नाजियों से बचकर भारत लौटे, ₹2 लाख में 91 साल पहले बनाई दिग्गज फार्मा कंपनी; आज बेटा संभाल रहा ₹1 लाख करोड़ की विरासत
सिप्ला के संस्थापक डॉ. ख्वाजा अब्दुल हमीद की जयंती पर यह लेख उनकी यात्रा और कंपनी के स्वदेशी आंदोलन में ...और पढ़ें

सिप्ला के फाउंडर का आज है बर्थडे
HighLights
डॉ. ख्वाजा अब्दुल हमीद ने 1935 में सिप्ला की स्थापना की
सिप्ला का लक्ष्य स्वदेशी आंदोलन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना था
आज यह कंपनी 1.12 लाख करोड़ रुपये की मार्केट कैप वाली है
बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। भारत की बड़ी दवा कंपनियों में सिप्ला भी शामिल है। आपने जरूर इस कंपनी का नाम सुना होगा। सिप्ला की शुरुआत अगस्त 1935 में मुंबई में 'केमिकल, इंडस्ट्रियल एंड फार्मास्युटिकल लैबोरेटरीज' के नाम से डॉ ख्वाजा अब्दुल हमीद ने की थी। आज डॉ ख्वाजा अब्दुल हमीद की जयंती है।
वे आज ही के दिन 1898 में अलीगढ़ में पैदा हुए थे। फिर 73 साल की उम्र में तेहरान (ईरान) में उनका निधन हो गया था। मगर तब तक सिप्ला भारतीय फार्मा सेक्टर में एक बड़ा नाम बन चुकी थी। डॉ ख्वाजा अब्दुल हमीद के बाद उनके बेटे डॉ यूसुफ हमीद ने सिप्ला को आगे बढ़ाया और आज ये 1.12 लाख करोड़ रुपये की मार्केट कैपिटल वाली कंपनी है।
क्या था कंपनी का मकसद?
सिप्ला का मकसद स्वदेशी आंदोलन का सपोर्ट करना और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना था। इसी विजन के चलते सन 1939 में महात्मा गांधी ने मुंबई सेंट्रल में सिप्ला की लैब का दौरा किया, जिससे राष्ट्र-निर्माण और आत्मनिर्भरता के प्रति कंपनी के नजरिए को और बल मिला।
बेटे की सिप्ला में एंट्री
1961 में डॉ यूसुफ हामिद (फाउंडर के बेटे) सिप्ला की रिसर्च और डेवलपमेंट टीम में शामिल हुए। उन्होंने 30 से अधिक एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) के स्थानीय निर्माण की शुरुआत की और भारत के पहले इनहेलर पेश किए। 65 साल बाद यूसुफ हामिद आज भी सिप्ला के बोर्ड में शामिल हैं।
कहां से की थी पढ़ाई?
इटावा के इस्लामिया हाई स्कूल से मैट्रिक पास करने और गणित में अपनी विशेष योग्यता साबित करने के बाद, ख्वाजा अब्दुल हमीद ने 1917 में आगरा कॉलेज से साइंस में इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की। केमिस्ट बनने का फैसला करने के बाद, उन्होंने मद्रास के एक ट्रेड स्कूल में लेदर टेक्नोलॉजी की पढ़ाई में एक साल बिताया।
इसके बाद उन्होंने इलाहाबाद के मुइर सेंट्रल कॉलेज में दाखिला लिया, जहाँ से उन्होंने 1920 में केमिस्ट्री में B.Sc. की डिग्री पूरी की। कॉलेज में रहते हुए, वे जाने-माने इनऑर्गेनिक केमिस्ट नील रतन धर के पसंदीदा छात्र बन गए, जिनके मार्गदर्शन में उन्होंने अपनी मास्टर डिग्री की पढ़ाई की।
हमीद ने उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की और जर्मनी के बर्लिन स्थित हम्बोल्ट विश्वविद्यालय से एम.ए. और पीएचडी की डिग्रियां प्राप्त कीं।
जर्मनी से भागना पड़ा
ब्रिटिश शासन के दौरान, 1924 में हमीद के परिवार ने उन्हें इंग्लैंड में केमिकल साइंस की पढ़ाई के लिए भेजने के लिए पैसे जुटाए। लेकिन उन्होंने अपना प्लान बदल लिया और जर्मनी चले गए, जो उस समय केमिकल्स के क्षेत्र में दुनिया में सबसे आगे था।
बर्लिन की एक झील के किनारे उनकी मुलाकात लिथुआनिया की एक यहूदी समाजवादी महिला से हुई, जिनसे उन्होंने शादी कर ली। जब जर्मनी में नाजियों की सत्ता आई, तो उन्हें वहां से भागना पड़ा।
फिर 'केमिकल, इंडस्ट्रियल एंड फार्मास्युटिकल लैबोरेटरीज' (सिप्ला) की स्थापना 1935 में 2 लाख रुपये की शुरुआती पूंजी के साथ हुई थी। कंपनी ने 1937 में उत्पादन शुरू की और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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