एग्री सेक्टर में पैदावार, वैल्यू एडिशन और प्रोसेसिंग बढ़ाने को लेकर भारत का बड़ा कदम! घाना के साथ MoU साइन, टमाटर से होगी शुरुआत
भारत और घाना ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में सहयोग बढ़ाने के लिए 5 साल के समझौता ज्ञापन ...और पढ़ें

भारत और घाना के बीच कृषि क्षेत्र से जुड़ा समझौता
HighLights
भारत-घाना ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण हेतु MoU किया।
समझौता ज्ञापन 5 साल के लिए, टमाटर अनुसंधान पर प्रारंभिक ध्यान।
कटाई के बाद के नुकसान कम करने, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| भारत इन दिनों विदेशी देशों से व्यापार और डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग के प्रोडक्शन को बढ़ाने पर जोर दे रहा है। अब भारत और घाना ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), नई दिल्ली और घाना के क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट (CSIR-CRI), अकरा के बीच MoU पर साइन किए गए हैं।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, यह समझौता दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) और भारत-अफ्रीका साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है। समझौते पर हस्ताक्षर के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और घाना के विदेश मंत्री सैमुअल ओकुडजेटो अब्लाक्वा भी मौजूद रहे।
पांच साल तक चलेगा सहयोग कार्यक्रम
यह समझौता पांच सालों के लिए किया गया है। इसके तहत दोनों देश संयुक्त कृषि रिसर्च सेंटर, वैज्ञानिक और टेक्नोलॉजी का ट्रांसफर, कैपासिटी बिल्डिंग और एग्री टेक के कॉमर्शियलाइजेशन पर मिलकर काम करेंगे।
इस सहयोग को घाना की कंपनी Arima Farms Ltd. ने आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कंपनी को कुछ रिसर्च और व्यावसायीकरण एक्टिविटी के लिए CSIR-CRI का बिजनेस पार्टनर बनाया गया है।
टमाटर रिसर्च से होगी शुरुआत
दोनों देशों के सहयोग के पहले फेज में सब्जी फसलों, खासकर टमाटर के रिसर्च और विकास पर ध्यान दिया जाएगा। ICAR घाना में हाई प्रोडक्शन वाली टमाटर की किस्मों और उन्नत कृषि तकनीकों को बढ़ावा देने में मदद करेगा, जिससे वहां घरेलू टमाटर उत्पादन बढ़ाया जा सके।
वैल्यू चेन और स्टोरेज मजबूत करने पर जोर
समझौते के तहत कसावा, याम और अन्य कंद फसलों के प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन पर भी काम किया जाएगा। इसका उद्देश्य एग्री वैल्यू चेन को मजबूत करना और किसानों की आय बढ़ाना है। इसके अलावा, फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने के लिए कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रिजरेटेड परिवहन, सॉर्टिंग, ग्रेडिंग और प्रोसेसिंग तकनीकों पर तकनीकी सहयोग और ट्रेनिंग दी जाएगी।
वैज्ञानिकों और जर्मप्लाज्म का होगा एक्सचेंज
MoU के तहत दोनों देशों के वैज्ञानिकों और तकनीकी विशेषज्ञों का आदान-प्रदान किया जाएगा। साथ ही जर्मप्लाज्म, प्रजनन सामग्री, वैज्ञानिक जानकारी, रिसर्च मेथड और तकनीकी ज्ञान को साझा किया जाएगा। दोनों देशों के शोध संस्थानों के बीच दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करने पर भी जोर रहेगा।
संयुक्त कार्य समूह करेगा निगरानी
इस सहयोग की निगरानी ICAR और CSIR-CRI के प्रतिनिधियों वाले संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Group) द्वारा की जाएगी। यह समूह समय-समय पर नई दिल्ली और अकरा में बैठक कर परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेगा और आगे की दिशा तय करेगा।
कृषि मंत्रालय का मानना है कि यह साझेदारी कृषि अनुसंधान, तकनीक विकास, क्षमता निर्माण और व्यावसायिक उपयोग के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करेगी। इससे घाना में टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा मिलेगा, कृषि उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों की आजीविका मजबूत होगी।
