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वित्त मंत्रालय का आउटलुक: महंगाई बनी चुनौती, लेकिन दूसरी तिमाही में 7.35% GDP ग्रोथ का अनुमान

By राजीव कुमारEdited By: Gyanendra Tiwari
Published: Thu, 29 Oct 2026 08:29 PM (IST)

वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में भारत की जीडीपी वृद्धि दर 7.35% रहने का अनुमान लगाया ...और पढ़ें

दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.35% रहने का अनुमान।

दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.35% रहने का अनुमान।

HighLights

  1. दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.35% रहने का अनुमान।

  2. कच्चे तेल और अल-नीनो से महंगाई बढ़ने की आशंका।

  3. घरेलू मांग मजबूत, वैश्विक एजेंसियां भी विकास दर बढ़ा रही हैं।

राजीव कुमार, नई दिल्ली। वित्त मंत्रालय का कहना है कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और अल-नीनो असर के कारण महंगाई बढ़ सकती है। वर्तमान हालात में वैश्विक स्तर पर महंगाई बढ़ रही है और घरेलू स्तर पर भी नीति निर्धारकों को वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी छमाही में मूल्य स्थिरता पर फोकस करने की जरूरत है।

इन सबके बावजूद भारत की घरेलू मांग मजबूत दिख रही है और औद्योगिक उत्पादन एवं निर्यात का प्रदर्शन बेहतर दिख रहा है। भारत की वित्तीय स्थिति मजबूत बनी हुई है और निवेश की गति भी कायम है।

वित्त मंत्रालय ने कितना लगाया GDP ग्रोथ का अनुमान

ऐसे में वित्त मंत्रालय ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में जीडीपी विकास दर 7.35 प्रतिशत (India GDP Growth Rate) रहने का अनुमान लगाया है। पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर 7.8 प्रतिशत थी।

विश्व बैंक से लेकर आईएमएफ जैसी सभी वैश्विक एजेंसियों ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर के अनुमान को बढ़ाते हुए सात प्रतिशत या उससे अधिक कर दिया है। गुरुवार को जारी वित्त मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कच्चे तेल के बढ़ते दाम और खरीफ फसल को लेकर अनिश्चितता के बीच आर्थिक गतिविधियों की गति को कायम रखना चुनौती भरा है और नीति निर्धारकों को इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

सितंबर में कितनी रही महंगाई दर

सितंबर में खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत पर पहुंच गई है और खाद्य महंगाई दर सात प्रतिशत को पार कर गई है। दुनिया के अन्य सेंट्रल बैंकों की तरह भारतीय रिजर्व बैंक ने भी महंगाई पर काबू के लिए रेपो रेट में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका से लेकर यूरोप और चीन जैसे सभी देश महंगाई की मार झेल रहे हैं।

अमेरिका और यूरोप में कैसी है महंगाई

अमेरिका की महंगाई दर इस साल जनवरी में 2.4 प्रतिशत थी जो सितंबर में बढ़कर 3.7 प्रतिशत हो गई। यूरोप में महंगाई दर पिछले छह माह में 1.7 प्रतिशत से बढ़कर 3.8 प्रतिशत हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक भारत में खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर ज्यादा चिंता का विषय है क्योंकि इससे मांग प्रभावित होती है। खाद्य वस्तु में प्याज, चीनी और खाद्य तेल के दाम अधिक चल रहे हैं। त्योहारी सीजन में चीनी के दाम बढ़ सकते हैं।

खाद्य तेल के दाम को नियंत्रित करने के लिए सरकार की तरफ से आयातित खाद्य तेल के सीमा शुल्क में कटौती की गई है और उसका असर अगले माह से दिख सकता है। विश्व बैंक ने वैश्विक विकास दर के अनुमान में भी 0.1 प्रतिशत का इजाफा किया है।

वर्ष 2026 के लिए वैश्विक विकास दर 3.1 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया था। विकसित देशों की विकास दर के अनुमान में 0.4 प्रतिशत का इजाफा किया गया है जबकि भारत की विकास दर अनुमान में 0.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

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