिल करीब 72 बिलियन डॉलर को पार कर गया है। इसका सबसे बड़ा कारण सोने की बढ़ती कीमतें हैं। जो सोना 5 साल पहले ₹30,000-40,000 हुआ करता था, वह आज ₹1.60 लाख के स्तर पर है, जिससे वैल्यू के लिहाज से हमारा इंपोर्ट बिल बहुत भारी हो गया है।
और जहां तक सोना आयात करने वाले देशों की तो भारत सबसे ज्यादा करीब 40 फीसदी सोना स्विट्जरलैंड से आयात करता है। उसके बाद यूएई और फिर साउथ अफ्रीका व साउथ ईस्ट एशिया से सबसे ज्यादा सोना मंगाता है।
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सवाल 3: सरकार बार-बार सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी क्यों बढ़ाती है? क्या इसका मकसद केवल इंपोर्ट कम करना है या करंट अकाउंट डेफिसिट को कंट्रोल करना है?
अजय केडिया- इंपोर्ट ड्यूटी में बार-बार बदलाव करना सरकार के लिए एक नीतिगत टूल (Policy Tool) की तरह काम करता है। जब सरकार देखती है कि ड्यूटी ज्यादा होने से स्मगलिंग बढ़ रही है, तो टैक्स कम कर दिया जाता है (जैसा 2024 में हुआ था) और जब विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है, तो इसे बढ़ा दिया जाता है। पिछले 10 सालों में हमने ड्यूटी में कई बार कटौती और बढ़ोतरी देखी है।
इसका जो प्राथमिक और सबसे बड़ा लक्ष्य है, वह है करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को संतुलित रखना। किसी भी अर्थव्यवस्था के लिए सोने को एक डेड इन्वेस्टमेंट यानी निष्क्रिय निवेश माना जाता है। अगर देश कच्चा तेल आयात करता है तो गाड़ियां चलती हैं और इंडस्ट्री काम करती है। अगर फर्टिलाइज़र आता है तो अनाज का उत्पादन बढ़ता है। लेकिन जब हम सोना लाते हैं, तो वह सीधे लॉकर या घरों में बंद हो जाता है।
एक अनुमान के मुताबिक, पिछले 20-25 सालों से लगातार हो रहे आयात के कारण आज भारतीय घरों में लगभग 18,000 से 20,000 टन सोना पड़ा हुआ है, जबकि देश के मंदिरों में ही 3,000 से 4,000 टन सोना मौजूद है। यह विशाल वेल्थ देश की मुख्य अर्थव्यवस्था या सर्कुलेशन में काम नहीं आती, जिससे हमारा फॉरेक्स रिजर्व घटता है। इसलिए सरकार रुपये की स्थिरता और चालू खाता घाटे को संभालने के लिए इस टूल का उपयोग करती है।
सवाल 4: पीएम मोदी की अपील और ड्यूटी बढ़ने के बाद बाजार में सोना खरीदने की होड़ क्यों मच गई? क्या लोगों को डर है कि कीमतें और बढ़ेंगी?
अजय केडिया- सरकार के इस अचानक फैसले के बाद बाजार में एक तरह का फोमो (Fear of Missing Out यानी पीछे छूट जाने का डर) पैदा हो गया है। भारत में यह मनोविज्ञान काम करता है कि कीमतें गिरने पर तो खरीदारी आती ही है, लेकिन जब कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं, तो लोगों को लगता है कि कहीं सोना आगे और महंगा न हो जाए, इसलिए वे तुरंत खरीदारी करने दौड़ते हैं।
सामने शादियों का सीजन भी है, जिससे मांग को बल मिला है। यह सच है कि 15% ड्यूटी के कारण रिटेल मांग में तात्कालिक रूप से थोड़ी कमी आ सकती है, लेकिन यह मांग कभी शून्य नहीं हो सकती क्योंकि सोना हमारे सामाजिक और धार्मिक संस्कारों (Rituals) का हिस्सा है। लोग भाव देखकर नहीं, बल्कि अपनी जरूरत और सेंटीमेंट देखकर सोना खरीदते हैं। सप्लाई में आई रुकावटों और आगामी वेडिंग सीजन को देखते हुए कीमतों में तेजी का रुझान बना रहेगा और पैनिक बाइंग जारी रह सकती है।
सवाल 5: क्या आने वाले महीनों में सोना और महंगा हो सकता है? मई-जून 2026 तक सोने और चांदी का संभावित टारगेट प्राइस क्या हो सकता है?
अजय केडिया- साल 2026 सोने और चांदी के लिए एक ऐतिहासिक और उल्लेखनीय साल साबित हो रहा है। जनवरी में दोनों धातुओं ने नए रिकॉर्ड हाई बनाए, जबकि फरवरी में उम्मीद के मुताबिक कुछ प्रॉफिट बुकिंग और गिरावट देखी गई। लॉन्ग टर्म के नजरिए से देखें तो सोने-चांदी में तेजी की कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। कच्चे तेल और वैश्विक महंगाई पर नजर रखना जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार (International Market): शॉर्ट टर्म में सोना नीचे में $4400-$4500 और ऊपर में $5000 के दायरे में ट्रेड कर सकता है। एक बार जैसे ही अंतरराष्ट्रीय कीमतें $5000 प्रति औंस के पार निकलेंगी, हम सोने में एक बड़ी और नई तेजी देखेंगे।
घरेलू बाजार (Domestic Market): घरेलू स्तर पर रुपये की कमजोरी सोने की कीमतों को लगातार सपोर्ट देगी। अगर किसी भी पैनिक में सोना ₹1.40 लाख से ₹1.45 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आता है, तो वह खरीदारी का सबसे बेहतरीन मौका होगा। अगले दो-चार महीनों (मई-जून) में ऊपरी स्तर पर यह ₹1.70 लाख से ₹1.75 लाख के आसपास कंसोलिडेट कर सकता है, लेकिन असली बड़ी तेजी अक्टूबर के बाद शुरू होगी।
चांदी का आउटलुक (Silver Outlook): चांदी वर्तमान में 'प्राइस डिस्कवरी' के दौर से गुजर रही है क्योंकि यह एक कीमती धातु होने के साथ-साथ प्रमुख इंडस्ट्रियल मेटल भी है। इस साल हमने चांदी में ₹3 लाख से ₹4 लाख तक के स्तर देखे हैं। वर्तमान ड्यूटी और रुपये की स्थिति को देखते हुए यह शॉर्ट टर्म में ₹3.5 लाख प्रति किलोग्राम के आसपास रह सकती है।
औद्योगिक मांग में थोड़ी सुस्ती आ सकती है, लेकिन वैश्विक स्तर पर चांदी की सप्लाई में कमी (Supply Deficit) बनी हुई है, जिससे अक्टूबर के बाद यह भी नए रिकॉर्ड स्तर छू सकती है।
सवाल 6: क्या सोने पर ड्यूटी बढ़ाने से स्मगलिंग का खतरा भी बढ़ जाता है? क्या इस बार भी वैसा जोखिम है?
अजय केडिया- यह सरकार के लिए भी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है। जब भी टैरिफ या इंपोर्ट ड्यूटी एक सीमा से अधिक बढ़ाई जाती है, तो देश में सोने की अवैध एंट्री यानी स्मगलिंग की संभावना स्वतः बढ़ जाती है। साल 2022-23 में तो ऐसे हालात बन गए थे कि दुबई से आधिकारिक तौर पर सोना लाने और बेचने के मार्जिन से लोगों के आने-जाने के टूर का खर्च निकल आता था।
हालांकि, इस समय सरकारी एजेंसियों की चौकसी और सर्विलांस बेहद मजबूत है। हमें यह समझना होगा कि यह कदम सरकार ने किसी को परेशान करने के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक अनिश्चितता से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए उठाया है। हां, यह बात सच है कि ऊंची ड्यूटी स्मगलिंग करने वाले तत्वों को एक बड़ा 'इंसेंटिव' देती है। साल 2024 में इसी वजह से सरकार ने ड्यूटी घटाई थी ताकि अवैध कारोबार रुके। इस बार भी यह एक बड़ा चैलेंज रहेगा, लेकिन सरकार पूरी पैनी नजर रख रही है।
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सवाल 7: भारत में लोग आर्थिक अनिश्चितता के समय सोने की तरफ ज्यादा क्यों भागते हैं? क्या यह सिर्फ निवेश है या सामाजिक मानसिकता और परंपरा है?
अजय केडिया- भारत और सोने का संबंध सदियों पुराना है। ये दोनों साथ-साथ चलते हैं। रामायण काल में भी रावण की लंका सोने की थी और माता सीता को आकर्षित करने वाला हिरण भी सोने का था। हमारे संस्कारों में सोना इस कदर रचा-बसा है कि जिसे आज हम आधुनिक वित्तीय भाषा में SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) कहते हैं, वह हमारे यहां परंपरा के रूप में पहले से मौजूद है- जैसे साल में दो बार (अक्षय तृतीया और धनतेरस) सोना खरीदना अनिवार्य माना जाता है।
भारतीय संस्कृति में विवाह के समय मिलने वाले सोने को स्त्री धन (Women's Wealth) कहा जाता है, जो विपत्ति के समय एक अचूक इंश्योरेंस पॉलिसी की तरह काम करता है। हिंदू समाज में लोग सोना खरीदना तो जानते हैं, लेकिन उसे बेचना अशुभ मानते हैं।
सोना केवल बेहद बुरे दिनों में ही बेचा जाता है। यही कारण है कि भारतीयों के लिए सोना कभी भी सिर्फ एक फाइनेंशियल प्रोडक्ट नहीं रहा, बल्कि यह एक सामाजिक गरिमा, सुरक्षा और आस्था का प्रतीक है। इसीलिए आज भी 20,000 टन से ज्यादा सोना हमारे घरों में सुरक्षित है, क्योंकि यह पीढ़ी-दर-पीढ़ी वेल्थ ट्रांसफर करने का सबसे भरोसेमंद जरिया है।
सवाल 8: अगर कोई निवेश के लिए सोना खरीदना चाहता है, तो अभी फिजिकल गोल्ड सही रहेगा या अन्य विकल्प? निवेशकों के लिए क्या सलाह है?
अजय केडिया- पिछले 5 सालों में सोने को लेकर नजरिया बदला है और अब लोग इसे एक बेहतरीन फाइनेंशियल एसेट क्लास के रूप में देखने लगे हैं। निवेशकों को अब यह समझ आ चुका है कि जब-जब इक्विटी या शेयर बाजार में गिरावट आती है, सोना सबसे शानदार प्रदर्शन करता है। निवेश के लिए आज बाजार में कई बेहतरीन और सुरक्षित विकल्प मौजूद हैं-
- सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB): यह निवेश का एक बेहतरीन जरिया रहा है जहां सरकार की तरफ से 2.5% का वार्षिक ब्याज भी मिलता है और मैच्योरिटी पर कैपिटल गेन टैक्स पूरी तरह फ्री होता है।
- गोल्ड ETF (इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडेड फंड) और गोल्ड EGR (इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट): नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के माध्यम से इन्हें आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है। इनमें लिक्विडिटी बहुत अच्छी होती है।
- डिजिटल गोल्ड: हालांकि इस पर थोड़ी रेगुलेटरी क्लेरिटी कम है, लेकिन छोटे और नियमित निवेश के लिए यह एक अच्छा माध्यम है।
बाजार में मौजूदा उतार-चढ़ाव को देखकर पैनिक में आने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। निवेश का सबसे सही तरीका यह है कि आप फिजिकल गोल्ड के बजाय डिजिटल या पेपर फॉर्म में गोल्ड या सिल्वर में SIP (सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) शुरू करें। हर महीने ₹100, ₹500 या ₹1000 की छोटी-छोटी रकम से निवेश करें। इससे कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम एवरेज आउट (औसत) हो जाता है।
जब आपके पास पर्याप्त यूनिट्स हो जाएं, तो आप एक्सचेंज या ईजीआर के जरिए इसकी एक्चुअल डिलीवरी भी ले सकते हैं। लंबे समय के लिए सोना अभी भी बहुत सस्ता है। सेंट्रल बैंकों की लगातार हो रही खरीदारी और वैश्विक तनाव को देखते हुए अगले 1-2 साल तक सोने में मजबूती बरकरार रहेगी।
