ऊर्जा संकट के बीच पड़ोसी मुल्कों की मददगार बनी भारतीय कंपनियां, जिन्होंने 'आंखें' दिखाई उन्हें भी भेज रही हेल्प
ईरान-अमेरिका संघर्ष से उपजे वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत अपने पड़ोसी देशों के लिए मददगार बनकर उभरा है। विदेश ...और पढ़ें

HighLights
वैश्विक ऊर्जा संकट में भारत पड़ोसी देशों का मददगार बना।
बांग्लादेश, श्रीलंका को भारत ने पेट्रोलियम उत्पाद आपूर्ति किए।
नेपाल, भूटान, मालदीव से ऊर्जा सहयोग पर बातचीत जारी।
नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका (Iran-US War) में जंग से पूरी दुनिया परेशान है, क्योंकि कच्चे तेल (Crude Oil Prices) की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और सप्लाई बुरी तरह बाधित हुई है। ऐसे में बड़े देशों में जहां ऊर्जा संकट (Energy Crisis) गहरा रहा है तो छोटे-छोटे देशों में रोजी-रोटी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। इस मुश्किल वक्त में भारत फिर से अपने पड़ोसी मुल्कों के लिए मददगार साथी बना है। नई दिल्ली में 2 अप्रैल को विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहम जानकारी दी है। फॉरेन मिनिस्ट्री के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, हमने बांग्लादेश और श्रीलंका को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति की है, साथ ही नेपाल व भूटान के साथ भी हमारा संपर्क बना हुआ है।
#WATCH | Delhi: MEA spokesperson Randhir Jaiswal says, "On Bangladesh, we continue to supply energy requirements to them since 2007... We have also recently supplied 38,000 metric tons of petroleum products to Sri Lanka, based on their request. We have ongoing engagement with… pic.twitter.com/GiTZ5NVsSC
— ANI (@ANI) April 2, 2026
भारत सरकार ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता, रणधीर जायसवाल ने कहा, "बांग्लादेश के संबंध में, हम 2007 से उन्हें ऊर्जा आपूर्ति जारी रखे हुए हैं... हमने हाल ही में श्रीलंका के अनुरोध पर उन्हें 38,000 मीट्रिक टन पेट्रोलियम उत्पाद की आपूर्ति की है। नेपाल और भूटान के साथ हमारा निरंतर संपर्क बना हुआ है। मालदीव सरकार ने भी अल्पकालिक और दीर्घकालिक आधार पर पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति के लिए हमसे संपर्क किया है। इन अनुरोधों की जांच हमारी अपनी उपलब्धता और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए की जा रही है।"
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बता दें कि ऊर्जा संकट के चलते पाकिस्तान समेत अन्य छोटे देशों में हाहाकार मचा हुआ है। पहले से महंगाई से जूझ रहे इन देशों में पेट्रोल-डीजल व रसोई गैस की किल्लत के चलते ईंधन की कीमतें आसमान पर पहुंच गई है और खाने-पीने की चीजों के दाम और तेजी से बढ़े हैं।
