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Success Story: 13 साल की उम्र में छोड़ना पड़ी पढ़ाई, साइकिल पर बेचा मक्खन; फिर ऐसे बना दी ₹1000 करोड़ की कंपनी

Published: Sun, 13 Sep 2026 01:20 PM (IST)

जीआरबी डेयरी फूड्स के संस्थापक जीआर बालासुब्रमण्यम की कहानी आर्थिक तंगी से निकलकर 1000 करोड़ रुपये के कारोबार तक पहुंचने ...और पढ़ें

जीआरबी डेयरी प्रोडक्ट्स का मालिक कौन?

जीआरबी डेयरी प्रोडक्ट्स का मालिक कौन?

HighLights

  1. आर्थिक तंगी के कारण 13 साल में छोड़ी स्कूल की पढ़ाई

  2. साइकिल पर मक्खन बेचकर की अपने कारोबार की शुरुआत

  3. आज GRB डेयरी फूड्स का 1000 करोड़ का वैश्विक साम्राज्य

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आम तौर पर माना जाता है कि सिर्फ मेहनत आपकी सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि बेहतर प्लानिंग भी जरूरी है। इन दो चीजों के सहारे कोई भी बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। ऐसी ही बहुत से कारोबारियों की दिलचस्प कहानियां मौजूद हैं, जो दूसरों के लिए भी काफी प्रेरणादायक हैं।
इनमें से एक कहानी है जीआरबी डेयरी फूड्स (GRB Dairy Foods) के फाउंडर जीआर बालासुब्रमण्यम (GR Balasubramaniam Success Story) की। बालासुब्रमण्यम की कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि उन्होंने आर्थिक तंगी झेली, स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ी, साइकिल पर मक्खन बेचा और फिर एक ऐसी कंपनी बनाई, जिसका कारोबार आज के समय में 40 देशों में फैला है। आइए जानते हैं उनकी कहानी विस्तार से।

छोटे से गांव में हुआ जन्म

बालासुब्रमण्यम की सक्सेस स्टोरी की बात करें तो जीआरबी डेयरी की शुरुआत से पहले ही उनकी कहानी शुरू हो गई थी। उनका जन्म तमिलनाडु के पलानी में छोटे से गांव चिन्ना कराट्टुपट्टी में हुआ था। उनके माता-पिता के कुल 6 बच्चे थे।
आर्थिक तंगी के चलते बालासुब्रमण्यम ने 13 साल की उम्र में स्कूल छोड़ा और कमाने के लिए उन्हें बेंगलुरु जाना पड़ा।

जीजाजी की दुकान पर नौकरी

बेंगलुरु में बालासुब्रमण्यम ने करीब 14 साल तक नौकरी की। उन्हें अपने जीजाजी की दुकान पर ही नौकरी करनी पड़ी, जो कि मक्खन का काम करते थे। बालासुब्रमण्यम को हमेशा कुछ नया करने का मन था। इसलिए उन्होंने नौकरी छोड़ी और खुद का मक्खन का कारोबार शुरू किया।
जब उन्होंने अपना कारोबार शुरू किया तो उनके पास सिर्फ 6000 रुपये थे। इसी बचत और कारोबार से GRB Dairy Foods की नींव पड़ी।

जानकारी का बखूबी इस्तेमाल

खास बात ये है कि अपने जीजाजी के साथ मक्खन का कारोबार करते हुए बालासुब्रमण्यम ने इस बिजनेस की सारी छोटी-बड़ी जानकारी ले ली थी। इसी जानकारी का इस्तेमाल उन्होंने अपने कारोबार को आगे बढ़ाने में किया। बालासुब्रमण्यम ने छोटे उत्पादकों से मक्खन खरीदा और उसे बेंगलुरु में बेचना शुरू किया।

मक्खन को घी में बदला

मक्खन के कारोबार में सफलता मिलने पर बालासुब्रमण्यम ने मक्खन को घी में कंवर्ट करके पैकेट में बेचना शुरू किया। इसके साथ ही उन्होंने अपना पहला प्रोडक्ट बाजार में लॉन्च किया। उनकी शुरुआत छोटी थी, जो केवल एक कमरे से शुरू हुआ था।
कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए बालासुब्रमण्यम पैसा चाहिए था। इसीलिए बालासुब्रमण्यम ने एक चिट फंड कंपनी शुरू की। ये भी उन्होंने अपने जीजाजी के साथ काम करते हुए सीखा था।

परिचित लोगों से जुटाया पैसा

बालासुब्रमण्यम ने अपने जानने वाले लोगों को चिट फंड का मॉडल समझाया और एक ग्रुप बनाने में सफल रहे। जो पैसा इन लोगों से जुटाया, उसे मक्खन के कारोबार में लगाया। मगर तब एक नई समस्या आ गई। ये समस्या थी मक्खन के जल्दी खराब होने की।
इसीलिए उन्होंने घी बनाकर बाजार में उतारा। जैसे-जैसे कारोबार बढ़ा, कमाई भी बढ़ी और उन्होंने अधिक लोगों को काम पर रखा।

इस शहर में थी पहली फैक्ट्री

बालासुब्रमण्यम ने पहली फैक्ट्री बेंगलुरु में लगाई। आज उनका कारोबार 40 देशों में फैला हुआ है। पहली फैक्ट्री 1991 में लगाने के बाद उन्होंने डिंडीगुल और होसुर में भी प्लांट लगाए। पैकेज्ड घी के बाद उन्होंने कई डेयरी प्रोडक्ट पेश किए।
आज की तारीख में कंपनी का रेवेन्यू 1000 करोड़ रुपये से अधिक का है। वहीं इसके प्रोडक्ट पोर्टफोलियो में 70 से ज्यादा डेयरी उत्पाद हैं।

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