अब गन्ने से नहीं बनेगा इथेनॉल? सरकार ने 2026-27 के लिए तय किया जीरो डायवर्जन, चीनी की सप्लाई बनाए रखने के लिए नया प्लान
सरकार ने 2026-27 के लिए गन्ने से इथेनॉल उत्पादन पर रोक लगा दी है ताकि घरेलू चीनी की उपलब्धता बढ़े और कीमतें नियंत्रित रहें।
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E20 को लेकर नया प्लान
HighLights
गन्ने से इथेनॉल उत्पादन पर 2026-27 के लिए सरकार ने लगाई रोक।
घरेलू चीनी की उपलब्धता बढ़ाने, कीमतों पर दबाव कम करने हेतु।
मक्का और टूटे चावल से इथेनॉल उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| चीनी की सप्लाई और आपूर्ति की चिंताओं के बीच भारत सरकार ने 2026-27 के इथेनॉल सप्लाई वर्ष के लिए गन्ने से बनने वाली चीनी को इथेनॉल प्रोडक्शन में इस्तेमाल करने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। सरकारी तेल कंपनियों ने अपने नए टेंडर में गन्ने के रस, चीनी सिरप और बी-हेवी शीरे से बनने वाले इथेनॉल की खरीद के लिए बोली नहीं मांगी है। न्यूज एजेंसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने यह कदम घरेलू चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने की कोशिश के लिए उठाया है।
तेल कंपनियों ने नवंबर 2026 से शुरू होने वाले सप्लाई ईयर के लिए 11 अरब लीटर इथेनॉल की खरीद के लिए टेंडर जारी किया है। इसमें मक्का, टूटे चावल और भारतीय खाद्य निगम (FCI) से खरीदे गए एक्स्ट्रा चावल से बनने वाले इथेनॉल के उत्पादक बोली लगा सकते हैं।
चीनी उत्पादन बढ़ाने पर सरकार का जोर
भारत दुनिया में चीनी की सबसे ज्यादा खपत करने वाले देशों में शामिल है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार को लेकर चिंता बढ़ी है। इससे घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव बना हुआ है। सरकार पिछले कई सालों से अतिरिक्त चीनी का इस्तेमाल इथेनॉल उत्पादन में करके पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य हासिल करने की कोशिश कर रही थी। लेकिन अब चीनी को इथेनॉल उत्पादन से अलग रखने का फैसला बताता है कि सरकार को तेल आयात घटाने के लक्ष्य के साथ घरेलू चीनी की उपलब्धता के बीच संतुलन बनाना पड़ रहा है।
मक्का से इथेनॉल बनाने पर भी बदली कीमत
न्यूज एजेंसी के मुताबिक नए टेंडर में मक्का से बनने वाले इथेनॉल की खरीद कीमत में भी कटौती की गई है। इसकी कीमत ₹71.86 प्रति लीटर से घटाकर ₹68.86 प्रति लीटर कर दी गई है। इसके साथ मक्का आधारित इथेनॉल के लिए इन्सेंटिव राशि ₹5.79 से घटाकर ₹2.79 प्रति लीटर कर दी गई है।
इस बदलाव का असर मक्का उत्पादकों, इथेनॉल बनाने वाली कंपनियों और मक्का की इंडस्ट्रियल मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि तेल कंपनियां कितनी मात्रा में मक्का आधारित इथेनॉल खरीदती हैं और उत्पादकों की लागत कितनी रहती है।
चीनी और इथेनॉल के बीच संतुलन बनाने की चुनौती
भारत ने इस साल पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल ब्लेंडिंग यानी E20 को देश भर का मानक बनाया है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता घटाना और प्रदूषण कम करना है। हालांकि, कुछ वाहन चालकों ने पुराने वाहनों में E20 के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है। सरकार के सामने अब चुनौती है कि पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य पूरा करने के लिए पर्याप्त इथेनॉल उपलब्ध रहे, जबकि चीनी की घरेलू आपूर्ति भी प्रभावित न हो।
किसानों और एग्री-बिजनेस पर क्या होगा असर?
इस फैसले से इथेनॉल प्रोडक्शन के लिए मक्का और एक्स्ट्रा चावल की मांग को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन मक्का आधारित इथेनॉल की खरीद कीमत घटने से उत्पादकों के मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। दूसरी ओर चीनी मिलों को गन्ने के रस और शीरे से इथेनॉल बनाने के बजाय चीनी उत्पादन पर ज्यादा ध्यान देना पड़ सकता है।
न्यूज एजेंसी की मानें तो किसानों के लिए इसका असर गन्ने और मक्का की मांग, फसल की कीमतों तथा स्थानीय खरीद व्यवस्था पर निर्भर करेगा। इसलिए आने वाले महीनों में तेल कंपनियों की खरीद, इथेनॉल प्लांटों की क्षमता और चीनी मिलों के उत्पादन संबंधी फैसलों पर नजर रखना जरूरी होगा।
