सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

TATA- मुकेश अंबानी ने कर्ज में डूबी इन कंपनियों की बदली किस्मत, कभी 'रद्दी भाव' खरीदीं अब अरबों की कमाई

Published: Wed, 25 Mar 2026 12:50 AM (IST)Updated: Wed, 25 Mar 2026 01:06 PM (IST)

टाटा ग्रुप और मुकेश अंबानी जैसे दिग्गजों ने दिवालिया कंपनियों की किस्मत बदली है। IIM अहमदाबाद और IBBI की रिपोर्ट ...और पढ़ें

दिवालिया कंपनियों की किस्मत बदलने वाली सबसे बड़ी स्टोरी। (AI फोटो)

दिवालिया कंपनियों की किस्मत बदलने वाली सबसे बड़ी स्टोरी। (AI फोटो)

timer icon

समय कम है?

जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

संक्षेप में पढ़ें

'पारस पत्थर जिसे छू ले, वह सोना बन जाता है।' भारतीय कॉर्पोरेट जगत में टाटा ग्रुप (Tata Group) और मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) किसी पारस पत्थर से कम नहीं हैं। जरा सोचिए, जो कंपनियां हजारों करोड़ के कर्ज में डूबकर पूरी तरह 'कंगाल' हो चुकी थीं, जिनके कारखानों पर ताले लटकने वाले थे और जो कौड़ियों के भाव नीलाम हो रही थीं... उनका क्या हुआ होगा?

जवाब है टाटा और रिलायंस जैसे दिग्गजों ने इन डूबती कंपनियों का हाथ थामा और इनकी किस्मत ऐसे पलटी कि आज ये शेयर बाजार में राज कर रही हैं! हाल ही में देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान IIM अहमदाबाद (IIM-A) और सरकारी संस्था IBBI ने एक रिसर्च रिपोर्ट जारी की है, जिसने पूरे बाजार को चौंका दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, दिवालिया कानून (IBC) के तहत नीलाम हुई 1,194 कंपनियों की वैल्यू महज़ 5 साल में 2.8 लाख करोड़ रुपये से उछलकर सीधे 9 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गई है!

आखिर कैसे भारी भरकम कर्ज में डूबी 'भूषण स्टील' में टाटा ने नई जान फूंकी? कैसे बंदी की कगार पर खड़ी 'आलोक इंडस्ट्रीज' को मुकेश अंबानी ने मुनाफे की मशीन बना दिया? और कैसे रामदेव की पतंजलि ने डूबती 'रुचि सोया' को शेयर बाजार का बाहुबली बना दिया? आइए जानते हैं दिवालिया कंपनियों की किस्मत बदलने वाली इस सबसे बड़ी 'टर्नअराउंड (Turnaround) स्टोरी' का पूरा सच...

कौन-सी हैं वो कंपनियां जिनकी दिवालियापन से पलटी किस्मत?

  • Essar स्टील: दिवालिया होने के बाद इसे आर्सेलरमित्तल और निप्पॉन स्टील (AM/NS) ने खरीदा और यह एक बहुत बड़ी सक्सेस स्टोरी बनी।
  • भूषण स्टील: भारी कर्ज में डूबने के बाद टाटा स्टील (Tata Steel BSL) ने इसका अधिग्रहण किया और इसके ऑपरेशन्स को फिर से मुनाफे में ला दिया।
  • रुचि सोया: कंगाली की कगार पर पहुंच चुकी इस कंपनी का पतंजलि (Patanjali) ने अधिग्रहण किया। आज यह शेयर बाजार की मजबूत कंपनियों में गिनी जाती है।
  • DHFL: वित्तीय संकट में फंसी इस दिग्गज हाउसिंग फाइनेंस कंपनी को पिरामल ग्रुप (Piramal Group) ने खरीदा और डूबने से बचाया।
  • आलोक इंडस्ट्रीज: रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और JM फाइनेंशियल ने मिलकर इस टेक्सटाइल कंपनी Alok Industries का सफल रेजोल्यूशन किया।
  • (जेपी इंफ्राटेक): रियल एस्टेट सेक्टर का यह एक बहुत बड़ा मामला था, जिसमें हजारों (Jaypee Infratech) घर खरीदारों के पैसे फंसे थे। इसका समाधान सुरक्षा ग्रुप (Suraksha Group) के अधिग्रहण के साथ हुआ।

रिपोर्ट में क्या है?

दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत पटरी पर आई कंपनियों के वित्तीय और परिचालन प्रदर्शन में सुधार देखा गया है। इन कंपनियों की बिक्री और परिसंपत्ति कारोबार में मजबूत वृद्धि हुई है। भारतीय प्रबंध संस्थान-अहमदाबाद (आईआईएम अहमदाबाद) के एक अध्ययन में यह बात सामने आई है। सरकार की संस्था IBBI ने IIM अहमदाबाद की रिसर्च के आधार पर हाल ही में (मार्च 2026) अपनी प्रेस विज्ञप्ति (Press Release) में साझा किया है। यह शोध अध्ययन 2023 में किए गए एक पूर्व अध्ययन पर आधारित है, जिसमें 2013-2022 की अवधि के दौरान पुनर्गठन के बाद की अवधि में कंपनियों का विश्लेषण किया गया था।

यह भी पढ़ें: मुकेश अंबानी की बेटी ईशा ने खेला दांव, रिलायंस रिटेल में जोड़ी एक और कंपनी; खरीद लिया पहाड़ी लोकल

कैसे पुनर्गठन प्रक्रिया से गुजरी 1,194 कंपनियां

एक बयान में कहा गया है कि अध्ययन के तहत नये घटनाक्रमों को शामिल करने के लिए 2025 तक इसका विस्तार कर विश्लेषण को अद्यतन और व्यापक बनाने का प्रयास किया गया है। पुनर्गठन प्रक्रिया से गुजरी कुल 1,194 कंपनियां इस अध्ययन का हिस्सा थीं। अध्ययन में पाया गया कि पुनर्गठन के बाद के पांच साल में गठित कंपनियों की औसत बिक्री में 89 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो व्यावसायिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण पुनरुद्धार का संकेत है। परिसंपत्ति उपयोग में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ। इसी अवधि के दौरान परिसंपत्ति कारोबार अनुपात में लगभग 131 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

कितनी तेजी से कंपनियों का बढ़ा मार्केट कैप?

अध्ययन के अनुसार, इन कंपनियों के पूंजीगत व्यय में पांच साल में लगभग 106 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि हुई, जो निवेश गतिविधियों में सुधार और आर्थिक व्यवहार्यता में वृद्धि को दर्शाता है। भारतीय ऋण शोधन एवं दिवाला बोर्ड (आईबीबीआई) ने बताया कि औसत परिसंपत्ति आधार में भी विस्तार हुआ। यह समाधान के पहले वर्ष में 228.33 करोड़ रुपये था जो पांचवें वर्ष में लगभग 11.5 प्रतिशत बढ़कर 254.60 करोड़ रुपये हो गया। समाधान वाली कंपनियों के बाजार पूंजीकरण (Market Cap) में भी तीव्र वृद्धि दर्ज की गई।

कंपनियों की वैल्यू 5 साल में 2.8 लाख करोड़ से नौ लाख करोड़ कैसे हुआ?

अध्ययन के अनुसार, कर्जदाताओं के साथ सफल समाधान के बाद कुल बाजार मूल्यांकन पांच वर्षों की अवधि में लगभग 2.8 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर नौ लाख करोड़ रुपये हो गया। यह निवेशकों के बढ़ते विश्वास और वृद्धि की संभावनाओं को बताता है। अध्ययन में पाया गया कि आईबीसी व्यवस्था के तहत संकटग्रस्त कंपनियों को पटरी पर लाने से संबंधित कंपनियों के प्रमुख वित्तीय और परिचालन संकेतकों में सुधार हुआ है। इस समाधान प्रक्रिया ने कंपनियों को दीर्घकालिक व्यवहार्यता बहाल करने, नए निवेश आकर्षित करने और कुल मिलाकर उत्पादकता बढ़ाने में सक्षम बनाया है।

भाषा इनपुट के साथ