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चीनी की किल्लत के बीच एथेनॉल उत्पादन पर सरकार का कड़ा एक्शन! गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे पर क्या नियम बना?

Published: Fri, 23 Oct 2026 11:21 AM (IST)

सरकार ने चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी है।

एथनॉल सप्लाई ईयर के लिए नया नियम

एथनॉल सप्लाई ईयर के लिए नया नियम

HighLights

  1. गन्ने के रस से एथेनॉल उत्पादन पर रोक।

  2. घरेलू चीनी उपलब्धता बनाए रखने को उठाया कदम।

  3. कच्ची चीनी आयात की समयसीमा बढ़ाई गई।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| देश में चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने एथेनॉल सप्लाई ईयर 2026-27 में गन्ने के रस, सिरप और बी-हेवी शीरे (B-Heavy Molasses) से एथेनॉल बनाने पर रोक लगा दी है। खाद्य मंत्रालय ने गुरुवार को सभी चीनी मिलों और डिस्टिलरी को पत्र लिखकर इस फैसले की जानकारी दी। सरकार ने चीनी उत्पादक राज्यों के संबंधित विभागों को भी निर्देश दिया है कि वे इस आदेश का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें।

एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2026-27 नवंबर 2026 से अक्टूबर 2027 तक चलेगा। मंत्रालय के मुताबिक, इस अवधि में चीनी को एथेनॉल प्रोडक्शन के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होगी। राज्यों के उत्पाद शुल्क विभागों से कहा गया है कि वे संबंधित यूनिट्स को जरूरी निर्देश जारी करें और निगरानी करें, ताकि गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल का उत्पादन न हो।

चीनी की कमी के चलते लिया फैसला

सरकार का यह कदम ऐसे समय आया है, जब देश में चीनी की घरेलू उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है। भारत को दुनिया के सबसे बड़े चीनी उत्पादक देशों में गिने जाने के बावजूद भी पिछले चीनी सीजन 2025-26 में भी कमी की स्थिति का सामना करना पड़ा था और 2026-27 में भी ऐसी आशंका जताई जा रही है।

पिछले सीजन में सरकार ने 15 लाख टन चीनी के एक्सपोर्ट की अनुमति देने के बाद एक्सपोर्ट पर रोक लगा दी थी। इसके अलावा, अगस्त 2026 में 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की अनुमति दी गई थी। हालांकि, इसके लिए करीब 8 लाख टन के इंपोर्ट परमिट जारी किए गए।

अब विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने इन आयात परमिट की वैधता 31 अक्टूबर 2026 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 कर दी है। इसके तहत कच्ची चीनी के आयात के लिए तय समयसीमा बढ़ाई गई है, जबकि नॉटिफिकेशन की अन्य शर्तें पहले की तरह लागू रहेंगी।

कारोबारियों ने छोड़ा 3-4 लाख टन का आयात कोटा

उद्योग से जुड़े मीडिया सूत्रों के मुताबिक, घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में कमी आने के बाद इंपोर्ट की लागत और डोमेस्टिक मार्केट की कीमतों के बीच अंतर कम हो गया है। इस वजह से अब तक इंपोर्ट नहीं हो पाया है। मीडिया सूत्रों का कहना है कि कारोबारियों ने करीब 3-4 लाख टन चीनी का आयात कोटा वापस कर दिया है। हालांकि, इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

महाराष्ट्र में 70 मिलों में पेराई शुरू

महाराष्ट्र में करीब 70 चीनी मिलों ने कम रिकवरी के बावजूद गन्ने की पेराई शुरू कर दी है। मौजूदा सीजन में अब तक करीब 1.25 लाख टन चीनी का उत्पादन होने की जानकारी दी गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने मिलों को अक्टूबर और नवंबर के दौरान प्रोड्यूस होने वाली चीनी को बिना अलग अनुमति के बेचने की छूट दी है। यह मात्रा उनके नियमित मासिक बिक्री कोटे से अतिरिक्त होगी।

हालांकि, कारोबारियों का कहना है कि अक्टूबर में मिलें पिछले सीजन के बचे हुए स्टॉक से भी चीनी बेच रही हैं। पिछला चीनी सीजन 30 सितंबर 2026 को समाप्त हुआ था। उस समय देश में चीनी का शुरुआती स्टॉक करीब 32-35 लाख टन बताया गया था। ऐसे में नवंबर के लिए बिक्री कोटा तय करते समय अक्टूबर में हुए प्रोडक्शन और बिक्री को ध्यान में रखना होगा।

उत्तर प्रदेश में पेराई शुरू होने में देरी

उत्तर प्रदेश में गन्ने की पेराई शुरू होने में देरी भी चीनी की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ मिलें गन्ने से चीनी की रिकवरी 7 प्रतिशत से भी कम रहने की आशंका के कारण पेराई शुरू करने से बच रही हैं। कम रिकवरी होने पर मिलों की लागत बढ़ सकती है और मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है। सरकार मिलों को पेराई शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन कम रिकवरी की आशंका के कारण मिल संचालक आर्थिक नुकसान से बचने के लिए सतर्क हैं।

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चीनी की घरेलू उपलब्धता बनाए रखने के लिए सरकार एक ओर चीनी को एथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल करने पर रोक लगा रही है, वहीं दूसरी ओर कच्ची चीनी के आयात की समयसीमा बढ़ाकर बाजार में आपूर्ति बढ़ाने की कोशिश कर रही है।