कौन हैं केएल बंसल, जिनके ग्राहक हैं मुकेश अंबानी तक? प्रोसेस पाइपिंग के दिग्गज; अब न्यूक्लियर और डेटा सेंटर पर नजर
डीईई डेवलपमेंट इंजीनियर्स ने साढ़े तीन दशकों में प्रोसेस पाइपिंग सॉल्यूशंस में अपनी पहचान बनाई है, जिसके ग्राहकों में रिलायंस ...और पढ़ें

केएल बंसल की सक्सेस स्टोरी (AI फोटो)
HighLights
डीईई ने 1988 से प्रोसेस पाइपिंग में विशेषज्ञता हासिल की
जून 2024 IPO के बाद कंपनी का कारोबार तेजी से बढ़ा
न्यूक्लियर, डेटा सेंटर क्षेत्रों में विस्तार की तैयारी, ₹2500 करोड़ लक्ष्य
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत की बड़ी रिफाइनरी, पावर प्लांट और इंडस्ट्रियल परियोजनाओं में कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जो आम लोगों को दिखाई नहीं देतीं, लेकिन पूरी इंडस्ट्री की रीढ़ होती हैं। इन्हीं में से एक है प्रोसेस पाइपिंग। ऐसी पाइपिंग जिसके जरिए तेल, गैस, भाप और दूसरे औद्योगिक पदार्थों को सुरक्षित तरीके से एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जाता है। इसी कारोबार में डीईई डेवलपमेंट इंजीनियर्स (DEE Development Engineers) ने पिछले साढ़े तीन दशकों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
किसने की थी शुरुआत?
कंपनी की शुरुआत 1988 में केएल बंहस (KL Bansal Success Story) ने की थी। आज DEE भारत में स्थापित क्षमता के लिहाज से प्रोसेस पाइपिंग सॉल्यूशंस की प्रमुख कंपनियों में शामिल है और इसके ग्राहकों में रिलायंस इंडस्ट्रीज, मित्सुबिशी हेवी इंडस्ट्रीज, तोशिबा जेएसडब्ल्यू पावर सिस्टम्स, मैन एनर्जी सॉल्यूशंस और जॉन कॉकरिल जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
1988 में शुरुआत, फिर स्पेशलाइज्ड इंजीनियरिंग पर फोकस
केएल बंसल ने DEE की शुरुआत ऐसे समय में की, जब भारत में औद्योगिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार हो रहा था। कंपनी ने सामान्य इंजीनियरिंग कारोबार के बजाय धीरे-धीरे कस्टमाइज्ड प्रोसेस पाइपिंग और उससे जुड़ी इंजीनियरिंग पर अपनी एक्सपर्टीज डेवलप की।
तेल-गैस, पावर, केमिकल और दूसरी प्रोसेस इंडस्ट्रीज के लिए जटिल पाइपिंग सिस्टम तैयार करना DEE के कारोबार का मुख्य हिस्सा बन गया। कंपनी ने डिजाइन, फैब्रिकेशन और मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं को साथ जोड़कर खुद को एक इंटीग्रेटेड सप्लायर के रूप में तैयार किया। यही एक्सपर्टीज आगे चलकर बड़े औद्योगिक ग्राहकों के साथ लंबे रिश्तों की वजह बनी।
बड़े क्लाइंट्स ने बढ़ाया भरोसा
DEE की ग्रोथ में बड़े औद्योगिक ग्राहकों के साथ लंबे रिश्तों की अहम भूमिका रही है। कंपनी के प्रमुख ग्राहकों में मुकेश अंबानी की Reliance समेत कई बड़े नाम शामिल हैं। कंपनी के दस्तावेजों के मुताबिक Reliance और Mitsubishi के साथ उसका जुड़ाव 12 साल का है, जबकि Toshiba JSW Power Systems के साथ 10 साल और MAN Energy Solutions के साथ 11 साल का है।
इस समय डीईई की मार्केट कैपिटल करीब 5 हजार करोड़ रुपये की है।
छोटी शुरुआत से मल्टी-लोकेशन मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क तक
बड़े ऑर्डर्स के साथ DEE ने अपनी उत्पादन क्षमता भी लगातार बढ़ाई। कंपनी के पास हरियाणा के पलवल में कई मैन्युफैक्चरिंग सुविधाओं के अलावा गुजरात के अंजार, राजस्थान के बाड़मेर, असम के नुमालीगढ़ और थाईलैंड के बैंकॉक में भी उत्पादन सुविधाएं हैं।
कंपनी ने रोबोटिक वेल्डिंग, CNC मशीनों और ऑटोमैटिक इंडक्शन बेंडिंग जैसी तकनीकों को अपनाकर उत्पादन क्षमता और क्वालिटी को मजबूत किया। FY25 में कंपनी का ऑपरेशनल रेवेन्यू करीब ₹827.4 करोड़ और ऑपरेटिंग EBITDA करीब ₹123.8 करोड़ रहा था।
IPO ने बदली तस्वीर
DEE Development Engineers ने जून 2024 में अपना IPO पेश किया, जिसे निवेशकों से करीब 99 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था। IPO से कंपनी ने पूंजी जुटाकर वर्किंग कैपिटल की जरूरत और कर्ज चुकाने पर फोकस किया। इसके बाद कारोबार का आकार तेजी से बढ़ा।
FY26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब ₹1,142 करोड़, EBITDA ₹191 करोड़ और टैक्स के बाद मुनाफा करीब ₹77 करोड़ रहा। जून 2026 तक कंपनी का ऑर्डर बुक करीब ₹2,428 करोड़ रहा। अगस्त 2026 के अंत तक यह बढ़कर करीब ₹2,435.61 करोड़ हो गया।
अब अगला निशाना Nuclear और Data Centre सेक्टर
DEE अब केवल पारंपरिक तेल-गैस और पावर कारोबार तक सीमित नहीं रहना चाहती। सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी न्यूक्लियर पावर, थर्मल पावर और डेटा सेंटर जैसे हाई-वैल्यू सेगमेंट में विस्तार की तैयारी कर रही है।
K.L. Bansal के अनुसार कंपनी 2030 तक रेवेन्यू को ₹2,500 करोड़ से ज्यादा करने का लक्ष्य रख रही है, जबकि मौजूदा ऑर्डर बुक करीब ₹2,500 करोड़ के आसपास बताई गई है।
