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GST के रिटेल ई-इनवॉइसिंग का पायलट प्रोजेक्ट 2027 से लागू, होने जा रहे ये बड़े बदलाव

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:53 PM (IST)

जीएसटी अधिकारी 1 अप्रैल, 2027 से रिटेल ग्राहकों के इनवॉइस को इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज करने का पायलट प्रोजेक्ट शुरू ...और पढ़ें

GST के रिटेल ई-इनवॉइसिंग का पायलट प्रोजेक्ट 2027 से लागू हो सकता है

GST के रिटेल ई-इनवॉइसिंग का पायलट प्रोजेक्ट 2027 से लागू हो सकता है


HighLights

  1. रिटेल ग्राहकों के इनवॉइस का इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग पायलट प्रोजेक्ट।

  2. 1 अप्रैल 2027 से शुरू होगा, टैक्स कंप्लायंस सुधरेगा।

  3. कर चोरी रोकने और बड़े डेटा तक पहुंच का लक्ष्य।

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| वस्तु एवं सेवा कर (GST) अधिकारी 1 अप्रैल, 2027 से शुरू होने वाले पायलट प्रोजेक्ट के तहत दुकानों और कारोबारियों की ओर से रिटेल ग्राहकों को जारी किए जाने वाले इनवॉइस का विवरण इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज करने की योजना बना रहे हैं। इस कदम का उद्देश्य टैक्स कंप्लायंस में सुधार करना है। अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम से कर अधिकारियों को खुदरा लेनदेन के बड़े आंकड़ों तक पहुंचने और यह आकलन करने में मदद मिलेगी कि टैक्स चोरी की आशंका वाले क्षेत्रों में कारोबार सही तरीके से अपनी बिक्री की जानकारी दे रहे हैं या नहीं और उचित मात्रा में GST का भुगतान कर रहे हैं या नहीं।

कंप्लायंस बेहतर बनाने की दिशा में काम

वर्तमान में, ₹5 करोड़ से अधिक सालाना कारोबार वाले व्यवसायों को कुछ छूटों के अधीन, सरकारी पोर्टल पर अन्य व्यवसायों को जारी किए गए इनवॉइस को इलेक्ट्रॉनिक रूप से रजिस्टर्ड करना होता है। इस रिपोर्टिंग व्यवस्था को ई-इनवॉइसिंग कहा जाता है। इस व्यवस्था को अंतिम उपभोक्ताओं को की जाने वाली बिक्री तक बढ़ाना कर कंप्लायंस बेहतर बनाने की दिशा में कदम है। सितंबर 2024 में हुई जीएसटी काउंसिल की 54वीं बैठक में चुनिंदा क्षेत्रों और राज्यों में उपभोक्ता बिलों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज करने का वॉलेंट्री टेस्टिंग शुरू करने का प्रस्ताव दिया गया था।

बैठक के सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कार्यवृत्त (Minutes) के अनुसार, काउंसिल ने शुरुआत में इस प्रणाली को स्वैच्छिक आधार पर लागू करने और बाद में इसे कर चोरी की आशंका वाले क्षेत्रों में अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन क्षेत्रों में रिटेल ई-इनवॉइसिंग शुरू की जा सकती है, उनमें रेस्तरां का भी उल्लेख किया गया था। काउंसिल ने इसके कई संभावित लाभों की पहचान की थी। इनमें बेहतर टैक्स कंप्लायंस, कागजी इनवॉइस से बचने के कारण पर्यावरण को होने वाले फायदे और लागत में कमी शामिल हैं। उपभोक्ताओं को अपने मोबाइल फोन पर ई-इनवॉइस मिल सकेंगे।

बैंकों, बीमा कंपनियों और NBFC के लिए भी विचार

बैंक, बीमा कंपनियां और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) उन संस्थाओं में शामिल हैं, जिन्हें फिलहाल अन्य व्यवसायों के साथ लेनदेन के लिए ई-इनवॉइसिंग से छूट मिली हुई है। हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारें भी अपने कारोबार-से-कारोबार (B2B) इनवॉइस को इस व्यवस्था के दायरे में लाने पर विचार कर रही हैं। एक अधिकारी ने मीडिया से कहा कि यह प्रस्तावित पायलट परियोजना का हिस्सा नहीं है।

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खुदरा बिक्री के आंकड़ों का मैनेजमेंट

एक तीसरे अधिकारी ने, नाम जाहिर न करने की शर्त पर मीडिया को बताया कि खुदरा इनवॉइस को इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज करने का विचार कई सालों से चर्चा में रहा है। हालांकि, रोजाना होने वाले छोटे मूल्य के लेनदेन की बहुत बड़ी संख्या को संसाधित करने की चुनौती के कारण इसके क्रियान्वयन में देरी हुई। अधिकारी ने कहा कि इतने बड़े आंकड़ों को संग्रहित (Archived) करने और प्रोसेस्ड करने के लिए पर्याप्त सर्वर क्षमता की आवश्यकता होगी। पहले का टेक्निकल फ्रेमवर्क इस स्तर के आंकड़ों को संभालने के लिए तैयार नहीं था।

 

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