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173 साल पुराना है भारत का ये रेलवे स्टेशन, बनाने में खर्च हुए थे 5000000000! यहीं से चली थी पहली ट्रेन

Published: Mon, 12 Oct 2026 05:46 PM (IST)

मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) भारत के सबसे पुराने रेलवे स्टेशनों में से एक है, जिसका इतिहास 1853 में देश की पहली ट्रेन चलने से जुड़ा है।

ये है भारत का पहला रेलवे स्टेशन

ये है भारत का पहला रेलवे स्टेशन

HighLights

  1. भारत की पहली ट्रेन 1853 में बोरी बंदर से शुरू हुई।

  2. CSMT भारत के सबसे पुराने और ऐतिहासिक स्टेशनों में से एक।

  3. ब्रिटिश वास्तुकार फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस ने स्टेशन को डिजाइन किया।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारत में पहली ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को पटरी पर दौड़ी थी। मुंबई के बोरी बंदर से ठाणे के बीच करीब 34 किलोमीटर का सफर तय करने वाली इस ट्रेन में लगभग 400 यात्री सवार थे। अंग्रेजों के दौर में शुरू हुआ भारतीय रेलवे का सफर आज दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में शामिल हो चुका है। रेलवे के इस लंबे इतिहास में कई ऐसी कहानियां छिपी हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। इन्हीं में से एक कहानी देश के सबसे पुराने रेलवे स्टेशनों में शामिल मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) की भी है।

करीब 172 साल पुराने इस स्टेशन की खासियत यह है कि इतने लंबे समय बाद भी यहां से रोजाना बड़ी संख्या में ट्रेनें चलती हैं और हजारों यात्री सफर करते हैं। इसकी ऐतिहासिक इमारत और शानदार वास्तुकला लोगों को इतना आकर्षित करती है कि कई लोग यहां सिर्फ घूमने और तस्वीरें खिंचवाने के लिए भी पहुंचते हैं।

भारत के सबसे पुराने रेलवे स्टेशन का दिलचस्प किस्सा

भारतीय रेलवे ने अंग्रेजों के शासन से लेकर देश की आजादी और आधुनिक भारत तक का सफर देखा है। इस दौरान रेलवे के इंजन, ट्रेनों और स्टेशनों में काफी बदलाव आया, लेकिन मुंबई का यह ऐतिहासिक स्टेशन आज भी अपनी खास पहचान बनाए हुए है।

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) को ब्रिटिश वास्तुकार फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस (Frederick William Stevens) ने डिजाइन किया था। इस टर्मिनस पर कुल 18 प्लेटफॉर्म हैं जिसमें 11 मुख्य लाइन और 8 अन्य लोकल ट्रेन प्लेटफॉर्म शामिल हैं।

कहां है भारत का सबसे पुराना रेलवे स्टेशन?

मुंबई में स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (Chhatrapati Shivaji Maharaj Terminus) को देश के सबसे पुराने और ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों (india's oldest railway station) में गिना जाता है। इसका इतिहास साल 1853 में शुरू हुए भारतीय रेलवे के सफर से जुड़ा है। उस दौर में बोरी बंदर से ठाणे के बीच पहली यात्री ट्रेन चलाई गई थी।

इस स्टेशन के निर्माण और विकास के अलग-अलग चरणों में बदलाव होते रहे। आज भी यहां से देश के कई हिस्सों के लिए ट्रेनें चलती हैं। भाप के इंजनों के दौर से लेकर आधुनिक ट्रेनों तक का सफर इस स्टेशन ने अपनी आंखों से देखा है।

बोरी बंदर से शुरू हुआ था सफर

भारत में पहली यात्री ट्रेन मुंबई के बोरी बंदर से ठाणे के लिए रवाना हुई थी। बोरी बंदर मुंबई की एक जगह का नाम था और इसी के नाम पर शुरुआती रेलवे स्टेशन को भी जाना जाता था। 16 अप्रैल 1853 को शुरू हुई इस ट्रेन ने भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नए दौर की शुरुआत की। इसके बाद रेलवे नेटवर्क का लगातार विस्तार हुआ और मुंबई के इस स्टेशन ने भी समय के साथ नया रूप लिया।

साल 1888 में स्टेशन के पुनर्निर्माण का काम हुआ। बाद में इसकी जगह एक भव्य इमारत बनाई गई, जिसे विक्टोरिया टर्मिनस नाम (victoria terminus) दिया गया। यह नाम ब्रिटेन की महारानी विक्टोरिया के सम्मान में रखा गया था। इसके साथ ही बता दें कि उस समय इस स्टेशन का निर्माण लगभग ₹1,614,000 (करीब 16.14 लाख रुपये) की लागत से हुआ था। उस समय यह लगभग 260,000 पाउंड (ब्रिटिश पाउंड) के बराबर था। आज के समय में महंगाई दर के हिसाब से इसकी कीमत लगभग 500-600 करोड़ है। 

कई बार बदला स्टेशन का नाम

आजादी के बाद भी इस स्टेशन के नाम में बदलाव का सिलसिला जारी रहा। साल 1996 में इसका नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस कर दिया गया। इसके बाद साल 2017 में इसका नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) कर दिया गया। आज यह इसी नाम से जाना जाता है।

आज भी देश की रेल व्यवस्था का अहम हिस्सा

मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस आज भी देश के प्रमुख रेलवे स्टेशनों में शामिल है। यहां से मुंबई के अलग-अलग हिस्सों के लिए लोकल ट्रेनें चलती हैं, वहीं लंबी दूरी की ट्रेनें भी यात्रियों को देश के कई शहरों से जोड़ती हैं। रोजाना बड़ी संख्या में यात्री इस स्टेशन से सफर करते हैं।

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