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Petrol-Diesel पर सरकार ने लिया एक और बड़ा फैसला, थोक खरीदी पर 90 दिन तक रोक, पंप से ऑयल नहीं खरीद सकेंगे ये लोग

Published: Fri, 12 Jun 2026 08:39 AM (IST)

केंद्र सरकार ने औद्योगिक, वाणिज्यिक और संस्थागत उपयोगकर्ताओं को खुदरा पंपों से पेट्रोल-डीजल खरीदने से रोक दिया है। उन्हें अब ...और पढ़ें

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HighLights

  1. इंडस्ट्रियल और कमर्शियल यूजर्स के लिए रिटेल पंप से खरीदी पर रोक।

  2. अब Bulk Sale Points से ही खरीदना होगा पेट्रोल-डीजल।

  3. खुदरा और थोक कीमतों में अंतर के कारण लिया फैसला।

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने पेट्रोल की थोक बिक्री (Petrol Bulk Sale) पर एक बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के 11 जून के एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, सरकार ने इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और संस्थागत यूज़र्स को रिटेल पंपों से पेट्रोल और डीज़ल खरीदने से रोक दिया है और उन्हें बल्क सेल पॉइंट से ईंधन खरीदने का निर्देश दिया है। ये पाबंदियां शुरुआती तौर पर 90 दिनों तक लागू रहेंगी और सरकार के नए आदेश से इन्हें बढ़ाया भी जा सकता है।

मंत्रालय ने 'मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीज़ल (रिटेल आउटलेट्स के ज़रिए सप्लाई का अस्थायी नियमन) आदेश, 2026' जारी किया है। यह आदेश देश के कुछ हिस्सों में रिटेल आउटलेट्स के ज़रिए पेट्रोल और डीज़ल की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी के बाद जारी किया गया है।

सरकार ने ऑर्डर में क्या कहा?

सरकारी की ओर से जारी इस आदेश में कहा गया है कि यह बढ़ोतरी इसलिए हुई क्योंकि इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल ग्राहक रिटेल और बल्क बिक्री की कीमतों में अंतर के कारण रिटेल आउटलेट्स से खरीदारी करने लगे हैं।

नोटिफिकेशन में कहा गया है, "मौजूदा हालात में देखा गया है कि देश के कुछ हिस्सों में रिटेल आउटलेट्स के ज़रिए मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) और हाई स्पीड डीज़ल (डीज़ल) की बिक्री में असामान्य बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह यह है कि इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल ग्राहक रिटेल और बल्क बिक्री की कीमतों में अंतर के कारण रिटेल आउटलेट्स से खरीदारी कर रहे हैं।"

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा कि "दुनिया के कुछ हिस्सों में मौजूदा जियोपॉलिटिकल हालात" ने इंटरनेशनल पेट्रोलियम सप्लाई चेन, शिपिंग लॉजिस्टिक्स और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की उपलब्धता पर असर डाला है।

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पश्चिम एशिया संकट के बाद कच्चे तेल की लागत बढ़ने पर आम ग्राहकों को राहत देने के लिए सरकारी तेल मार्केटिंग कंपनियों ने रिटेल पंप पर कीमतें कम रखीं, जिससे कीमतों में अंतर बढ़ गया। टेलीकॉम टावर और बिजली बनाने या फीडस्टॉक की ज़रूरतों के लिए डीज़ल का इस्तेमाल करने वाली इंडस्ट्रीज़ जैसे बड़े ग्राहकों से मार्केट से जुड़ी कीमतें वसूली जाती हैं।