GST रिटर्न फॉर्म पर वित्त मंत्रालय कर रहा बड़ा बदलाव, 1 नवंबर व्यापारियों के लिए है खास! मंत्रालय को भेजें सुझाव
वित्त मंत्रालय 1 नवंबर से मासिक जीएसटी रिटर्न फॉर्म में प्रस्तावित बदलावों पर कारोबारियों की राय मांगेगा। इसका उद्देश्य विसंगतियों ...और पढ़ें

GST फॉर्म पर होंगे बड़े बदलाव?
HighLights
वित्त मंत्रालय 1 नवंबर से जीएसटी रिटर्न फॉर्म पर राय मांगेगा।
उद्देश्य विसंगतियां घटाना और करदाताओं की प्रक्रिया आसान बनाना है।
संशोधित जीएसटी फॉर्म 1 अप्रैल, 2027 से लागू होंगे।
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| GST काउंसिल की 57वीं बैठक के बाद कई अहम बदलाव देखने को मिले, जिसमें जीएसटी रिटर्न में जरूरी चेंजेस देखने को मिले हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया कि वित्त मंत्रालय मासिक ‘जीएसटी रिटर्न फॉर्म’ में प्रस्तावित बदलावों पर 1 नवंबर से कारोबारियों की राय मांगेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के GST पॉलिसी डिविजन के कमिशनर गौरव सिंह ने कहा कि विभाग जीएसटी ऑडिट प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने की दिशा में भी काम करेगा। इससे टैक्स पेयर्स के लिए प्रक्रिया आसान होने की संभावना जताई जा रही है।
GST फॉर्म पर होंगे बड़े बदलाव?
8 अक्टूबर को केंद्र और राज्यों के वित्त मंत्रियों वाली GST काउंसिल की 57वीं बैठक में जीएसटी रिटर्न (टैक्स वापसी) में देनदारियों और इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) में संशोधन के लिए एक वैकल्पिक व्यवस्था को मंजूरी दी गई थी। इसका उद्देश्य विसंगतियों (Discrepancies) को कम करना और नोटिस या सूचना भेजने की जरूरत में कमी लाना है। काउंसिल ने GST फॉर्म जीएसटीआर-1, जीएसटीआर-1A और IFF में सुधारों को मंजूरी दी थी, ताकि इन फॉर्म में दी गई जानकारी का मासिक कर भुगतान फॉर्म जीएसटीआर-3B में दी गई जानकारी से बेहतर मिलान किया जा सके।
1 अप्रैल से लागू होगी नई नीति
GST पॉलिसी डिविजन के कमिशनर गौरव सिंह ने कहा कि संशोधित GST रिटर्न फॉर्म 1 नवंबर को ‘MyGov’ प्लेटफॉर्म पर पब्लिक ओपीनियन के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे। इन पर 30 नवंबर तक सुझाव दिए जा सकेंगे। संशोधित जीएसटी रिटर्न फॉर्म 1 अप्रैल, 2027 से लागू होगा। 8 अक्टूबर को हुई जीएसटी परिषद की बैठक में लिए गए फैसलों से संबंधित नॉटिफिकेशन और सर्कुलर की विधि विभाग ने जांच कर ली है। इन्हें शुक्रवार को सार्वजनिक किया जाएगा।
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सिंह ने साथ ही ये भी कहा कि ITC सीरिज की अखंडता (integrity) से जुड़ी समस्याएं दूर होने पर माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में आगे के सुधारों को गति मिलेगी। उन्होंने कहा, ऑडिट के संबंध में हमें समीक्षा करनी होगी। GST नीति प्रभाग के आयुक्त ने कहा कि प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए कि टैक्सपेयर्स को परेशानी का सामना न करना पड़े। फिलहाल, एक से अधिक राज्यों में कारोबार करने वाली कंपनियों को उन राज्यों के जीएसटी अधिकारियों द्वारा कई बार ऑडिट का सामना करना पड़ता है।
