सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

BJP सरकार के खाते से किसने उड़ाए ₹590 करोड़? चंडीगढ़ से मुंबई तक हड़कंप, फॉरेंसिक ऑडिट की तैयारी

Published: Sun, 22 Feb 2026 10:25 AM (IST)Updated: Sun, 22 Feb 2026 10:31 AM (IST)

IDFC फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ ब्रांच में हरियाणा सरकार के अकाउंट से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है।

IDFC फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खाते से 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड, कर्मचारियों पर लगा आरोप

IDFC फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के खाते से 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड, कर्मचारियों पर लगा आरोप

HighLights

  1. IDFC फर्स्ट बैंक में 590 करोड़ रुपये का फ्रॉड।

  2. हरियाणा सरकार के अकाउंट से हुई धोखाधड़ी, कर्मचारी शामिल।

  3. बैंक ने पुलिस शिकायत दर्ज की, फोरेंसिक ऑडिट जारी।

नई दिल्ली। IDFC फर्स्ट बैंक में हरियाणा सरकार के अकाउंट में धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। बैंक ने रिपोर्ट किया कि चंडीगढ़ की एक ब्रांच में हरियाणा सरकार के अकाउंट से जुड़ी 590 करोड़ रुपये (IDFC FIRST Bank Fraud Case) की बिना इजाजत और धोखाधड़ी वाली गतिविधि पाई गई।

IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि उसकी चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारी हरियाणा सरकार से जुड़े अकाउंट से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में शामिल थे।

बैंक कर्मचारी धोखाधड़ी में शामिल

IDFC फर्स्ट बैंक ने कहा कि उसकी चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारी हरियाणा सरकार से जुड़े अकाउंट से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में शामिल थे।

बैंक ने स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग के जरिए कहा, "बैंक लागू कानून के अनुसार, कर्मचारियों और दूसरे बाहरी लोगों के खिलाफ सख्त डिसिप्लिनरी, सिविल और क्रिमिनल कार्रवाई करेगा।"

बयान मे आगे कहा गया, "हरियाणा सरकार के एक खास डिपार्टमेंट से जानकारी मिलने पर शुरुआती इंटरनल असेसमेंट के आधार पर, बैंक ने चंडीगढ़ की एक खास ब्रांच में कुछ कर्मचारियों द्वारा बिना इजाजत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों से जुड़ी एक घटना की पहचान की है, और इसमें शायद दूसरे लोग/एंटिटी/काउंटरपार्टी भी शामिल हो सकते हैं।"

IDFC First Bank ने कहा कि अब तक पहचाने गए अकाउंट्स में कुल रकम 590 करोड़ रुपये है और घटना का असर आगे की जानकारी मिलने और क्लेम के वैलिडेशन के बाद तय किया जाएगा।

लेंडर ने कहा कि पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज की गई है। इसके अलावा, लेंडर एक इंडिपेंडेंट फोरेंसिक ऑडिट करने के लिए एक इंडिपेंडेंट बाहरी एजेंसी को नियुक्त करने की प्रक्रिया में है।

ऐसे चला गड़बड़ी का पता

धोखाधड़ी का पता तब चला जब बैंक को हरियाणा सरकार के एक खास डिपार्टमेंट से अपना अकाउंट बंद करने और दूसरे बैंक में फंड ट्रांसफर करने की रिक्वेस्ट मिली। इस प्रोसेस के दौरान, बताई गई रकम और अकाउंट में असली बैलेंस के बीच अंतर देखा गया।

18 फरवरी, 2026 के बाद से, हरियाणा सरकार की दूसरी कंपनियों ने अपने-अपने अकाउंट के बारे में बैंक से बात की, जिससे अकाउंट बैलेंस और सरकारी कंपनियों द्वारा क्लेम की गई रकम के बीच और अंतर सामने आया।

यह भी पढ़ें- 40 की उम्र में हुए फेल तो बन गए LIC एजेंट, रिटायरमेंट के बाद की नई शुरुआत; आज देश के सबसे उम्रदराज अरबपति