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IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी बेचने पर आया वित्त मंत्रालय का बयान, विनिवेश में क्यों किया अरुण जेटली के बयान का जिक्र?

Published: Sat, 17 Oct 2026 06:27 PM (IST)

वित्त मंत्रालय ने IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी बेचने को लेकर कानूनी अड़चनों की खबरों को खारिज किया है। ...और पढ़ें

IDBI Bank पर आई सरकार की स्पष्टता

IDBI Bank पर आई सरकार की स्पष्टता

HighLights

  1. वित्त मंत्रालय ने IDBI बैंक विनिवेश पर स्पष्टीकरण दिया।

  2. 2003 के कानून और 2018 के कोर्ट फैसले का जिक्र।

  3. अरुण जेटली और निर्मला सीतारमण के बयानों का समर्थन।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| बीते दिनों सरकार ने IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की जानकारी दी है, जिसके बाद से इसके कानूनी दांव पेंच को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई थीं। अब वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि IDBI बैंक में सरकार की हिस्सेदारी घटाने या उसके रणनीतिक विनिवेश में कोई कानूनी अड़चन नहीं है। मंत्रालय ने उन मीडिया रिपोर्ट्स और टिप्पणियों का जवाब दिया, जिनमें 2003 के विधायी घटनाक्रमों को आधार बनाकर विनिवेश को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे।

विनिवेश का विरोध करने वाले कुछ वर्ग दिल्ली उच्च न्यायालय के साल 2018 के एक आदेश के आधार पर सरकार के फैसले को अवैध बताने की कोशिश कर रहे थे, जिसे मंत्रालय ने तथ्यों के साथ खारिज किया।

15 साल पहले का बयान नहीं बन सकता आधार

वित्त मंत्रालय का कहना है कि 2003 में यूनियन बजट की चर्चा और आईडीबीआई अधिनियम, 2003 पर संसदीय बहस के दौरान सरकार की हिस्सेदारी घटाने पर प्रतिबंध लगाने वाला एक संशोधन प्रस्तावित किया गया था। लेकिन यह संशोधन अप्रूव नहीं हुआ और अंतिम रूप से पारित कानून का हिस्सा नहीं बना। बाद में दिल्ली उच्च न्यायालय ने ऑल इंडिया IDBI आफिसर्स एसोसिएशन बनाम यूनियन ऑफ इंडिया मामले में 17 दिसंबर 2018 को दिए फैसले में इस पहलू की विस्तार से जांच की।

अदालत ने याचिका खारिज करते हुए पैरा 41 और 42 में कहा कि संसद में लगभग 15 साल पहले दिए गए बयान केंद्र सरकार को IDBI लिमिटेड में अपनी हिस्सेदारी घटाने से नहीं रोक सकते। अदालत के अनुसार, संसद ने जानबूझकर प्रस्तावित प्रावधान को शामिल नहीं किया था और संसदीय बहस के बयान कानून की जगह नहीं ले सकते। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘प्रॉमिसरी एस्टापल’का सिद्धांत यहां लागू नहीं होता। यह सिद्धांत तभी लागू हो सकता था जब कर्मचारियों ने किसी वादा या बयान के आधार पर अपनी स्थिति में कोई नुकसान उठाया हो, लेकिन ऐसा नहीं था।

सरकार हिस्सेदारी कम करने की बात कहती आई है

अदालत ने कहा कि IDBI अधिनियम, 2003 की भाषा में कोई अस्पष्टता नहीं है और इसमें ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो सरकार को अपनी हिस्सेदारी कम करने या बेचने से रोकता हो। वित्त मंत्रालय ने यह भी अंडरलाइन किया कि सरकार की यह नीति लगातार बजट भाषणों में स्पष्ट रही है। साल 2016-17 के बजट भाषण में तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि IDBI Bank में बदलाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और सरकार हिस्सेदारी को 50 प्रतिशत से नीचे लाने के विकल्प पर भी विचार करेगी।

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इसी तरह 2021-22 के बजट भाषण में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि कोविड-19 के बावजूद रणनीतिक विनिवेश पर काम जारी रहा और आईडीबीआई बैंक सहित कई लेनदेन 2021-22 में पूरे किए जाएंगे। उन्होंने दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी के निजीकरण का भी जिक्र किया था।
मंत्रालय के अनुसार, 2003 के कानून दिल्ली उच्च न्यायालय का 2018 का फैसला और बजट भाषणों में व्यक्त नीति मिलकर यह साबित करते हैं कि सरकार आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश की दिशा में आगे बढ़ सकती है।