हथियारों के ग्लोबल मार्केट में भारत का भौकाल: यूरोप को भाए स्वदेशी गोले-बारूद, $872 मिलियन का हुआ महा-निर्यात
यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद भारत यूरोपीय देशों को गोला-बारूद का एक प्रमुख निर्यातक बनकर उभरा है, जिसने $872 मिलियन मूल्य के हथियार बेचे हैं।

यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप को $872 मिलियन का निर्यात।
HighLights
यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोप को $872 मिलियन का निर्यात।
भारत यूरोप को हथियार बेचने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश।
गोला-बारूद निर्यात में 1600% की भारी वृद्धि दर्ज।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत विश्व की सबसे तेजी से उभरती हुई अर्थव्यवस्था है। यही कारण है कि आज दुनिया के अलग-अलग देशों में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं का बोलबाला है। भारत में बने गोला-बारूद यूरोपीय देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यूक्रेन-रूस युद्ध शुरू होने के बाद से भारत, यूरोप को गोला-बारूद और अन्य हथियारों के एक बड़े निर्यातक के रूप में उभरा है।
भारत में बने हथियार अब दूसरे देशों की सीमआों पर अपनी ताकत दिखा रहे हैं। ब्लूमबर्ग ने भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय से प्राप्त 'ट्रेड डेटा मॉनिटर' के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से, भारतीय हथियार निर्माताओं ने यूरोपीय देशों को लगभग 872 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का गोला-बारूद निर्यात किया है। निर्यात किए गए सामनों में आर्टिलरी शेल, मोर्टार शेल, प्रोपेलेंट और विस्फोटक भी शामिल हैं।
यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला भारत तीसरा सबसे बड़ा देश
भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि 'रीआर्म यूरोप' पहल के तहत, भारत यूरोप को हथियार निर्यात करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश बन गया है। इसका मुख्य कारण गोला-बारूद की भारी मांग है।
फरवरी 2022 से पहले के चार वर्षों में यूरोप को 49.2 मिलियन अमेरिकी डॉलर के हथियारों का निर्यात किया गया था। इस हिसाब से इसमें 1600 फीसदी का इजाफा हुआ है।
आयात और निर्यात आंकड़ों से पता चलता है कि भारत चार वर्षों में यूरोप में गोले, मोर्टार, प्रणोदक और विस्फोटकों के दूसरे सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थान पर है, जो पिछले चार वर्षों में 28 वें स्थान से ऊपर है।
भारत को यूरोप में मजबूत करनी होगी पकड़
दिल्ली स्थित सुरक्षा थिंक टैंक 'इंडिक रिसर्चर्स फोरम' में रणनीतिक जुड़ाव और साझेदारी के निदेशक श्रीनिवासन बालकृष्णन का कहना है कि यूरोप के हथियारों के जखीरे को फिर से बढ़ाने के प्रयासों ने भारत को एक ऐसे बाजार में प्रवेश का मौका दिया है, जिस पर पहले से स्थापित आपूर्तिकर्ताओं का दबदबा है। हालांकि, वहां अपनी जगह स्थायी रूप से बनाए रखने के लिए केवल गोला-बारूद की कमी को पूरा करना ही काफी नहीं होगा।
