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'ऑपरेशन सिंदूर' से लिया सबक! अब सेना को TATA की कंपनी सप्लाई करेगी ईरान के 'शाहेद' जैसे ड्रोन; दुश्मन का छूटेगा पसीना

Published: Thu, 09 Jul 2026 12:25 PM (IST)Updated: Thu, 09 Jul 2026 12:40 PM (IST)

भारतीय सेना ने 850 'वन-वे अटैक ड्रोन' खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है, जिसमें टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) सबसे ...और पढ़ें

टाटा देगी भारतीय आर्मी को वन-वे अटैक ड्रोन

टाटा देगी भारतीय आर्मी को वन-वे अटैक ड्रोन

HighLights

  1. सेना ने 850 'वन-वे अटैक ड्रोन' का ऑर्डर दिया

  2. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी

  3. ₹1500 करोड़ का ऑर्डर 'फास्ट-ट्रैक प्रोसेस' के तहत

नई दिल्ली। सेना ने सैकड़ों 'वन-वे अटैक ड्रोन' खरीदने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है और इन सिस्टम की सप्लाई के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी बनकर सामने आई है। यह 'फास्ट-ट्रैक प्रोसेस' के तहत ड्रोन की पहली बड़ी खरीद है, जिससे सेना को तेजी से ऑर्डर देने में मदद मिलती है और कॉन्ट्रैक्ट साइन होने के छह महीने के भीतर सप्लाई शुरू हो जाती है।
ट्रायल और कमर्शियल बिड ओपन करने के बाद टेक्निकल वैल्यूएशन में TASL सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी रही, और उसके बाद निबे डिफेंस का नंबर रहा। कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों के अनुसार, यह डील दोनों कंपनियों के बीच बांटी जाएगी, जिसमें टाटा 64% ऑर्डर की सप्लाई करेगी और निबे को 26% हिस्सा मिलेगा।

आधुनिक युद्ध का अहम हिस्सा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस ऑर्डर की वैल्यू लगभग ₹1500 करोड़ है और इसके तहत सेना के इस्तेमाल के लिए 850 ड्रोन सप्लाई किए जाएंगे। वन-वे अटैक ड्रोन या 'लोइटरिंग म्यूनिशन' (जो लॉन्च होने पर टार्गेट पर अटैक करके खुद भी नष्ट हो जाते हैं, जैसे कि ईरान का शाहेद ड्रोन) आधुनिक युद्ध का एक अहम हिस्सा बन गए हैं। इन सिस्टम्स ने यूक्रेन-रूस युद्ध और पश्चिम एशिया के संघर्ष के दौरान भारी तबाही मचाई है।

ऑपरेशन सिंदूर से लिए अनुभव

सेना जो कम लागत वाले सिस्टम खरीद रही है, उन्हें 'ऑपरेशन सिंदूर' से मिले अनुभवों के आधार पर इस तरह से डिजाइन किया गया है कि वे जैमिंग और स्पूफिंग से सुरक्षित रहें। इन सिस्टम्स का मुश्किल हालात में बड़े पैमाने पर ट्रायल किया गया, जिसमें टेक-ऑफ के समय से ही जैमिंग वाला माहौल भी शामिल रहा।
इन ड्रोन्स का काम सीमा के उस पार दुश्मन की आर्टिलरी पोजीशन को नष्ट करना होगा।

सेना को हजारों ड्रोन्स की जरूरत

अभी भले ही 850 सिस्टम का ऑर्डर साइन किया गया हो, लेकिन सेना को ऐसे हजारों ड्रोन्स की जरूरत है और आने वाले महीनों में और ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। 'वन-वे अटैक ड्रोन' (एक बार हमला करने वाले ड्रोन) के लिए कई बड़े ऑर्डर पर अभी काम चल रहा है, जिनमें ऐसे सिस्टम भी शामिल हैं जो 1500 किलोमीटर से ज़्यादा दूर के टार्गेट पर हमला कर सकते हैं।

अब फोकस इन सिस्टम की डिलीवरी पर रहेगा, क्योंकि 'फास्ट ट्रैक प्रोसीजर' में समय-सीमा का सख्ती से पालन करना जरूरी है और देरी होने पर भारी जुर्माना लग सकता है।

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