GST Rates में हर साल होगा एक बार बदलाव, काउंसिल की बैठक में रिफंड पर भी होगी चर्चा; सूत्र ने बताई अंदर की बात
जीएसटी परिषद की आगामी बैठक में कर दरों में साल में एक बार बदलाव और नए वित्त वर्ष से लागू ...और पढ़ें

जीएसटी परिषद की बैठक 8 अक्टूबर को होगी
HighLights
जीएसटी दरों में साल में एक बार बदलाव का प्रस्ताव।
कर रिफंड की समयसीमा 17 दिन करने पर विचार।
करदाताओं को नोटिस जारी करने के लिए एकसमान मानक।
एजेंसी, नई दिल्ली। जीएसटी की कर दरों में बदलाव के प्रस्तावों पर साल में केवल एक बार विचार करने और सभी संशोधनों को नए वित्त वर्ष की शुरुआत से लागू करने के प्रस्ताव पर जीएसटी परिषद की आगामी बैठक में चर्चा होगी। इसके अलावा, कर रिफंड की समयसीमा घटाकर 17 दिन करने के प्रस्ताव पर भी विचार होगा। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
इसके साथ ही, परिषद करदाताओं को नोटिस जारी करने के मामले में एकसमान मानक बनाने और निर्धारित सीमा से नीचे के मामलों में कोई नोटिस नहीं देने के प्रस्ताव पर भी विचार करेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की बैठक आठ अक्टूबर को होगी।
राज्यों के वित्त मंत्री होंगे शामिल
राज्यों के वित्त मंत्री भी परिषद के सदस्य के तौर पर इस बैठक में शामिल होंगे। परिषद ने पिछले साल सितंबर में कर दरों और स्लैब को तर्कसंगत बनाने का फैसला किया था। चार स्लैब वाले जीएसटी (पांच, 12, 18 और 28 प्रतिशत) की जगह सिर्फ दो-दर वाली व्यवस्था (पांच और 18 प्रतिशत) लागू की गई थी। वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि जीएसटी परिषद की 57वीं बैठक के एजेंडा में कर दरों में बदलाव का कोई प्रस्ताव शामिल नहीं है। सूत्रों ने कहा कि भविष्य में दरों में बदलाव के प्रस्ताव साल में एक बार ही लाए जाएंगे और उन्हें एक अप्रैल यानी नए वित्त वर्ष से लागू किया जाएगा।
रिफंड की 10 दिन के भीतर पुष्टि पर विचार
आगामी बैठक में दरों को तर्कसंगत बनाने और अस्पष्टता दूर करने से जुड़े सीमित मुद्दों पर विचार किया जाएगा। कर रिफंड के बारे में एक सूत्र ने कहा, "रिफंड की 10 दिन के भीतर पुष्टि कर दी जाएगी और उसके अगले सात दिन में उसे जारी करने का प्रस्ताव है। यानी रिफंड प्रक्रिया 17 दिन में पूरी कर लेने का प्रस्ताव है जिस पर जीएसटी परिषद गौर करेगी।"
फिलहाल जीएसटी के कर रिफंड में 21 दिन से लेकर 45 दिन तक का समय लग जाता है। इसके अलावा जीएसटी नोटिस, सुनवाई और आदेश के लिए एकसमान मानक बनाने का भी प्रस्ताव है। साथ ही एक तय सीमा से कम होने पर कोई नोटिस नहीं देने का भी प्रस्ताव है। इस पर भी परिषद विचार करेगी। सूत्र ने कहा कि जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने का भी प्रस्ताव परिषद के समक्ष रखा जाएगा।
उन्होंने कहा, "वर्तमान में 61 प्रतिशत करदाताओं को बिना किसी अधिकारी के हस्तक्षेप के तीन कार्यदिवस में पंजीकरण दिया जा रहा है। शेष करदाताओं के लिए प्रक्रिया को इस तरह सरल बनाया जा रहा है कि अनावश्यक सवालों और आवेदन खारिज होने से बचा जा सके।"
कई अन्य प्रस्ताव भी हो सकते हैं मंजूर
अन्य प्रस्तावों के तहत परिषद यह मंजूर कर सकती है कि ई-कॉमर्स मंच के जरिये की जाने वाली आपूर्ति पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के बिना पांच प्रतिशत की एकल जीएसटी दर लागू होगी।
सूत्र ने कहा, "ज्यादातर कारोबारियों के लिए किसी रियायत से अधिक महत्वपूर्ण निरंतरता है। स्थिर कर दर व्यवस्था से अनुबंधों की पूरी अवधि के लिए कीमत तय करने और पूंजीगत व्यय की योजना बनाने में मदद मिलती है।"
उन्होंने कहा कि पिछले साल पुनर्गठित जीएसटी व्यवस्था करीब एक साल से लागू है और इससे उपभोक्ताओं, उद्योग, कर राजस्व तथा अर्थव्यवस्था को लाभ हुआ है। पिछले साल जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाए जाने से खपत को बढ़ावा मिला है और जीएसटी राजस्व में भी वृद्धि हुई है। इस साल जून से मासिक जीएसटी राजस्व में दहाई अंक में वृद्धि हुई है।
