सर्च करे
Home
फोकस
विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

तिनके से ताज का सफर! जमीन से आसमान पर पहुंचे ये कारोबारी; किसी ने ₹5000 तो किसी ने बिना आंखों के खड़ा किया बिजनेस

Published: Wed, 23 Sep 2026 03:11 PM (IST)

यह लेख भारत के 5 ऐसे सफल उद्यमियों की कहानियाँ बताता है जिन्होंने गरीबी से शुरुआत कर अपनी मेहनत और ...और पढ़ें

तिनके से ताज तक का सफर

तिनके से ताज तक का सफर

HighLights

  1. धीरूभाई अंबानी ने 15,000 रुपये से रिलायंस इंडस्ट्रीज की नींव रखी

  2. किरण मजूमदार-शॉ ने बायोकॉन को अग्रणी बायोफार्मा कंपनी बनाया

  3. करसनभाई पटेल ने निरमा को साइकिल पर बेचकर बड़ा ब्रांड बनाया

बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत में ऐसे कई चेहरे हैं जिनकी कहानी गरीबी से शुरू हुई थी। कोई चाय की दुकान पर काम करता था, कोई साइकिल पर सामान बेचता था, किसी के पास स्कूल की फीस तक नहीं थी। विरासत में उन्हें दौलत नहीं, सिर्फ जिद मिली थी। सुबह से रात तक की मेहनत, छोटे-छोटे मौकों को पकड़ने की हिम्मत और असफलता में भी न रुकने के जज्बे ने उन्हें वहाँ पहुँचा दिया जहाँ आज पूरी दुनिया उन्हें अमीरों की लिस्ट में गिनती है। ये कहानियाँ बताती हैं कि भारत में किस्मत से ज्यादा मेहनत की कीमत है। यहां हम आपको ऐसे ही 5 लोगों की जानकारी देंगे।

धीरूभाई अंबानी

गुजरात के एक छोटे से गाँव में जन्मे धीरूभाई अंबानी की औपचारिक शिक्षा बहुत कम थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज शुरू करने से पहले, उन्होंने सिर्फ़ 15,000 रुपये की पूँजी के साथ पॉलिएस्टर यार्न (धागे) का आयात और बिक्री करके अपने उद्यमिता के सफर की शुरुआत की थी।
उनका एक मशहूर बयान है, "अगर आप अपने सपने को साकार नहीं करते हैं, तो कोई और आपको अपने सपने को साकार करने में मदद के लिए काम पर रख लेगा।" आज, रिलायंस भारत के सबसे बड़े व्यापारिक समूहों में से एक है, जिसका कारोबार पेट्रोकेमिकल्स, रिटेल, तेल और गैस, टेलीकम्युनिकेशन और अन्य क्षेत्रों में फैला हुआ है।

अनूप कनोडिया

पारंपरिक सोच वाले बैकग्राउंड से आने के कारण अनूप कनोडिया को शुरुआत में ही सफलता नहीं मिली, लेकिन फूड इंडस्ट्री में गहरी दिलचस्पी ने उनके IdlyGo को एक सफल बिजनेस बना दिया। कोलकाता में हेडक्वार्टर वाली IdlyGo ने 3 फरवरी 2022 को कोलकाता के डलहौजी इलाके में बैंकशाल कोर्ट में अपनी साइकिल वेंडिंग का पहला ट्रायल शुरू किया।
शुरुआत में एक क्लाउड किचन स्टार्टअप के तौर पर, उन्होंने आम लोगों तक किफायती दामों पर ताजा और पौष्टिक साउथ इंडियन खाना पहुँचाने का सफर शुरू किया। हर हब में 20-50 वेंडर्स की एक टीम होती है जो IdlyGo वेंडिंग साइकिल पर खाना सेल्स लोकेशन तक पहुँचाती है, जिससे इडली के प्रोडक्शन और डिस्ट्रीब्यूशन, दोनों में कम से कम कार्बन फुटप्रिंट सुनिश्चित होता है।

किरण मजूमदार-शॉ

बेंगलुरु के एक मध्यम-वर्गीय परिवार में जन्मीं किरण ने 1978 में किराए के गैराज में बहुत कम निवेश के साथ बायोकॉन की शुरुआत की। कंपनी ने पहले एंजाइम बनाने पर ध्यान दिया और बाद में बायोफार्मास्यूटिकल्स के क्षेत्र में अपना विस्तार किया।
उनके सफर की एक बड़ी उपलब्धि डायबिटीज के मरीजों के लिए किफायती इंसुलिन बनाना था। आज बायोकॉन भारत की सबसे बड़ी बायोफार्मास्यूटिकल कंपनी बन गई है, जिससे किरण भारत की सबसे सफल 'सेल्फ-मेड' महिला उद्यमी हैं।

श्रीकांत बोल्ला

श्रीकांत बोल्ला का जन्म आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गाँव में किसानों के परिवार में हुआ था और वे जन्म से ही दृष्टिहीन थे। मुश्किलों से पार पाने के उनके पक्के इरादे ने उनके आगे के शानदार सफर की नींव रखी। अपनी हिम्मत और मजबूत इच्छाशक्ति के दम पर, वे IIT बॉम्बे में दाखिला लेने वाले पहले दृष्टिहीन छात्र बने और फिर 'बोल्लंत इंडस्ट्रीज' की शुरुआत की।
यह कंपनी कागज और रीसायकल की गई चीजों का इस्तेमाल करके पर्यावरण के अनुकूल पैकेजिंग उत्पाद बनाती है। उनका एक और अहम योगदान दिव्यांग लोगों के लिए रोज़गार के अवसर पैदा करना था।

करसनभाई पटेल

भारत की सबसे प्रेरणादायक बिजनेस कहानियों में से एक, करसनभाई ने सिर्फ 5,000 रुपये के छोटे से निवेश से 'निरमा' को घर पर बनने वाले छोटे स्तर के डिटर्जेंट ब्रांड से एक बड़ी कंज्यूमर प्रोडक्ट कंपनी बना दिया। शुरुआत में वे घर पर ही डिटर्जेंट बनाते थे और उसे अपनी साइकिल पर बेचते थे। साथ ही 'निरमा' के प्रचार के लिए लोगों की आपसी बातचीत का तरीका अपनाते थे।
आज, निरमा एक मल्टी-बिलियन डॉलर की कंपनी बन चुकी है और इसके पास कई सेक्टर में अलग-अलग तरह के प्रोडक्ट्स हैं, जिनमें केमिकल, साबुन, डिटर्जेंट और सीमेंट का उत्पादन शामिल है।

ये भी पढ़ें - ये है देश का सबसे पुराना हलवाई! 236 साल पहले राजस्थान के लालाजी ने चांदनी चौक में की शुरुआत; बादशाहों से PM-राष्ट्रपति तक फैन